मणिपुर पुलिस ने खारम वैफेई गांव में आगजनी-फायरिंग की खबर को बताया फर्जी, सोशल मीडिया पोस्ट पर कार्रवाई की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर पुलिस ने 31 मई 2026 को आधिकारिक बयान जारी कर कांगपोकपी जिले के खारम वैफेई गांव में सशस्त्र हमलावरों द्वारा कई घरों पर हमले की खबर को पूरी तरह निराधार और फर्जी करार दिया है। पुलिस के अनुसार, 30 मई 2026 को दोपहर लगभग 1:45 बजे IST इस गांव के आसपास अज्ञात सशस्त्र उपद्रवियों ने गोलीबारी की, जिसमें पाँच कच्चे मकान जलकर खाक हो गए — लेकिन इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ।
मुख्य घटनाक्रम
मणिपुर पुलिस के आधिकारिक बयान के अनुसार, 30 मई को गोलीबारी की सूचना मिलते ही जिला पुलिस ने गांव के निकट तैनात सुरक्षा बलों के साथ समन्वय कर मौके पर पहुँचकर स्थिति पर काबू पाया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि खारम वैफेई गांव में पाँच कच्चे मकानों में आग लगी, परंतु किसी की जान नहीं गई। घटना के तथ्यों को तोड़-मरोड़कर सोशल मीडिया पर फैलाया गया, जिसे पुलिस ने भ्रामक बताया।
किस पोस्ट पर उठे सवाल
'द प्राउड इंडियन' नामक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल ने 30 मई को एक पोस्ट प्रकाशित की, जिसमें दावा किया गया कि एनएससीएन-आईएम और ज़ुफ-कामसन के सदस्यों ने कथित तौर पर हमला और आगजनी की। पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि भारतीय सेना की गोरखा राइफल्स और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों ने स्थानीय ग्राम स्वयंसेवकों को रक्षात्मक स्थान खाली करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद यह हमला हुआ।
इसी पोस्ट में एनएससीएन-आईएम से जुड़े मीडिया आउटलेट खानुइथोट-खोन द्वारा कांगपोकपी जिला एसपी राहुल गुप्ता, आईपीएस की सार्वजनिक सराहना का भी उल्लेख था।
मणिपुर पुलिस की प्रतिक्रिया
मणिपुर पुलिस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी उग्रवादी समूह से जुड़े मीडिया या फर्जी माध्यम द्वारा सोशल मीडिया पर प्रसारित पोस्ट या बयान घटना के तथ्यों से मेल नहीं खाते। पुलिस ने यह भी कहा कि जिला एसपी और सुरक्षा बलों पर लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे हैं। इस संवेदनशील समय में गलत सूचना फैलाने वालों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
संदर्भ और पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में जातीय तनाव और सूचना युद्ध को लेकर प्रशासन पहले से सतर्क है। गौरतलब है कि राज्य में सोशल मीडिया पर भड़काऊ और भ्रामक सामग्री के प्रसार को लेकर पुलिस कई बार अलर्ट जारी कर चुकी है। इस प्रकरण में पुलिस ने न केवल खबर का खंडन किया, बल्कि उस विशेष सोशल मीडिया पोस्ट की पहचान कर उसे फर्जी घोषित किया — जो राज्य में सूचना प्रबंधन की दिशा में एक सक्रिय कदम है।
आगे क्या होगा
मणिपुर पुलिस ने संकेत दिया है कि भ्रामक सामग्री फैलाने वाले खातों और माध्यमों की पहचान कर उनके विरुद्ध कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सुरक्षा बल क्षेत्र में निगरानी जारी रखे हुए हैं।