8 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग का पुनर्गठन, ओम प्रकाश व्यास बने अध्यक्ष

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग का पुनर्गठन, ओम प्रकाश व्यास बने अध्यक्ष

सारांश

तीन साल की निष्क्रियता के बाद दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग फिर सक्रिय हो गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर ओम प्रकाश व्यास को अध्यक्ष और चार नए सदस्यों को नियुक्त किया गया है — बाल श्रम, शिक्षा अधिकार और यौन शोषण जैसे मामलों पर संस्थागत निगरानी अब फिर बहाल होगी।

मुख्य बातें

दिल्ली सरकार ने 7 जुलाई 2026 को DCPCR का पुनर्गठन किया, जो करीब तीन वर्षों से निष्क्रिय था।
ओम प्रकाश व्यास को आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया; राहुल गौतम , कुंदन कांस्कर , स्वाति गुप्ता और मोनिका शर्मा सदस्य बने।
प्रत्येक नियुक्ति का कार्यकाल तीन वर्ष ; अध्यक्ष की अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष , सदस्यों की 60 वर्ष ।
नियुक्तियाँ बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 और DCPCR नियम, 2008 के तहत की गई हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बाल अधिकारों की रक्षा को दिल्ली सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

दिल्ली सरकार ने 7 जुलाई 2026 को दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (DCPCR) का पुनर्गठन किया, जो करीब तीन वर्षों से शीर्ष पदों की रिक्तता के कारण ठप पड़ा था। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने अधिसूचना जारी कर एक अध्यक्ष और चार सदस्यों की नियुक्ति की।

नई नियुक्तियाँ और कानूनी आधार

ओम प्रकाश व्यास को आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। सदस्यों के रूप में राहुल गौतम, कुंदन कांस्कर, स्वाति गुप्ता और मोनिका शर्मा को शामिल किया गया है। ये नियुक्तियाँ बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005, दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग नियम, 2008 और केंद्रीय गृह मंत्रालय की संबंधित अधिसूचना के तहत की गई हैं।

कार्यकाल और आयु सीमा

सभी नियुक्तियाँ संबंधित व्यक्तियों के पदभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी मानी जाएंगी। प्रत्येक नियुक्त व्यक्ति का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। अध्यक्ष के लिए अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष और सदस्यों के लिए 60 वर्ष निर्धारित है। यदि कार्यकाल समाप्त होने से पहले आयु सीमा पूरी हो जाती है, तो पद उसी तिथि से रिक्त माना जाएगा।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, 'प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, गरिमापूर्ण और अवसरों से भरपूर बचपन का अधिकार है।' उन्होंने बाल अधिकारों की रक्षा को दिल्ली सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया और आयोग के नए नेतृत्व से संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करने की अपेक्षा जताई।

आम जनता और बच्चों पर असर

गौरतलब है कि DCPCR बाल श्रम, शिक्षा के अधिकार, बाल यौन शोषण और किशोर न्याय जैसे संवेदनशील मामलों की निगरानी करता है। तीन वर्षों की निष्क्रियता के दौरान इन मामलों में संस्थागत निगरानी का अभाव रहा। पुनर्गठन से दिल्ली में बाल कल्याण शिकायतों के निपटान और नीतिगत हस्तक्षेप की प्रक्रिया फिर से सक्रिय होने की उम्मीद है।

आगे क्या

नवनियुक्त अध्यक्ष और सदस्यों के पदभार ग्रहण करते ही आयोग की औपचारिक कार्यवाही शुरू होगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह प्रत्येक बच्चे के सर्वांगीण विकास और अधिकारों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि नया नेतृत्व बाल श्रम, यौन शोषण और शिक्षा अधिकार उल्लंघन के मामलों में कितनी तेज़ी से कार्रवाई करता है। नियुक्तियों की राजनीतिक पृष्ठभूमि और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है — क्योंकि स्वायत्त निगरानी निकाय तभी विश्वसनीय होते हैं जब उनकी स्वतंत्रता सुनिश्चित हो।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (DCPCR) का पुनर्गठन क्यों किया गया?
DCPCR करीब तीन वर्षों से शीर्ष पदों की रिक्तता के कारण निष्क्रिय पड़ा था। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने अधिसूचना जारी कर आयोग को फिर से सक्रिय किया।
DCPCR का नया अध्यक्ष कौन है?
ओम प्रकाश व्यास को दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनके साथ राहुल गौतम, कुंदन कांस्कर, स्वाति गुप्ता और मोनिका शर्मा को सदस्य नियुक्त किया गया है।
DCPCR के नए सदस्यों का कार्यकाल कितना होगा?
प्रत्येक नियुक्त व्यक्ति का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। अध्यक्ष के लिए अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष और सदस्यों के लिए 60 वर्ष है; आयु सीमा पूरी होने पर कार्यकाल उससे पहले भी समाप्त हो सकता है।
DCPCR किन मामलों की निगरानी करता है?
DCPCR बाल श्रम, शिक्षा के अधिकार, बाल यौन शोषण, किशोर न्याय और बच्चों से जुड़े अन्य संवेदनशील मामलों की संस्थागत निगरानी करता है। तीन वर्षों की निष्क्रियता के दौरान इन मामलों में निगरानी का अभाव रहा।
ये नियुक्तियाँ किस कानूनी आधार पर की गई हैं?
ये नियुक्तियाँ बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 और दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग नियम, 2008 के साथ-साथ केंद्रीय गृह मंत्रालय की संबंधित अधिसूचना के तहत की गई हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले