26 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा 15-20 दिन पहले होता तो तनाव नहीं बढ़ता: छगन भुजबल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा 15-20 दिन पहले होता तो तनाव नहीं बढ़ता: छगन भुजबल

सारांश

छगन भुजबल ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सीधा सवाल उठाया — यह फैसला 15-20 दिन पहले क्यों नहीं हुआ? नीट विवाद, जंतर-मंतर आंदोलन और सोनम वांगचुक के 26 दिन के अनशन के बाद आया यह इस्तीफा बताता है कि देरी की कीमत पूरे देश ने चुकाई।

मुख्य बातें

छगन भुजबल ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा 15-20 दिन पहले आता तो देशव्यापी तनाव टाला जा सकता था।
धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया।
छात्र नीट-यूजी पेपर लीक विवाद और परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को लेकर हफ्तों से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे थे।
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने जवाबदेही की माँग को लेकर 26 दिनों तक अनशन किया; 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस उन्हें अस्पताल ले गई।
भुजबल ने कहा कि यह मुद्दा केवल दिल्ली का नहीं, बल्कि नासिक , महाराष्ट्र और पूरे देश का है।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री छगन भुजबल ने 26 जुलाई को मुंबई में मीडिया से बात करते हुए कहा कि यदि केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा 15 से 20 दिन पहले आ गया होता, तो देशभर में जो तनावपूर्ण माहौल बना, वह टाला जा सकता था। भुजबल ने यह भी स्पष्ट किया कि जनता की नाराज़गी दूर करने का एकमात्र रास्ता खुला संवाद और लोगों की बात सुनना है।

भुजबल का सीधा बयान

भुजबल ने कहा, 'अगर यह इस्तीफा पहले हो जाता, तो जो तनावपूर्ण स्थिति बनी, वह नहीं बनती। जो इस्तीफा उन्होंने शनिवार को दिया, अगर वही 15-20 दिन पहले दे देते तो हालात अलग होते।' उन्होंने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें 26 दिनों तक अनशन करना पड़ा और इन सभी घटनाओं का गुस्सा लोगों में साफ दिखाई दिया।

आंदोलन का व्यापक असर

भुजबल ने ज़ोर देकर कहा कि यह मामला केवल दिल्ली के जंतर-मंतर तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, यह उदाहरण नासिक, महाराष्ट्र और पूरे देश के लिए प्रासंगिक है। सरकार को चाहिए कि वह लोगों की बात सुने और उनके साथ लगातार संवाद बनाए रखे।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की पृष्ठभूमि

धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया। इससे पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में छात्रों के नेतृत्व में कई सप्ताहों तक बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारी नीट-यूजी पेपर लीक विवाद सहित परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को लेकर जवाबदेही और प्रधान के इस्तीफे की माँग कर रहे थे।

यह इस्तीफा उस समय आया जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के विरुद्ध पुलिस कार्रवाई को लेकर देशभर में आलोचना तेज़ हो गई थी।

सोनम वांगचुक और आंदोलन को मिली गति

18 जुलाई की सुबह जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल पहुँचाया। पुलिस ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं, चिकित्सकीय सलाह और दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला दिया। वांगचुक भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग को लेकर अनशन पर बैठे थे, जिससे इस आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिला।

आगे क्या

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब यह देखना होगा कि केंद्र सरकार नीट-यूजी विवाद और परीक्षा प्रणाली में सुधार के सवालों पर क्या ठोस कदम उठाती है। भुजबल के बयान ने यह संकेत भी दिया है कि सत्तारूढ़ महागठबंधन के भीतर भी इस देरी को लेकर असंतोष था।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह इस्तीफा महज़ दबाव-प्रबंधन का हथकंडा था। सोनम वांगचुक जैसे गैर-राजनीतिक चेहरे का इस आंदोलन से जुड़ना बताता है कि जनाक्रोश दलगत सीमाओं से परे जा चुका था।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छगन भुजबल ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या कहा?
भुजबल ने कहा कि यदि यह इस्तीफा 15-20 दिन पहले आ जाता, तो देशभर में जो तनावपूर्ण स्थिति बनी, वह नहीं बनती। उन्होंने सोनम वांगचुक के 26 दिन के अनशन और जंतर-मंतर आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि लोगों की बात सुनना और संवाद बनाए रखना ज़रूरी है।
धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों दिया?
धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया। इससे पहले नीट-यूजी पेपर लीक विवाद और परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों ने हफ्तों तक जंतर-मंतर पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया और उनके इस्तीफे की माँग की।
सोनम वांगचुक का इस आंदोलन से क्या संबंध है?
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक शिक्षा मंत्री की जवाबदेही की माँग को लेकर अनशन पर बैठे थे। 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं, चिकित्सकीय सलाह और दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए उन्हें जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल पहुँचाया। वांगचुक ने कुल 26 दिनों तक अनशन किया।
नीट-यूजी पेपर लीक विवाद क्या है?
नीट-यूजी पेपर लीक विवाद में आरोप लगाए गए कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा के प्रश्नपत्र कथित तौर पर लीक हुए, जिससे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठे। छात्र संगठनों ने इसे लेकर जंतर-मंतर पर हफ्तों तक प्रदर्शन किया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की माँग की।
भुजबल के बयान का महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या असर है?
भुजबल का यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि वे महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महागठबंधन के घटक दल से जुड़े हैं। उनकी टिप्पणी यह संकेत देती है कि केंद्र सरकार की देरी से प्रतिक्रिया को सहयोगी दलों के भीतर भी आलोचनात्मक नज़र से देखा गया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 23 घंटे पहले
  2. 23 घंटे पहले
  3. कल
  4. कल
  5. 2 दिन पहले
  6. 3 दिन पहले
  7. 3 दिन पहले
  8. 3 दिन पहले