धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अभिजीत दिपके के माता-पिता भावुक, बोले — 'यह छात्रों की जीत है'
सारांश
मुख्य बातें
छत्रपति संभाजीनगर में 25 जुलाई को उस वक्त भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा, जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर पहुँची। छात्र आंदोलन से जुड़े 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके के परिवार ने खुशी और राहत के मिले-जुले आँसुओं के साथ इस खबर का स्वागत किया। लंबे संघर्ष के बाद मिली इस 'जीत' ने दिपके परिवार के लिए आषाढ़ी एकादशी के दिन को और भी यादगार बना दिया।
माँ अनीता दीपके की प्रतिक्रिया
अभिजीत दीपके की माँ अनीता दीपके ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'यह छात्रों के लिए बेहद खुशी का दिन है। सरकार ने आखिरकार छात्रों की मांगों को स्वीकार किया और धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा देकर एक बड़ा फैसला लिया।' उन्होंने कहा कि खबर सुनते ही वह भावुक हो गईं और आषाढ़ी एकादशी के दिन आई यह सूचना उनके परिवार के लिए किसी उत्सव से कम नहीं।
अनीता दीपके ने बताया कि आंदोलन के दौरान जब अभिजीत पर हमला हुआ और उसे थप्पड़ मारा गया, तब वह काफी डर गई थीं। उन्होंने कहा, 'उस घटना के बाद कई दिनों तक नींद नहीं आई और न ही ठीक से खाना खा सकी। 7 जून के बाद से घर का माहौल पूरी तरह बदल गया था।' उन्होंने जोड़ा कि बेटे की सुरक्षा की चिंता हर पल सताती रहती थी।
अनीता दीपके ने अभिजीत की तारीफ करते हुए कहा, 'इतनी कम उम्र में छात्रों की आवाज उठाकर उसने बड़ा काम किया है और मुझे अपने बेटे पर गर्व है।' उन्होंने कहा कि लोगों से लगातार मिल रही सराहना यह साबित करती है कि यह आंदोलन व्यापक समर्थन हासिल करने में सफल रहा।
पिता भगवानराव दीपके का बयान
अभिजीत के पिता भगवानराव दीपके ने भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत किया। उन्होंने कहा, 'छात्रों, उनके अभिभावकों और रिश्तेदारों में लगातार बढ़ते आक्रोश को देखते हुए यह फैसला आवश्यक था।' उन्होंने बताया कि आंदोलन पहले जंतर-मंतर तक सीमित था, लेकिन बाद में देशभर में फैलने लगा था, जिसके बाद इस्तीफे से बढ़ते तनाव को कम करने का प्रयास हुआ।
भगवानराव ने बताया कि आंदोलन के दौरान अभिजीत डेंगू और टाइफाइड से भी पीड़ित हो गया था, जिससे परिवार की चिंता और बढ़ गई। कई बार उनका मन किया कि वह दिल्ली जाकर बेटे को वापस घर ले आएं, लेकिन छात्रों के प्रति उसके समर्पण को देखते हुए उन्होंने उसका हौसला बढ़ाया। उन्होंने यह भी बताया कि 20 जुलाई को आंदोलन के दौरान हुए लाठीचार्ज की खबर सुनकर वह पूरे दिन रोते रहे।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
यह आंदोलन छात्रों की शिक्षा संबंधी मांगों को लेकर लंबे समय से चल रहा था। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके इस आंदोलन का चेहरा बने और उन्होंने देशभर के छात्रों को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई। आंदोलन के दौरान उन्हें शारीरिक हमले, बीमारी और लाठीचार्ज जैसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
आगे की राह
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब छात्र समुदाय की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार उनकी मांगों को किस हद तक लागू करती है। अभिजीत दिपके के परिवार ने उम्मीद जताई है कि यह केवल एक शुरुआत है और छात्रों के हित में ठोस कदम उठाए जाएंगे।