10 अगस्त 2026
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दिल्ली दवा खरीद घोटाला: ईडी ने ₹600 करोड़ से अधिक के मामले में डीजीएचएस से मांगे अहम दस्तावेज

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दिल्ली दवा खरीद घोटाला: ईडी ने ₹600 करोड़ से अधिक के मामले में डीजीएचएस से मांगे अहम दस्तावेज

सारांश

ईडी ने दिल्ली के ₹600 करोड़ से अधिक के कथित दवा खरीद घोटाले में डीजीएचएस से दस्तावेज माँगे हैं। सीपीए के पूर्व प्रमुख विनोद कुमार रंगा पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। मनी लॉन्ड्रिंग के संदेह में जाँच जारी है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 25 जून 2026 को डीजीएचएस से ₹600 करोड़ से अधिक के कथित दवा खरीद घोटाले में दस्तावेज तलब किए।
ईडी की दिल्ली जोन-2 टीम ने टेंडर प्रक्रिया, भुगतान, आपूर्ति और लेन-देन के रिकॉर्ड माँगे हैं।
जाँच के दायरे में एक्स-रे मशीन , सी-आर्म उपकरण , एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन , दवाइयाँ और सर्जिकल सामान शामिल हैं।
सीपीए के पूर्व प्रमुख विनोद कुमार रंगा को एसीबी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।
मुकदमा दिल्ली के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के निर्देश पर दर्ज किया गया था।
दस्तावेजों की समीक्षा के बाद PMLA के तहत आगे की कार्रवाई संभव।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 25 जून 2026 को दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) से ₹600 करोड़ से अधिक के कथित दवा एवं मेडिकल उपकरण खरीद घोटाले के संबंध में अहम दस्तावेज तलब किए हैं। सूत्रों के अनुसार, एजेंसी ने टेंडर, भुगतान और लेन-देन के रिकॉर्ड सहित संबंधित निर्माताओं व आपूर्तिकर्ताओं की जानकारी भी माँगी है।

ईडी ने क्या माँगा

ईडी की दिल्ली जोन-2 टीम ने डीजीएचएस के निदेशक को एक औपचारिक पत्र भेजा है, जिसमें सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (सीपीए) और डीजीएचएस द्वारा की गई खरीद से जुड़े सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया है। इनमें टेंडर प्रक्रिया, तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन, ठेके देने की प्रक्रिया, माल की आपूर्ति, निरीक्षण, स्वीकृति और भुगतान जारी करने से संबंधित रिकॉर्ड शामिल हैं।

जाँच के दायरे में एक्स-रे मशीन, सी-आर्म रेडियोलॉजिकल उपकरण, एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन, ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्ट (ओआरएस), बेड शीट, लिनेन, सर्जिकल सामान, ड्रेसिंग, स्यूचर, कैनुला, दस्ताने और दवाइयाँ शामिल हैं।

मनी लॉन्ड्रिंग का संदेह

सूत्रों के अनुसार, ईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मेडिकल सामान की खरीद प्रक्रिया में कोई अनियमितता, वित्तीय गड़बड़ी या मनी लॉन्ड्रिंग का मामला तो नहीं है। एजेंसी ने उन कंपनियों, निर्माताओं, ओईएम और वितरकों से जुड़े लेन-देन की विस्तृत जानकारी भी माँगी है, जिनसे मेडिकल उपकरण खरीदे गए थे।

गौरतलब है कि यह जाँच ऐसे समय में तेज हुई है जब दिल्ली की स्वास्थ्य खरीद प्रणाली पहले से ही सवालों के घेरे में है।

पहले हो चुकी है गिरफ्तारी

इस मामले में इससे पहले दिल्ली सरकार की एंटी-करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (सीपीए) के पूर्व प्रमुख विनोद कुमार रंगा को दवाओं, सर्जिकल सामान और मेडिकल उपकरणों की कथित गैर-कानूनी खरीद में संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया था। इस घटनाक्रम के बाद कई डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ भी जाँच एजेंसियों की नज़र में आए।

दिल्ली के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था।

मामला कब सामने आया

यह कथित घोटाला इस महीने की शुरुआत में उस समय सुर्खियों में आया जब सीपीए की ओर से दवाओं और मेडिकल उपकरणों की खरीद में कथित अनियमितताओं का खुलासा हुआ। यह ऐसे समय में सामने आया है जब दिल्ली में सार्वजनिक स्वास्थ्य खरीद की पारदर्शिता पर व्यापक सवाल उठाए जा रहे हैं।

आगे क्या होगा

सूत्रों ने बताया कि फिलहाल जाँच जारी है और डीजीएचएस से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मनी लॉन्ड्रिंग के साक्ष्य मिलते हैं तो धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग के आयाम तक पहुँच रही है। असली परीक्षा यह है कि क्या दस्तावेजी साक्ष्य किसी बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं, या यह मामला केवल एक अधिकारी तक सिमट जाता है। सार्वजनिक स्वास्थ्य खरीद में ₹600 करोड़ से अधिक की कथित गड़बड़ी उस व्यवस्था पर सवाल उठाती है जो सीधे दिल्ली के अस्पतालों में मरीजों की देखभाल को प्रभावित करती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली दवा खरीद घोटाला क्या है?
यह ₹600 करोड़ से अधिक का कथित घोटाला है जिसमें दिल्ली सरकार की सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (सीपीए) और डीजीएचएस द्वारा दवाओं, मेडिकल उपकरणों और सर्जिकल सामान की खरीद में कथित अनियमितताएँ सामने आई हैं। इस महीने की शुरुआत में खुलासे के बाद एसीबी और अब ईडी दोनों जाँच कर रही हैं।
ईडी ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
ईडी की दिल्ली जोन-2 टीम ने डीजीएचएस के निदेशक को पत्र भेजकर टेंडर, भुगतान, आपूर्ति, निरीक्षण और लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड माँगे हैं। एजेंसी मनी लॉन्ड्रिंग के संभावित कोण की जाँच कर रही है।
विनोद कुमार रंगा कौन हैं और उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया?
विनोद कुमार रंगा सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (सीपीए) के पूर्व प्रमुख हैं। दिल्ली सरकार की एंटी-करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने उन्हें दवाओं, सर्जिकल सामान और मेडिकल उपकरणों की कथित गैर-कानूनी खरीद में संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया था।
इस जाँच में कौन-से मेडिकल उपकरण शामिल हैं?
जाँच के दायरे में एक्स-रे मशीन, सी-आर्म रेडियोलॉजिकल उपकरण, एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन, ओआरएस, बेड शीट, लिनेन, सर्जिकल सामान, ड्रेसिंग, स्यूचर, कैनुला, दस्ताने और दवाइयाँ शामिल हैं।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
सूत्रों के अनुसार, डीजीएचएस से प्राप्त दस्तावेजों की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि मनी लॉन्ड्रिंग के साक्ष्य मिलते हैं तो धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत और गिरफ्तारियाँ या संपत्ति कुर्की संभव है।
राष्ट्र प्रेस
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