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महाकालेश्वर मंदिर पर दिग्विजय सिंह के आरोप निराधार — संत समाज ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

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महाकालेश्वर मंदिर पर दिग्विजय सिंह के आरोप निराधार — संत समाज ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

सारांश

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के महाकालेश्वर मंदिर पर भूमि आवंटन और दान दुरुपयोग के आरोपों पर संत समाज ने पलटवार किया है। निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर प्रेमानंद गिरि महाराज ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि समाज को ऐसे बयानों को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि महाकालेश्वर मंदिर की भूमि RSS से जुड़े ट्रस्ट को कौड़ियों के भाव दी गई और दान राशि का दुरुपयोग हो रहा है।
निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर प्रेमानंद गिरि महाराज ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि समाज इन्हें गंभीरता से न ले।
महाराज के अनुसार, मंदिर की वित्तीय प्रक्रियाएँ कलेक्टर स्तर की निगरानी में पारदर्शी तरीके से संचालित होती हैं और नियमित ऑडिट होता है।
दादूराम आश्रम के महामंडलेश्वर ज्ञान दास महाराज ने बताया कि 2028 सिंहस्थ महाकुंभ को देखते हुए उज्जैन में व्यापक विकास कार्य जारी हैं।
संत समाज ने कहा कि आपत्ति होने पर कोई भी तथ्यों के साथ न्यायालय का रुख कर सकता है।

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने हाल ही में उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर को लेकर आरोप लगाए थे कि मंदिर की बहुमूल्य भूमि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े एक ट्रस्ट को कौड़ियों के भाव आवंटित की गई और दान राशि का अनियमितताओं के ज़रिए दुरुपयोग हो रहा है। 4 जुलाई को संत समाज ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी।

संत समाज की कड़ी प्रतिक्रिया

निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर प्रेमानंद गिरि महाराज ने दिग्विजय सिंह के बयान को तथ्यहीन बताया। उन्होंने कहा, 'आजकल लोग सिर्फ मंदिरों पर ही आरोप लगाते हैं, क्योंकि ऐसा करना सबसे आसान है। कुछ पॉलिटिशियन हो या कोई अन्य समाज का व्यक्ति हो, मंदिरों पर आरोप लगा देता है और वो हिंदुओं को कमजोर समझता है। समाज को ऐसे लोगों की बातों को सीरियस नहीं लेना चाहिए।'

उन्होंने आगे कहा कि जो व्यक्ति 'कभी भी किसी के बारे में कुछ भी बोल देते हैं, उन्हें गंभीरता से नहीं लेना चाहिए।'

मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता पर दावा

प्रेमानंद गिरि महाराज ने दावा किया कि महाकाल मंदिर की समस्त आय और व्यय पूरी तरह पारदर्शी तरीके से संचालित होती है। उनके अनुसार, मंदिर प्रशासन कलेक्टर स्तर की निगरानी में कार्य करता है और सभी वित्तीय प्रक्रियाओं का नियमित ऑडिट होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर से प्राप्त धन का उपयोग केवल धार्मिक कार्यों, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, गौशालाओं, वेद विद्यालयों और अन्नक्षेत्र जैसी सेवाओं में किया जाता है।

महाराज ने यह भी कहा कि मंदिर के आसपास जो विकास कार्य हो रहे हैं, वे सरकार की अनुमति और नियमानुसार आवंटन के तहत हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी को आपत्ति है तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।

सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियाँ

दादूराम आश्रम के महामंडलेश्वर ज्ञान दास महाराज ने बताया कि उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ को देखते हुए व्यापक तैयारियाँ चल रही हैं। उन्होंने कहा कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए होटल समेत अन्य आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि दान के माध्यम से कोई निर्माण कार्य हो रहा है तो यह सकारात्मक पहल है, लेकिन ऐसे मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है। उनके अनुसार, विकास कार्यों पर अनावश्यक विवाद खड़ा करना उचित नहीं है, क्योंकि इससे धार्मिक स्थलों की छवि प्रभावित होती है।

आगे की स्थिति

संत समाज ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वे दिग्विजय सिंह के आरोपों को राजनीति से प्रेरित मानते हैं। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब 2028 के सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों के बीच महाकाल कॉरिडोर विकास परियोजना राष्ट्रीय चर्चा में है। यदि आरोपों पर कोई औपचारिक शिकायत या न्यायिक याचिका दायर होती है, तो मामले में नया मोड़ आ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मूल सवाल — भूमि आवंटन की शर्तें और दान के उपयोग का सार्वजनिक ऑडिट — का विस्तृत जवाब अभी नहीं आया है। पारदर्शिता के दावे तब अधिक विश्वसनीय होते हैं जब ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक डोमेन में हो। यह विवाद व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें बड़े धार्मिक स्थलों के प्रशासन और वित्तीय जवाबदेही को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ होती जा रही है।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिग्विजय सिंह ने महाकालेश्वर मंदिर पर क्या आरोप लगाए हैं?
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की बहुमूल्य भूमि RSS से जुड़े एक ट्रस्ट को कौड़ियों के भाव आवंटित की गई और दान राशि का अनियमितताओं के ज़रिए दुरुपयोग किया जा रहा है। ये आरोप उन्होंने हाल ही में सार्वजनिक रूप से लगाए हैं।
संत समाज ने इन आरोपों पर क्या कहा?
निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर प्रेमानंद गिरि महाराज ने आरोपों को निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे लोगों की बातों को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए जो बिना तथ्य के मंदिरों पर आरोप लगाते हैं।
महाकालेश्वर मंदिर का वित्तीय प्रबंधन कैसे होता है?
प्रेमानंद गिरि महाराज के अनुसार, मंदिर प्रशासन कलेक्टर स्तर की निगरानी में काम करता है और सभी वित्तीय प्रक्रियाओं का नियमित ऑडिट होता है। मंदिर से प्राप्त धन का उपयोग धार्मिक कार्यों, गौशालाओं, वेद विद्यालयों और अन्नक्षेत्र जैसी सेवाओं में किया जाता है।
उज्जैन में 2028 सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियाँ कैसी हैं?
दादूराम आश्रम के महामंडलेश्वर ज्ञान दास महाराज के अनुसार, 2028 के सिंहस्थ महाकुंभ को देखते हुए उज्जैन में व्यापक तैयारियाँ चल रही हैं। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए होटल समेत अन्य आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।
क्या मंदिर के आरोपों पर कोई कानूनी कार्रवाई हो सकती है?
संत समाज ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी को मंदिर की व्यवस्थाओं पर आपत्ति है तो वह तथ्यों के साथ न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है। अभी तक किसी औपचारिक न्यायिक याचिका की जानकारी सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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