एनआईए कोर्ट ने देवेंद्र सिंह की जमानत खारिज की, पिता की रस्मों के लिए 5 दिन की पैरोल मंजूर
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने बर्खास्त उप-अधीक्षक पुलिस देवेंद्र सिंह की अंतरिम जमानत अर्जी 21 जुलाई 2026 को खारिज कर दी, लेकिन मानवीय आधार पर उन्हें 27 से 31 जुलाई के बीच पाँच दिन की कस्टडी पैरोल मंजूर की। यह पैरोल उनके पिता दीदार सिंह के 17 जुलाई को श्रीनगर में निधन के बाद की धार्मिक रस्मों में शामिल होने के लिए दी गई है।
अदालत का आदेश
स्पेशल जज प्रेम सागर ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि चूँकि देवेंद्र सिंह पहले ही नियमित जमानत खारिज होने के विरुद्ध अपील दायर कर चुके हैं, इसलिए अंतरिम जमानत पर विचार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, "मामले के तथ्यों और हालात को देखते हुए अंतरिम जमानत देने की अर्जी पर विचार नहीं किया जा रहा है... यह कोर्ट पूरी तरह से मानवीय आधार पर अर्जी को आंशिक रूप से मंजूर करता है और उन्हें धार्मिक रस्मों में शामिल होने की इजाजत देता है।"
कोर्ट ने निर्देश दिया कि पैरोल अवधि में सिंह पुलिस हिरासत में रहेंगे और उन्हें प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच श्रीनगर स्थित अपने घर पर 'अखंड पाठ' एवं अंतिम संस्कार के बाद की रस्मों के लिए ले जाया जाएगा। 31 जुलाई को उन्हें जम्मू की कोट भलवाल सेंट्रल जेल वापस लाया जाएगा।
देवेंद्र सिंह कौन हैं और मामला क्या है
देवेंद्र सिंह को 11 जनवरी 2020 को अनंतनाग में एक चेकपॉइंट पर उस समय गिरफ्तार किया गया था जब वे हिज्बुल मुजाहिदीन के कथित आतंकवादियों को — जिनमें संगठन का खुद को कमांडर बताने वाले सैयद नवीद मुश्ताक भी शामिल थे — ले जाते हुए पाए गए। एनआईए ने उनके विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। 2021 में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
गौरतलब है कि सिंह आतंकवाद-रोधी अभियानों में सक्रिय रूप से तैनात रहे थे, और उनकी गिरफ्तारी के बाद जम्मू-कश्मीर में रेड अलर्ट जारी किया गया था। उनसे जुड़े लोगों के पृष्ठभूमि की जाँच भी शुरू की गई थी।
एनआईए का रुख
एनआईए ने अंतरिम जमानत का पुरजोर विरोध किया और तर्क दिया कि रिहाई से गवाहों के साथ छेड़छाड़ का जोखिम बढ़ सकता है। हालाँकि एजेंसी ने कहा कि पर्याप्त पुलिस सुरक्षा के साथ कस्टडी पैरोल पर उसे कोई आपत्ति नहीं है।
सिंह की माँग और अदालत का संतुलन
जमानत अर्जी में सिंह ने पिता के अंतिम संस्कार और रस्मों में शामिल होने के लिए 20 दिन की अंतरिम जमानत माँगी थी। अदालत ने इसे घटाकर पाँच दिन की कस्टडी पैरोल तक सीमित रखा — यानी जमानत नहीं, बल्कि पुलिस निगरानी में सीमित मानवीय राहत।
आगे क्या
देवेंद्र सिंह की नियमित जमानत खारिज होने के विरुद्ध अपील अभी उच्च न्यायालय में लंबित है। 31 जुलाई को जेल वापसी के बाद मामले की अगली सुनवाई पर सबकी नज़र रहेगी। यह मामला जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की जवाबदेही और आतंकी नेटवर्क से कथित सांठगाँठ के व्यापक सवालों से जुड़ा है।