शोपियां में सीआरपीएफ एएसआई की ड्यूटी के दौरान मौत, कुलगाम में 25 वर्षीय मैकेनिक का शव बरामद
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में शुक्रवार, 29 मई को एक सीआरपीएफ एएसआई की ड्यूटी के दौरान मौत हो गई, जबकि कुलगाम जिले के चिम्मर इलाके में एक 25 वर्षीय युवक का शव उसके घर के अंदर बरामद किया गया। दोनों घटनाओं में पुलिस ने मामले का संज्ञान लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
शोपियां में एएसआई की मौत
पुलिस के अनुसार, शोपियां जिले के जैनापोरा इलाके में स्थित हॉर्टिकल्चर कैंप में तैनात सीआरपीएफ एएसआई अचानक गिर पड़े। उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), जैनापोरा ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने बताया कि मृत एएसआई कठुआ जिले के राजबाग इलाके का निवासी था। मौत के सटीक कारण की जाँच की जा रही है और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
कुलगाम में युवक का शव मिला
कुलगाम जिले के चिम्मर इलाके में 25 वर्षीय एक युवक अपने घर के अंदर फंदे से लटका हुआ मिला। पेशे से मैकेनिक यह युवक अपने घर में मृत अवस्था में पाया गया।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया, "मेडिको-लीगल औपचारिकताएँ और पोस्टमार्टम पूरा होने के बाद शव परिवार को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया। पुलिस ने मामले का संज्ञान लेकर आगे की जाँच शुरू कर दी है।"
कश्मीर में युवा आत्महत्या: एक गंभीर संकट
यह घटना ऐसे समय में आई है जब कश्मीर घाटी में युवाओं द्वारा आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, घाटी में आत्महत्या के मामले 2020 में 472 से बढ़कर 2021 में 586 हो गए। 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग में आत्महत्या मौत का चौथा सबसे बड़ा कारण बन चुकी है।
गौरतलब है कि यह स्थिति सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक कारणों के जटिल असर का परिणाम मानी जा रही है। अनुमानों के अनुसार, करीब 4.6 प्रतिशत आबादी नशीले पदार्थों का सेवन करती है, जिनमें से लगभग दो-तिहाई ने इसकी शुरुआत 11 से 20 साल की उम्र के बीच की थी।
मानसिक स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक असर
लंबे समय तक हिंसा और सामाजिक-राजनीतिक अशांति का गहरा असर घाटी के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ा है। अनुमानों के अनुसार, करीब 45 प्रतिशत वयस्क आबादी किसी न किसी मानसिक परेशानी से जूझ रही है — इनमें डिप्रेशन के 41 प्रतिशत, एंग्जायटी के 26 प्रतिशत और पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) के 19 प्रतिशत मामले शामिल हैं।
उच्च बेरोज़गारी, आर्थिक दबाव और शिक्षा व रोज़गार के अवसरों के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण युवाओं में निराशा बढ़ रही है। नशे और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सामाजिक कलंक की भावना के चलते कई लोग समय पर सहायता लेने से बचते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर होती जाती है।
आगे की स्थिति
दोनों मामलों में पुलिस जाँच जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि घाटी में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और जागरूकता अभियानों को तेज़ करने की तत्काल आवश्यकता है, ताकि बढ़ते आत्महत्या के रुझान को रोका जा सके।