यमुना सफाई घोटाले पर एफआईआर होगी: सीएजी रिपोर्ट के बाद प्रवेश वर्मा का बड़ा ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली के कैबिनेट मंत्री प्रवेश वर्मा ने सोमवार, 17 अगस्त को घोषणा की कि दिल्ली सरकार यमुना सफाई, सीवेज ट्रीटमेंट परियोजनाओं और दिल्ली जल बोर्ड के खर्च की जाँच से संबंधित नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट की समिति-समीक्षा पूरी होते ही एफआईआर दर्ज कराएगी। यह बयान उन्होंने अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट के निरीक्षण दौरे के दौरान दिया।
सीएजी रिपोर्ट में क्या मिला
सीएजी की यह परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट 2017-18 से 2021-22 की अवधि में दिल्ली जल बोर्ड के कामकाज की समीक्षा करती है। रिपोर्ट में सीवर प्रबंधन की गंभीर कमियाँ, परियोजनाओं में देरी, वित्तीय अनियमितताएँ और मानव संसाधन संबंधी खामियाँ उजागर की गई हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 1,080 अनधिकृत कॉलोनियों से निकलने वाला 212.59 एमजीडी सीवेज बिना किसी उपचार के सीधे नालों में छोड़ा जा रहा था। इसके अलावा, यमुना में प्रवाहित किए जा रहे 25 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के ट्रीटेड इफ्लुएंट भी निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे।
मंत्री प्रवेश वर्मा का बयान
मंत्री ने कहा, 'पिछली सरकारों ने जो भी काम किए, उन सभी पर सीएजी रिपोर्ट आ रही हैं। दिल्ली जल बोर्ड पर भी सीएजी की रिपोर्ट आई है, जिसमें उसके खर्च किए गए धन की समीक्षा की गई है।' उन्होंने आगे कहा कि एसटीपी पर पैसा खर्च होने के बावजूद वे कभी निर्धारित क्षमता के अनुसार नहीं चले — यह सीएजी की मुख्य आपत्ति है। रिपोर्ट को एक समिति को भेजा जा चुका है और समिति की रिपोर्ट आने के बाद एफआईआर दर्ज की जाएगी।
दिल्ली में सीवेज की मौजूदा स्थिति
हालिया सरकारी आँकड़ों के अनुसार, दिल्ली में प्रतिदिन करीब 3,596 मिलियन लीटर सीवेज उत्पन्न होता है, जबकि 37 संचालित एसटीपी की कुल क्षमता केवल 3,474 एमएलडी है। इसके परिणामस्वरूप करीब 641 एमएलडी सीवेज बिना उपचार के नदी और नालों में पहुँच रहा है। साथ ही 14 एसटीपी प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पालन नहीं कर रहे थे।
साबरमती से सबक और यमुना की योजना
वर्मा ने साबरमती रिवरफ्रंट के अनुभव को यमुना के लिए प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा, 'साबरमती के सामने जो लगभग 90 प्रतिशत समस्याएँ थीं, वही समस्याएँ यमुना में भी हैं। बाकी चुनौतियाँ इसलिए बड़ी हैं क्योंकि दिल्ली की आबादी ज्यादा है और यमुना में अधिक मात्रा में सीवेज आता है।'
प्रस्तावित यमुना रिवरफ्रंट में बड़े पार्क, साइकिल ट्रैक, घाट, मनोरंजन सुविधाएँ और खेल मैदान विकसित किए जाएँगे। साबरमती की तर्ज पर धोबी घाटों के पुनर्वास की भी योजना है, ताकि नदी में सीधे गंदगी न जाए।
आगे क्या होगा
दिल्ली जल बोर्ड नए एसटीपी निर्माण और पुराने संयंत्रों के उन्नयन का काम कर रहा है। सरकार का लक्ष्य अगले दो वर्षों में सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता की कमी को दूर करना है। इसके अलावा अगले 18 महीनों में लाखों घरों को सीवर नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। यमुना सफाई और रिवरफ्रंट विकास का काम समानांतर रूप से चलाया जा रहा है। वर्मा ने भरोसा जताया कि अगले चुनाव से पहले दिल्ली के लोग यमुना और राजधानी में व्यापक बदलाव देखेंगे।