25 जुलाई 2026
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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अभिजीत दिपके के माता-पिता भावुक, बोले — 'यह छात्रों की जीत है'

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अभिजीत दिपके के माता-पिता भावुक, बोले — 'यह छात्रों की जीत है'

सारांश

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर पहुँचते ही छत्रपति संभाजीनगर में सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके के माता-पिता की आँखों से आँसू छलक पड़े। माँ अनीता ने इसे 'छात्रों की जीत' बताया, जबकि पिता भगवानराव ने कहा कि 20 जुलाई के लाठीचार्ज की खबर सुनकर वह पूरे दिन रोते रहे थे।

मुख्य बातें

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर 25 जुलाई को आषाढ़ी एकादशी के दिन आई।
सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके के माता-पिता छत्रपति संभाजीनगर में भावुक हुए, आँखों से आँसू छलके।
माँ अनीता दीपके ने बताया कि 7 जून के बाद से घर का माहौल पूरी तरह बदल गया था; अभिजीत पर हुए हमले के बाद नींद और खाना दोनों छूट गए।
पिता भगवानराव दीपके ने कहा कि 20 जुलाई के लाठीचार्ज की खबर सुनकर वह पूरे दिन रोते रहे।
आंदोलन के दौरान अभिजीत डेंगू और टाइफाइड से भी पीड़ित हुए; परिवार ने तब भी उनका हौसला बढ़ाया।
आंदोलन पहले जंतर-मंतर तक सीमित था, बाद में देशभर में फैल गया।

छत्रपति संभाजीनगर में 25 जुलाई को उस वक्त भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा, जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर पहुँची। छात्र आंदोलन से जुड़े 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके के परिवार ने खुशी और राहत के मिले-जुले आँसुओं के साथ इस खबर का स्वागत किया। लंबे संघर्ष के बाद मिली इस 'जीत' ने दिपके परिवार के लिए आषाढ़ी एकादशी के दिन को और भी यादगार बना दिया।

माँ अनीता दीपके की प्रतिक्रिया

अभिजीत दीपके की माँ अनीता दीपके ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'यह छात्रों के लिए बेहद खुशी का दिन है। सरकार ने आखिरकार छात्रों की मांगों को स्वीकार किया और धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा देकर एक बड़ा फैसला लिया।' उन्होंने कहा कि खबर सुनते ही वह भावुक हो गईं और आषाढ़ी एकादशी के दिन आई यह सूचना उनके परिवार के लिए किसी उत्सव से कम नहीं।

अनीता दीपके ने बताया कि आंदोलन के दौरान जब अभिजीत पर हमला हुआ और उसे थप्पड़ मारा गया, तब वह काफी डर गई थीं। उन्होंने कहा, 'उस घटना के बाद कई दिनों तक नींद नहीं आई और न ही ठीक से खाना खा सकी। 7 जून के बाद से घर का माहौल पूरी तरह बदल गया था।' उन्होंने जोड़ा कि बेटे की सुरक्षा की चिंता हर पल सताती रहती थी।

अनीता दीपके ने अभिजीत की तारीफ करते हुए कहा, 'इतनी कम उम्र में छात्रों की आवाज उठाकर उसने बड़ा काम किया है और मुझे अपने बेटे पर गर्व है।' उन्होंने कहा कि लोगों से लगातार मिल रही सराहना यह साबित करती है कि यह आंदोलन व्यापक समर्थन हासिल करने में सफल रहा।

पिता भगवानराव दीपके का बयान

अभिजीत के पिता भगवानराव दीपके ने भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत किया। उन्होंने कहा, 'छात्रों, उनके अभिभावकों और रिश्तेदारों में लगातार बढ़ते आक्रोश को देखते हुए यह फैसला आवश्यक था।' उन्होंने बताया कि आंदोलन पहले जंतर-मंतर तक सीमित था, लेकिन बाद में देशभर में फैलने लगा था, जिसके बाद इस्तीफे से बढ़ते तनाव को कम करने का प्रयास हुआ।

भगवानराव ने बताया कि आंदोलन के दौरान अभिजीत डेंगू और टाइफाइड से भी पीड़ित हो गया था, जिससे परिवार की चिंता और बढ़ गई। कई बार उनका मन किया कि वह दिल्ली जाकर बेटे को वापस घर ले आएं, लेकिन छात्रों के प्रति उसके समर्पण को देखते हुए उन्होंने उसका हौसला बढ़ाया। उन्होंने यह भी बताया कि 20 जुलाई को आंदोलन के दौरान हुए लाठीचार्ज की खबर सुनकर वह पूरे दिन रोते रहे।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

यह आंदोलन छात्रों की शिक्षा संबंधी मांगों को लेकर लंबे समय से चल रहा था। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके इस आंदोलन का चेहरा बने और उन्होंने देशभर के छात्रों को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई। आंदोलन के दौरान उन्हें शारीरिक हमले, बीमारी और लाठीचार्ज जैसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

आगे की राह

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब छात्र समुदाय की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार उनकी मांगों को किस हद तक लागू करती है। अभिजीत दिपके के परिवार ने उम्मीद जताई है कि यह केवल एक शुरुआत है और छात्रों के हित में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बीमारी, लाठीचार्ज और परिवारों की बेचैनी। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा एक राजनीतिक घटनाक्रम है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सरकार अब छात्रों की मूल मांगों पर ठोस कार्रवाई करेगी या यह इस्तीफा केवल बढ़ते दबाव को अस्थायी रूप से शांत करने का उपाय है। आंदोलन का जंतर-मंतर से देशव्यापी विस्तार यह बताता है कि यह किसी एक व्यक्ति या संगठन की लड़ाई नहीं रही — और इसीलिए केवल मंत्री बदलने से छात्र समुदाय संतुष्ट नहीं होगा।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अभिजीत दिपके के परिवार की क्या प्रतिक्रिया रही?
अभिजीत दिपके के माता-पिता 25 जुलाई को इस्तीफे की खबर सुनकर भावुक हो गए और उनकी आँखों से आँसू छलक पड़े। माँ अनीता दीपके ने इसे 'छात्रों की जीत' बताया और कहा कि आषाढ़ी एकादशी के दिन आई यह खबर उनके परिवार के लिए किसी उत्सव से कम नहीं।
अभिजीत दिपके कौन हैं और उनका छात्र आंदोलन से क्या संबंध है?
अभिजीत दिपके महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से हैं और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के संस्थापक हैं। वह छात्रों की शिक्षा संबंधी मांगों को लेकर चले आंदोलन का चेहरा बने और देशभर के छात्रों को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई।
आंदोलन के दौरान अभिजीत दिपके को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?
आंदोलन के दौरान अभिजीत दिपके पर शारीरिक हमला हुआ और उन्हें थप्पड़ मारा गया। इसके अलावा वह डेंगू और टाइफाइड से भी पीड़ित हुए, और 20 जुलाई को आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज भी हुआ।
20 जुलाई के लाठीचार्ज की खबर सुनकर अभिजीत के पिता की क्या प्रतिक्रिया थी?
पिता भगवानराव दीपके ने बताया कि 20 जुलाई को आंदोलन के दौरान हुए लाठीचार्ज की खबर सुनकर वह पूरे दिन रोते रहे। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार मन किया कि दिल्ली जाकर बेटे को वापस घर ले आएं, लेकिन उसके समर्पण को देखते हुए हौसला बढ़ाया।
यह छात्र आंदोलन किस मुद्दे को लेकर था और इसका विस्तार कैसे हुआ?
यह आंदोलन छात्रों की शिक्षा संबंधी मांगों को लेकर था, जो पहले जंतर-मंतर तक सीमित था। बाद में छात्रों, अभिभावकों और रिश्तेदारों में बढ़ते आक्रोश के साथ यह देशभर में फैल गया, जिसके बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से बढ़ते तनाव को कम करने का प्रयास किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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