दिल्ली क्राइम ब्रांच ने हथियार तस्करी-आतंकी मॉड्यूल के 2 और सदस्य दबोचे, कुल गिरफ्तारी 18
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 28 जुलाई 2026 को अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी और पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) से कथित संबंध रखने वाले आतंकी नेटवर्क के दो और मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई के साथ इस मामले में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या 18 हो गई है और बरामद हथियारों का आँकड़ा 32 आधुनिक विदेशी हथियार तथा 363 जिंदा कारतूस तक पहुँच गया है।
ताज़ा गिरफ्तारियाँ: कौन हैं ये दोनों आरोपी
क्राइम ब्रांच के अनुसार, इस ऑपरेशन में महफूज अली उर्फ बॉबी उर्फ कबूतर (43 वर्ष) और मो. अहमद (35 वर्ष) को गिरफ्तार किया गया। दोनों भगोड़े गैंगस्टर शाहबाज अंसारी के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी गिरोह के अहम सदस्य बताए जाते हैं।
यह ऑपरेशन क्राइम ब्रांच के एंटी-रॉबरी एंड स्नैचिंग सेल (ARSC) ने अंजाम दिया। टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर मान सिंह और सुंदर गौतम ने किया, जबकि निगरानी एसीपी संजय कुमार नागपाल और डीसीपी चंद्र कुमार सिंह ने की।
मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी ढाँचा
यह गिरफ्तारियाँ एफआईआर नंबर 49/2026 के तहत की गई हैं, जो 14 मार्च 2026 को क्राइम ब्रांच थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS), आर्म्स एक्ट और गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई थी। जाँचकर्ताओं के अनुसार, यह गिरोह कथित तौर पर भारत में आधुनिक विदेशी हथियार लाकर संगठित अपराधी गिरोहों, आतंकवादी तत्वों और राष्ट्र-विरोधी नेटवर्क को सप्लाई करता था।
इन ताज़ा गिरफ्तारियों से पहले, मामले में 16 आरोपी पकड़े जा चुके थे, जिनके पास से 28 हथियार — जिनमें एक सब-मशीन गन भी शामिल थी — और 281 जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे।
महफूज अली की आपराधिक पृष्ठभूमि
पुलिस ने महफूज अली की पहचान उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद निवासी के रूप में की है। उसने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की और 1998 में स्कूल छोड़ने के बाद परिवार के ताला बनाने के कारोबार में काम किया। जाँचकर्ताओं के अनुसार, वह धीरे-धीरे उत्तर-पूर्वी दिल्ली के अपराधी गिरोहों से जुड़ता गया और 2006 में गिरोहों की आपसी दुश्मनी से जुड़े हत्या की कोशिश के मामले में पहली बार गिरफ्तार हुआ।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वह साबिर अली उर्फ नन्हे, इरशाद, अकील मामा, जाहिद और नदीम उर्फ चाचा फाडू की हत्याओं सहित कई हत्या के मामलों में शामिल रहा है। 2019 में महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) के एक मामले में नाम आने के बाद वह लंबे समय तक फरार रहा।
जाँचकर्ताओं का दावा है कि महफूज के जेल में बंद गैंगस्टर हाशिम बाबा से करीबी संबंध थे और उसने कथित तौर पर कई आपराधिक गतिविधियों में उसकी सहायता की। अधिकारियों के अनुसार, 2021 में उसने पंजाबी गायक सिद्धू मूसे वाला की हत्या में शामिल शूटरों की आवाजाही में मदद की और अपराध के बाद शूटरों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और इंटरनेट डोंगल यमुना नदी में फेंककर इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य नष्ट किए।
हथियार सप्लाई चेन में महफूज की भूमिका
पुलिस का आरोप है कि 2022 में हाशिम बाबा के निर्देशों पर और आपराधिक साथी राशिद केबल के साथ मिलकर, महफूज ने विदेशी पिस्तौलों की एक खेप ली और उसे पंजाब से आए गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया के साथियों तक पहुँचाया। जाँचकर्ताओं के अनुसार, इसी कारण वह उत्तर भारत में सक्रिय संगठित आपराधिक गिरोहों को अवैध विदेशी हथियार सप्लाई करने की चेन में एक अहम कड़ी बन गया था।
आगे की जाँच
यह मामला इस लिहाज से महत्त्वपूर्ण है कि इसमें ISI से कथित संबंध, UAPA जैसे कड़े कानून और अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी — तीनों पहलू एक साथ उभरे हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय एजेंसियाँ सीमा-पार आतंकी फंडिंग और हथियार आपूर्ति के नेटवर्क पर शिकंजा कस रही हैं। जाँच जारी है और अधिकारियों ने संकेत दिया है कि नेटवर्क में और भी सदस्य हो सकते हैं।