दाचीगाम नेशनल पार्क में प्रवेश पर कोई रोक नहीं, J&K सरकार ने अफवाहों को किया खारिज
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर सरकार ने 3 जून को स्पष्ट किया कि श्रीनगर स्थित दाचीगाम नेशनल पार्क आम लोगों और पर्यटकों के लिए पूरी तरह खुला है, और बुधवार को प्रवेश पर किसी प्रकार की कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। सरकार ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर फैल रही ‘प्रवेश प्रतिबंध’ की खबरों को भ्रामक बताते हुए लोगों से केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने की अपील की है।
सरकार का आधिकारिक स्पष्टीकरण
सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि दाचीगाम नेशनल पार्क में प्रवेश को लेकर कुछ भ्रामक दावे सामने आ रहे थे, जिनके बाद स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक हो गया। बयान के अनुसार, 3 जून को पार्क में आगंतुकों के प्रवेश पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं लगाया गया है और सभी पर्यटक तथा स्थानीय लोग सामान्य नियमों एवं प्रक्रियाओं के तहत पार्क का दौरा कर सकते हैं।
सामान्य रूप से जारी है प्रवेश व्यवस्था
सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि पार्क की प्रवेश व्यवस्था पहले की तरह सामान्य रूप से संचालित हो रही है और पहले से तय मानक प्रक्रियाएँ ही लागू हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से किसी विशेष दिन या किसी विशेष कारण से प्रवेश पर रोक लगाने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।
अटकलों की पृष्ठभूमि
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायक दल की बैठक के बाद पार्क में प्रवेश को लेकर विभिन्न प्रकार की अटकलें चल रही थीं। इन अटकलों के चलते आम लोगों और संभावित आगंतुकों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई थी। सरकार ने दोहराया कि ऐसी खबरों का कोई आधार नहीं है और पार्क की गतिविधियाँ पूरी तरह सामान्य हैं।
आगंतुकों के लिए दिशा-निर्देश
सरकार ने लोगों से आग्रह किया है कि दाचीगाम नेशनल पार्क की यात्रा के दौरान वे निर्धारित दिशा-निर्देशों और मानक प्रक्रियाओं का पालन करें, तथा किसी भी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें। प्रवक्ता ने दोहराया कि बिना पुष्टि वाली खबरों को फैलाने या उन पर विश्वास करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे अनावश्यक भ्रम और असुविधा पैदा हो सकती है।
आगे क्या
सरकार के इस आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद पार्क के प्रवेश को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगने की उम्मीद है। गौरतलब है कि दाचीगाम नेशनल पार्क कश्मीर के सबसे संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्रों में से एक है और यह लुप्तप्राय हंगुल (कश्मीरी हिरण) का प्राकृतिक आवास है — यही कारण है कि यहाँ की प्रवेश व्यवस्था से जुड़ी हर खबर पर्यटकों और स्थानीय समुदाय दोनों के लिए मायने रखती है।