जम्मू बीएसएफ कैंप में एएसआई ने सर्विस राइफल से की आत्महत्या, पलौरा कैंप में जांच शुरू
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू के पलौरा बीएसएफ कैंप में रविवार, 14 जून को बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) के एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) ने कथित तौर पर अपनी सर्विस राइफल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। मध्य प्रदेश के रहने वाले एएसआई लाल सिंह जम्मू शहर के बाहरी इलाके में स्थित इस कैंप में तैनात थे और महज एक दिन पहले, 13 जून को एक महीने की छुट्टी के बाद ड्यूटी पर लौटे थे।
घटनाक्रम
अधिकारियों के अनुसार, सूचना मिलते ही बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी और स्थानीय पुलिस तत्काल मौके पर पहुँची। शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा गया है। अधिकारियों ने बताया कि इस कदम के पीछे के कारणों का पता लगाने के लिए जाँच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सुरक्षाबलों में आत्महत्या की चिंताजनक प्रवृत्ति
यह घटना ऐसे समय में आई है जब तैनात सुरक्षाकर्मियों, विशेष रूप से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ), में आत्महत्या की प्रवृत्ति एक गंभीर राष्ट्रीय चिंता बन चुकी है। आँकड़ों के अनुसार, हर साल लगभग 100 या उससे अधिक जवान अपनी जान दे देते हैं।
गृह मंत्रालय (एमएचए) के आँकड़े बताते हैं कि 2018 से 2022 के बीच 654 सीएपीएफ जवानों ने आत्महत्या की। रिपोर्टों के अनुसार, 2020 से 2024 के बीच सीआरपीएफ, बीएसएफ, एनएसजी और असम राइफल्स जैसे बलों के कुल 730 जवानों ने आत्महत्या की। संसद में पेश आँकड़ों के अनुसार, 2017 से अब तक 800 से अधिक रक्षा कर्मियों ने आत्महत्या की है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ जैसे संघर्ष और नक्सल-विरोधी क्षेत्रों में 2019 से 2025 के मध्य तक 177 सुरक्षाकर्मियों ने आत्महत्या की — यह आँकड़ा अत्यधिक तैनाती के बोझ को उजागर करता है।
तनाव के कारण
जाँचों में बार-बार कई प्रकार के संस्थागत और व्यक्तिगत तनाव सामने आते हैं। इनमें संघर्ष क्षेत्रों में बिना पर्याप्त विराम के लंबी तैनाती, कठिन जीवन परिस्थितियाँ, काम के लंबे घंटे और कुछ अर्धसैनिक इकाइयों के लिए शांतिपूर्ण क्षेत्रों में तैनाती (पीस पोस्टिंग) का अभाव प्रमुख हैं। व्यक्तिगत आपात स्थितियों में छुट्टी न मिलना, वैवाहिक कलह, पारिवारिक विवाद और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ भी इन घटनाओं में योगदान देती हैं।
सरकार और बलों के सुधारात्मक उपाय
गृह मंत्रालय ने जोखिम वाले समूहों का अध्ययन करने और रोकथाम के उपाय सुझाने के लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है। प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक सलाहकारों की तैनाती के साथ-साथ मिलाप और सहयोग जैसी संस्थागत परियोजनाएँ शुरू की गई हैं। सेना और वायु सेना के लिए 'मानसिक सहायता हेल्पलाइन' जैसी विशेष काउंसलिंग लाइनें, समय-समय पर कल्याणकारी बैठकें, ड्यूटी के घंटों का नियमन और जम्मू-कश्मीर व पूर्वोत्तर जैसे दूरदराज के इलाकों में तैनात कर्मियों के लिए हवाई यात्रा की सुविधा भी दी जाती है। इन उपायों की पर्याप्तता पर सवाल अभी भी बने हुए हैं, और एएसआई लाल सिंह की मृत्यु की जाँच के परिणाम इस दिशा में नई जानकारी दे सकते हैं।