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डीएमके में 12 साल बाद बैलेट बॉक्स से आंतरिक चुनाव, स्टालिन ने दिया तैयारी का निर्देश

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डीएमके में 12 साल बाद बैलेट बॉक्स से आंतरिक चुनाव, स्टालिन ने दिया तैयारी का निर्देश

सारांश

12 साल की नामांकन-आधारित व्यवस्था को तोड़ते हुए DMK अब बैलेट बॉक्स से आंतरिक चुनाव कराएगी। तमिलनाडु विधानसभा हार के बाद स्टालिन की 10 सदस्यीय समिति ने व्यापक रोडमैप सौंपा — युवा-महिला विंग पुनर्गठन से लेकर स्थायी चुनाव प्रबंधन निकाय तक।

मुख्य बातें

DMK ने 12 वर्षों के अंतराल के बाद पहली बार मतपेटियों (बैलेट बॉक्स) के ज़रिए आंतरिक चुनाव कराने का फैसला किया।
पार्टी अध्यक्ष एम.के.
स्टालिन ने 10 सदस्यीय समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद तैयारियाँ शुरू करने का निर्देश दिया।
यह निर्णय हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद लिया गया है।
जहाँ एक से अधिक उम्मीदवार होंगे, वहाँ नामांकन-आधारित चयन समाप्त होगा और पात्र सदस्य सीधे मतदान करेंगे।
युवा विंग, महिला विंग सहित सभी प्रकोष्ठों के पुनर्गठन और स्थायी चुनाव प्रबंधन निकाय के गठन की सिफारिश की गई है।
एक उच्चस्तरीय नीति एवं रणनीति थिंक टैंक स्थापित करने का भी प्रस्ताव है।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने 1 अगस्त 2026 को व्यापक संगठनात्मक पुनर्गठन की औपचारिक शुरुआत कर दी, जिसके तहत 12 वर्षों के अंतराल के बाद पहली बार मतपेटियों (बैलेट बॉक्स) के ज़रिए पार्टी के आंतरिक चुनाव कराए जाएंगे। पार्टी अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने नेतृत्व को संगठनात्मक चुनाव की तैयारियाँ तत्काल शुरू करने का निर्देश दे दिया है।

पुनर्गठन की पृष्ठभूमि

यह फैसला हाल ही में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में DMK को मिली हार के बाद आया है। चुनावी पराजय के बाद स्टालिन ने पार्टी के संगठनात्मक ढाँचे की समीक्षा और सुधार के उपाय सुझाने के लिए एक 10 सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति ने अब अपनी विस्तृत रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को सौंप दी है।

गौरतलब है कि DMK ने इससे पहले 2013 में आंतरिक चुनाव कराए थे। तब से पदाधिकारियों का चयन नामांकन-आधारित प्रक्रिया से होता रहा है, जिसे अब समाप्त करने की सिफारिश की गई है।

समिति की प्रमुख सिफारिशें

समिति के रोडमैप में जमीनी स्तर की शाखाओं से लेकर विभाजन और संगठनात्मक सीमाओं का नए सिरे से निर्धारण शामिल है, ताकि कार्यकुशलता बढ़े और स्थानीय स्तर पर समन्वय सुधरे। इसके अलावा युवा विंग और महिला विंग सहित सभी प्रकोष्ठों के पुनर्गठन की भी सिफारिश की गई है।

रिपोर्ट में एक स्थायी चुनाव प्रबंधन निकाय के गठन का सुझाव दिया गया है, जो चुनावी टास्क फोर्स के पुनर्गठन और अभियान रणनीति की निगरानी करेगा। साथ ही एक उच्चस्तरीय नीति एवं रणनीति थिंक टैंक स्थापित करने की सिफारिश भी की गई है, जो दीर्घकालिक राजनीतिक कार्ययोजनाएँ तैयार करेगा।

आंतरिक चुनाव की प्रक्रिया

पुनर्गठन पूरा होने के बाद DMK संगठन के सभी स्तरों पर आंतरिक चुनाव कराएगी। जिन निर्वाचन क्षेत्रों या संगठनात्मक इकाइयों में किसी पद के लिए एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में होंगे, वहाँ पात्र पार्टी सदस्य और स्वयंसेवक मतपेटियों के ज़रिए सीधे मतदान कर सकेंगे।

समिति ने स्पष्ट किया है कि जहाँ मुकाबला हो, वहाँ नामांकन-आधारित चयन की मौजूदा व्यवस्था समाप्त कर दी जाए। इस सुधार का उद्देश्य पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र और पारदर्शिता को संस्थागत रूप देना है।

राजनीतिक महत्व

यह ऐसे समय में आया है जब भारत की कई क्षेत्रीय पार्टियाँ आंतरिक लोकतंत्र की कमी को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रही हैं। DMK का यह कदम न केवल संगठनात्मक सुधार का संकेत देता है, बल्कि चुनावी हार से उबरने की रणनीति का भी हिस्सा है। विश्लेषकों के अनुसार, बैलेट बॉक्स से चुनाव कराने की प्रक्रिया पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा और जवाबदेही का भाव जगा सकती है।

आगे की राह

स्टालिन के निर्देश के बाद पार्टी नेतृत्व ने तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। पुनर्गठन की समयसीमा और आंतरिक चुनावों की तारीखें अभी घोषित नहीं की गई हैं, लेकिन रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद प्रक्रिया में तेज़ी आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है। भारत की क्षेत्रीय पार्टियों में आंतरिक चुनावों की घोषणाएँ अक्सर संगठनात्मक वास्तविकता से आगे चलती हैं — और जब परिणाम नेतृत्व की पसंद के विरुद्ध जाने लगते हैं, तो प्रक्रिया शिथिल पड़ जाती है। स्टालिन के लिए यह दोधारी दांव है: पारदर्शिता से कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ेगा, लेकिन अगर चुनाव परिणाम गुटबाजी को उजागर करें, तो नई कमज़ोरियाँ भी सामने आ सकती हैं। यह देखना होगा कि थिंक टैंक और चुनाव प्रबंधन निकाय महज़ संरचनात्मक सजावट बनते हैं या वास्तव में नीति-निर्माण में भूमिका निभाते हैं।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

DMK के आंतरिक चुनाव 12 साल बाद क्यों हो रहे हैं?
DMK ने अंतिम बार 2013 में बैलेट बॉक्स से आंतरिक चुनाव कराए थे। हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने 10 सदस्यीय समिति बनाई, जिसकी सिफारिश पर अब फिर से मतपेटियों के ज़रिए चुनाव कराने का फैसला हुआ है।
DMK के आंतरिक चुनावों में नई प्रक्रिया क्या होगी?
जहाँ किसी पद पर एक से अधिक उम्मीदवार होंगे, वहाँ पात्र पार्टी सदस्य और स्वयंसेवक सीधे मतपेटियों के ज़रिए मतदान करेंगे। नामांकन-आधारित चयन की पुरानी व्यवस्था समाप्त की जाएगी।
DMK की 10 सदस्यीय समिति ने क्या सिफारिशें दी हैं?
समिति ने जमीनी शाखाओं से लेकर पार्टी मुख्यालय तक संगठनात्मक सीमाओं के पुनर्निर्धारण, युवा और महिला विंग के पुनर्गठन, स्थायी चुनाव प्रबंधन निकाय और एक उच्चस्तरीय नीति एवं रणनीति थिंक टैंक की स्थापना की सिफारिश की है।
DMK के आंतरिक चुनाव कब होंगे?
स्टालिन ने तैयारियाँ शुरू करने का निर्देश दे दिया है, लेकिन अभी तक आंतरिक चुनावों की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है। पुनर्गठन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही चुनाव कराए जाएंगे।
DMK के इस संगठनात्मक सुधार का क्या महत्व है?
यह सुधार पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र और पारदर्शिता को संस्थागत रूप देने का प्रयास है। चुनावी हार के बाद यह कदम पार्टी कार्यकर्ताओं में जवाबदेही और भागीदारी की भावना बढ़ाने के लिए उठाया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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