यमुना सफाई मिशन: प्रवेश वर्मा बोले — जनता की भागीदारी के बिना 90% काम अधूरा
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा ने 15 जून 2025 को स्पष्ट किया कि यमुना सफाई मिशन तब तक पूरी तरह सफल नहीं हो सकता जब तक दिल्ली की जनता इसमें सक्रिय भागीदार न बने। उन्होंने कहा कि यदि नागरिक सड़कों पर कूड़ा फेंकना बंद कर दें और अपने आस-पड़ोस को स्वच्छता अभियान से जोड़ें, तो 90 प्रतिशत समस्या अपने आप हल हो जाएगी।
केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष का उद्घाटन
मंत्री प्रवेश वर्मा ने सोमवार, 15 जून को शास्त्री नगर स्थित केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष का उद्घाटन किया। इस मौके पर वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि मानसून से पहले सभी तैयारियों की समीक्षा के लिए यह दौरा किया गया।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि 14 जून को चलाया गया अभियान यमुना नदी की नहीं, बल्कि यमुना घाटों की सफाई का था। उन्होंने कहा, 'यमुना नदी की सफाई तो पहले दिन से ही लगातार चल रही है।'
सीवर कनेक्शन की अपील — लाखों घर अभी भी बाहर
मंत्री ने बताया कि दिल्ली में अभी भी लाखों घरों में सीवर कनेक्शन नहीं है, जो यमुना प्रदूषण का एक बड़ा कारण है। उन्होंने दिल्ली जल बोर्ड के तेज़ी से सीवर लाइन बिछाने के काम का उल्लेख करते हुए नागरिकों से अपील की कि वे अपने घरों में सीवर कनेक्शन अवश्य लें ताकि अपशिष्ट जल ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुँच सके।
उन्होंने कहा, 'सीवर लाइन का कनेक्शन लें। तीन साल बाद यमुना किनारे आएंगे तो आपको जमीन-आसमान का अंतर दिखाई देगा।' यह टिप्पणी मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में चल रहे युद्धस्तरीय सफाई अभियान के संदर्भ में आई।
रविवार को 16 हजार नागरिकों ने की घाटों की सफाई
मंत्री वर्मा ने बताया कि रविवार को 16,000 से अधिक नागरिकों ने धूप में पसीना बहाकर यमुना घाटों की सफाई में हिस्सा लिया। उन्होंने इस जन-भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि यही वह ऊर्जा है जो मिशन को वास्तविक गति दे सकती है।
आम आदमी पार्टी (AAP) पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्षी दल 'केवल कीचड़ उछालना जानता है' और ज़मीनी काम से उसका कोई सरोकार नहीं।
मानसून तैयारी और 2023 जैसी बाढ़ न दोहराने का संकल्प
मानसून की तैयारियों पर मंत्री ने कहा कि 2023 में आई भीषण बाढ़ जैसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए सभी विभाग, जिला प्रशासन, डीएम और सचिव स्तर के अधिकारी हर इंतजाम पर नज़र रख रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल बाढ़ की स्थिति अपेक्षाकृत कम रही थी।
रेनवाटर हार्वेस्टिंग नीति और भूजल संकट
मंत्री वर्मा ने नई बोरवेल नीति की जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर अब बोरवेल की अनुमति केवल उन्हीं घरों को दी जाएगी जिन्होंने रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित किया हो। उन्होंने बताया कि दिल्ली के सभी रेड ज़ोन में भूजल स्तर 1,000 फीट से नीचे जा चुका है और अब इन्हें ग्रीन ज़ोन में बदलना सबसे बड़ी चुनौती है।
सरकारी भवनों को इस अभियान में प्राथमिकता दी जा रही है। मंत्री ने नागरिकों से अपील की कि वे मानसून से पहले रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाएँ ताकि बारिश का पानी भूमि में संरक्षित हो सके। यमुना की स्वच्छता और दिल्ली का जल-भविष्य, दोनों इसी जन-जागरूकता पर टिके हैं।