महाकालेश्वर मंदिर पर दिग्विजय सिंह के आरोप निराधार — संत समाज ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने हाल ही में उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर को लेकर आरोप लगाए थे कि मंदिर की बहुमूल्य भूमि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े एक ट्रस्ट को कौड़ियों के भाव आवंटित की गई और दान राशि का अनियमितताओं के ज़रिए दुरुपयोग हो रहा है। 4 जुलाई को संत समाज ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी।
संत समाज की कड़ी प्रतिक्रिया
निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर प्रेमानंद गिरि महाराज ने दिग्विजय सिंह के बयान को तथ्यहीन बताया। उन्होंने कहा, 'आजकल लोग सिर्फ मंदिरों पर ही आरोप लगाते हैं, क्योंकि ऐसा करना सबसे आसान है। कुछ पॉलिटिशियन हो या कोई अन्य समाज का व्यक्ति हो, मंदिरों पर आरोप लगा देता है और वो हिंदुओं को कमजोर समझता है। समाज को ऐसे लोगों की बातों को सीरियस नहीं लेना चाहिए।'
उन्होंने आगे कहा कि जो व्यक्ति 'कभी भी किसी के बारे में कुछ भी बोल देते हैं, उन्हें गंभीरता से नहीं लेना चाहिए।'
मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता पर दावा
प्रेमानंद गिरि महाराज ने दावा किया कि महाकाल मंदिर की समस्त आय और व्यय पूरी तरह पारदर्शी तरीके से संचालित होती है। उनके अनुसार, मंदिर प्रशासन कलेक्टर स्तर की निगरानी में कार्य करता है और सभी वित्तीय प्रक्रियाओं का नियमित ऑडिट होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर से प्राप्त धन का उपयोग केवल धार्मिक कार्यों, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, गौशालाओं, वेद विद्यालयों और अन्नक्षेत्र जैसी सेवाओं में किया जाता है।
महाराज ने यह भी कहा कि मंदिर के आसपास जो विकास कार्य हो रहे हैं, वे सरकार की अनुमति और नियमानुसार आवंटन के तहत हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी को आपत्ति है तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।
सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियाँ
दादूराम आश्रम के महामंडलेश्वर ज्ञान दास महाराज ने बताया कि उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ को देखते हुए व्यापक तैयारियाँ चल रही हैं। उन्होंने कहा कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए होटल समेत अन्य आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि दान के माध्यम से कोई निर्माण कार्य हो रहा है तो यह सकारात्मक पहल है, लेकिन ऐसे मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है। उनके अनुसार, विकास कार्यों पर अनावश्यक विवाद खड़ा करना उचित नहीं है, क्योंकि इससे धार्मिक स्थलों की छवि प्रभावित होती है।
आगे की स्थिति
संत समाज ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वे दिग्विजय सिंह के आरोपों को राजनीति से प्रेरित मानते हैं। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब 2028 के सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों के बीच महाकाल कॉरिडोर विकास परियोजना राष्ट्रीय चर्चा में है। यदि आरोपों पर कोई औपचारिक शिकायत या न्यायिक याचिका दायर होती है, तो मामले में नया मोड़ आ सकता है।