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एनआईए कोर्ट ने देवेंद्र सिंह की जमानत खारिज की, पिता की रस्मों के लिए 5 दिन की पैरोल मंजूर

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एनआईए कोर्ट ने देवेंद्र सिंह की जमानत खारिज की, पिता की रस्मों के लिए 5 दिन की पैरोल मंजूर

सारांश

एनआईए की विशेष अदालत ने बर्खास्त डीएसपी देवेंद्र सिंह को जमानत देने से इनकार कर दिया — लेकिन पिता की अंतिम रस्मों के लिए पाँच दिन की कस्टडी पैरोल मंजूर की। 2020 में हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों को ले जाते पकड़े गए सिंह तब से जेल में हैं और उनकी नियमित जमानत अपील अभी भी लंबित है।

मुख्य बातें

एनआईए विशेष अदालत ने 21 जुलाई 2026 को बर्खास्त डीएसपी देवेंद्र सिंह की अंतरिम जमानत अर्जी खारिज की।
मानवीय आधार पर 27 से 31 जुलाई के बीच पाँच दिन की कस्टडी पैरोल मंजूर; पुलिस हिरासत में श्रीनगर में रस्में अदा करेंगे।
सिंह के पिता दीदार सिंह का 17 जुलाई को श्रीनगर में निधन हुआ था; सिंह ने 20 दिन की जमानत माँगी थी।
सिंह 11 जनवरी 2020 से जम्मू की कोट भलवाल सेंट्रल जेल में बंद हैं; 2021 में सेवा से बर्खास्त किए गए।
एनआईए ने यूएपीए, आर्म्स एक्ट समेत गंभीर धाराओं का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया; कस्टडी पैरोल पर सहमति दी।
नियमित जमानत खारिज होने के विरुद्ध अपील अभी उच्च न्यायालय में लंबित है।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने बर्खास्त उप-अधीक्षक पुलिस देवेंद्र सिंह की अंतरिम जमानत अर्जी 21 जुलाई 2026 को खारिज कर दी, लेकिन मानवीय आधार पर उन्हें 27 से 31 जुलाई के बीच पाँच दिन की कस्टडी पैरोल मंजूर की। यह पैरोल उनके पिता दीदार सिंह के 17 जुलाई को श्रीनगर में निधन के बाद की धार्मिक रस्मों में शामिल होने के लिए दी गई है।

अदालत का आदेश

स्पेशल जज प्रेम सागर ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि चूँकि देवेंद्र सिंह पहले ही नियमित जमानत खारिज होने के विरुद्ध अपील दायर कर चुके हैं, इसलिए अंतरिम जमानत पर विचार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, "मामले के तथ्यों और हालात को देखते हुए अंतरिम जमानत देने की अर्जी पर विचार नहीं किया जा रहा है... यह कोर्ट पूरी तरह से मानवीय आधार पर अर्जी को आंशिक रूप से मंजूर करता है और उन्हें धार्मिक रस्मों में शामिल होने की इजाजत देता है।"

कोर्ट ने निर्देश दिया कि पैरोल अवधि में सिंह पुलिस हिरासत में रहेंगे और उन्हें प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच श्रीनगर स्थित अपने घर पर 'अखंड पाठ' एवं अंतिम संस्कार के बाद की रस्मों के लिए ले जाया जाएगा। 31 जुलाई को उन्हें जम्मू की कोट भलवाल सेंट्रल जेल वापस लाया जाएगा।

देवेंद्र सिंह कौन हैं और मामला क्या है

देवेंद्र सिंह को 11 जनवरी 2020 को अनंतनाग में एक चेकपॉइंट पर उस समय गिरफ्तार किया गया था जब वे हिज्बुल मुजाहिदीन के कथित आतंकवादियों को — जिनमें संगठन का खुद को कमांडर बताने वाले सैयद नवीद मुश्ताक भी शामिल थे — ले जाते हुए पाए गए। एनआईए ने उनके विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। 2021 में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

गौरतलब है कि सिंह आतंकवाद-रोधी अभियानों में सक्रिय रूप से तैनात रहे थे, और उनकी गिरफ्तारी के बाद जम्मू-कश्मीर में रेड अलर्ट जारी किया गया था। उनसे जुड़े लोगों के पृष्ठभूमि की जाँच भी शुरू की गई थी।

एनआईए का रुख

एनआईए ने अंतरिम जमानत का पुरजोर विरोध किया और तर्क दिया कि रिहाई से गवाहों के साथ छेड़छाड़ का जोखिम बढ़ सकता है। हालाँकि एजेंसी ने कहा कि पर्याप्त पुलिस सुरक्षा के साथ कस्टडी पैरोल पर उसे कोई आपत्ति नहीं है।

सिंह की माँग और अदालत का संतुलन

जमानत अर्जी में सिंह ने पिता के अंतिम संस्कार और रस्मों में शामिल होने के लिए 20 दिन की अंतरिम जमानत माँगी थी। अदालत ने इसे घटाकर पाँच दिन की कस्टडी पैरोल तक सीमित रखा — यानी जमानत नहीं, बल्कि पुलिस निगरानी में सीमित मानवीय राहत।

आगे क्या

देवेंद्र सिंह की नियमित जमानत खारिज होने के विरुद्ध अपील अभी उच्च न्यायालय में लंबित है। 31 जुलाई को जेल वापसी के बाद मामले की अगली सुनवाई पर सबकी नज़र रहेगी। यह मामला जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की जवाबदेही और आतंकी नेटवर्क से कथित सांठगाँठ के व्यापक सवालों से जुड़ा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ एक सक्रिय आतंकवाद-रोधी अधिकारी पर ही आतंकियों को सहायता देने का आरोप लगा। अदालत का यह संतुलन — जमानत नहीं, पर मानवीय पैरोल — न्यायिक विवेक का उदाहरण है, लेकिन असली सवाल यह है कि इतने संवेदनशील मामले में नियमित जमानत अपील कितने समय से लंबित है। यूएपीए जैसे कड़े कानूनों के तहत विचाराधीन कैद की अवधि और न्यायिक प्रक्रिया की गति पर यह मामला एक बार फिर ध्यान खींचता है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवेंद्र सिंह को एनआईए ने किस मामले में गिरफ्तार किया था?
देवेंद्र सिंह को 11 जनवरी 2020 को अनंतनाग में एक चेकपॉइंट पर हिज्बुल मुजाहिदीन के कथित आतंकवादियों — जिनमें खुद को कमांडर बताने वाले सैयद नवीद मुश्ताक शामिल थे — को ले जाते हुए गिरफ्तार किया गया था। एनआईए ने उनके विरुद्ध यूएपीए, आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम सहित कई गंभीर धाराओं में चार्जशीट दाखिल की।
एनआईए कोर्ट ने देवेंद्र सिंह को जमानत क्यों नहीं दी?
अदालत ने कहा कि चूँकि सिंह पहले ही नियमित जमानत खारिज होने के विरुद्ध अपील दायर कर चुके हैं, इसलिए अंतरिम जमानत पर विचार उचित नहीं है। इसके अलावा एनआईए ने तर्क दिया कि रिहाई से गवाहों के साथ छेड़छाड़ का जोखिम हो सकता है।
देवेंद्र सिंह को पैरोल पर कहाँ और कब जाने की अनुमति मिली है?
अदालत ने उन्हें 27 से 31 जुलाई के बीच पुलिस हिरासत में श्रीनगर स्थित अपने घर पर 'अखंड पाठ' और अंतिम संस्कार के बाद की रस्मों में शामिल होने की अनुमति दी है। उन्हें प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच कार्यक्रम स्थल पर ले जाया जाएगा।
देवेंद्र सिंह की नियमित जमानत अपील का क्या हुआ?
उनकी नियमित जमानत पहले खारिज हो चुकी है और उसके विरुद्ध अपील उच्च न्यायालय में अभी भी लंबित है। एनआईए विशेष अदालत ने इसी आधार पर अंतरिम जमानत देने से इनकार किया।
देवेंद्र सिंह को सेवा से कब बर्खास्त किया गया?
एनआईए द्वारा चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद 2021 में देवेंद्र सिंह को जम्मू-कश्मीर पुलिस की सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। वे जनवरी 2020 में गिरफ्तारी के बाद से जम्मू की कोट भलवाल सेंट्रल जेल में बंद हैं।
राष्ट्र प्रेस
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