धनबाद पुलिस की अनूठी पहल: 700 आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की परेड, अपराध छोड़ने की शपथ
सारांश
मुख्य बातें
धनबाद पुलिस ने 2 जुलाई 2026 को एक अभूतपूर्व सुधारात्मक अभियान के तहत जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों के करीब 700 आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को पुलिस लाइन में बुलाकर उनकी एक साथ परेड कराई और उन्हें कानून का पालन करने तथा अपराध से दूर रहने की शपथ दिलाई। पुलिस के अनुसार, झारखंड में जिला स्तर पर इस तरह का आयोजन पहली बार किया गया है।
कार्यक्रम का स्वरूप और प्रक्रिया
इस विशेष परेड में उपस्थित सभी लोगों की पहचान का सत्यापन किया गया, उनकी फोटोग्राफी कराई गई और पुलिस रिकॉर्ड से उनके आँकड़ों का मिलान किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रभात कुमार, सिटी एसपी ऋत्विक श्रीवास्तव और ग्रामीण एसपी एस. मोहम्मद याकूब ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया।
SSP प्रभात कुमार ने स्पष्ट किया कि इस पहल का उद्देश्य किसी को अपमानित करना नहीं, बल्कि उन्हें सुधार का अवसर देना है। उन्होंने कहा, 'आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को समाज की मुख्यधारा में लौटने का मौका दिया जा रहा है। यदि आप अपराध छोड़कर सामान्य जीवन जीते हैं तो पुलिस पूरा सहयोग करेगी, लेकिन दोबारा अपराध किया तो सख्त कार्रवाई होगी।'
तीन हजार से अधिक लोग निगरानी में
SSP ने बताया कि धनबाद जिले में 3,000 से अधिक आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों का डेटा पुलिस के पास दर्ज है। फिलहाल पहले चरण में 700 लोगों को बुलाया गया है, जबकि शेष को चरणबद्ध तरीके से आगामी कार्यक्रमों में शामिल किया जाएगा। पुलिस ने स्पष्ट किया कि सभी चिन्हित व्यक्तियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी।
सूची से नाम हटाने का प्रावधान
SSP प्रभात कुमार ने यह भी बताया कि जो लोग लंबे समय से किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं हैं, वे संबंधित थाना प्रभारी को आवेदन देकर अपने आचरण का सत्यापन करा सकते हैं। जाँच के बाद नियमानुसार उनका नाम सूची से हटाने पर विचार किया जाएगा। यह प्रावधान उन लोगों के लिए राहत की राह खोलता है जो वास्तव में अपराध से दूर हो चुके हैं।
आम जनता पर असर और चेतावनी
पुलिस ने उपस्थित लोगों को आगाह किया कि आपराधिक रिकॉर्ड का असर चरित्र प्रमाण-पत्र, पासपोर्ट और सरकारी नौकरी जैसी प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है। दोबारा अपराध में संलिप्त पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई। अधिकारियों ने उपस्थित लोगों से यह भी अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में होने वाली आपराधिक गतिविधियों की सूचना पुलिस को दें।
सुधारात्मक पुलिसिंग की दिशा में कदम
धनबाद पुलिस ने इस अभियान को अपराध नियंत्रण के साथ-साथ सुधारात्मक पुलिसिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पुनर्वास-केंद्रित पुलिसिंग मॉडल पर बहस तेज हो रही है। गौरतलब है कि पारंपरिक दंडात्मक दृष्टिकोण के बजाय यह पहल अपराधियों को समाज में पुनः स्थापित करने की कोशिश करती है, जो इसे झारखंड में अपनी तरह का पहला प्रयोग बनाती है।