धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विपक्ष एकजुट: कांग्रेस-सपा-एआईएमआईएम ने कहा — छात्रों की जीत, अब एनटीए भंग करो
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 25 जुलाई — केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों ने एक स्वर में इसे देशभर के छात्रों और युवाओं के आंदोलन की निर्णायक जीत करार दिया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस), समाजवादी पार्टी (सपा), ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) और आजाद समाज पार्टी-भीम आर्मी के नेताओं ने एक साथ यह माँग उठाई कि यह इस्तीफा संघर्ष का अंत नहीं, बल्कि व्यापक शिक्षा सुधारों की शुरुआत होनी चाहिए।
मुख्य माँगें: एनटीए भंग करो, एफआईआर वापस लो
विपक्षी नेताओं ने स्पष्ट किया कि केवल मंत्री का इस्तीफा पर्याप्त नहीं है। उनकी प्रमुख माँगों में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग करना, प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेना, पेपर लीक पर कठोर कानून बनाना और पूरे मामले पर संसद में विस्तृत चर्चा कराना शामिल है। रांची में कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने कहा, 'छात्रों की माँग और देश के भविष्य के लिए चल रहे आंदोलन के आगे सरकार को झुकना पड़ा। सरकार का अहंकार टूट चुका है।' उन्होंने यह भी माँग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं संसद में इस मुद्दे पर जवाब दें।
कांग्रेस और सपा की प्रतिक्रिया
राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सीकर में कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुज़र रही है और लगातार पेपर लीक की घटनाएँ गरीब छात्रों के सपनों के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव और संसदीय चर्चा की माँग दोहराई। सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने इस्तीफे को 'छात्रों और लोकतंत्र की जीत' बताते हुए कहा कि सरकार को आंदोलनकारी छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के लिए सार्वजनिक माफी माँगनी चाहिए। उन्होंने घोषणा की कि आगामी संसद सत्र में उनकी पार्टी घायल छात्रों को मुआवजा दिलाने की माँग उठाएगी।
भीम आर्मी और एआईएमआईएम की माँगें
मऊ में भीम आर्मी के प्रदेश महासचिव डॉ. टीके सागर ने कहा कि देशभर में राष्ट्रपति के नाम दिए गए ज्ञापनों और लोकतांत्रिक आंदोलन का असर अब दिखाई दिया है। उन्होंने परीक्षा विवाद में जान गँवाने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देने की माँग की। भीम आर्मी के जिला संयोजक देवेंद्र कुमार डम्पी ने माँग की कि पीड़ित परिवारों को ₹1 करोड़ मुआवजा और सरकारी नौकरी दी जाए, तथा पेपर लीक के दोषियों को जेल भेजा जाए। मुंबई में एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने कहा कि छात्रों ने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी माँगें उठाईं, लेकिन उनकी बात समय पर नहीं सुनी गई।
सपा विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री की आवाज़
रामपुर में सपा विधायक अबू आजमी ने कहा कि 'सरकार को आखिरकार झुकना पड़ा।' सांसद रुचि वीरा ने कहा कि यह इस्तीफा पहले ही हो जाना चाहिए था और सरकार की नीतियों के कारण कई छात्र घायल हुए तथा कुछ की जान भी गई। ग्वालियर में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इसे 'लोकतांत्रिक जवाबदेही का संकेत' बताते हुए माँग की कि प्रधानमंत्री इस्तीफा तत्काल स्वीकार करें और परीक्षा में कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्र आंदोलनरत थे। गौरतलब है कि एनटीए की जवाबदेही को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में भी याचिकाएँ विचाराधीन हैं। विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि संसद के आगामी सत्र में यह मुद्दा केंद्र में रहेगा और यदि सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए तो आंदोलन और तेज़ होगा।