डीएमके ने सहयोगियों को दी सीट बंटवारे के लिए 23 मार्च की अंतिम तिथि

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डीएमके ने सहयोगियों को दी सीट बंटवारे के लिए 23 मार्च की अंतिम तिथि

सारांश

तमिलनाडु की राजनीति में चुनावी हलचल तेज हो गई है। डीएमके ने अपने सहयोगी दलों को सीट बंटवारे का प्रस्ताव स्वीकार करने के लिए 23 मार्च की अंतिम तिथि दी है। इसके बाद चुनावी तैयारियों में देरी हो सकती है। स्थिति गंभीर है, जानिए क्या है पीछे का सच।

मुख्य बातें

डीएमके ने सहयोगियों को 23 मार्च तक सीट बंटवारे का प्रस्ताव स्वीकार करने का अल्टीमेटम दिया है।
राज्य में विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल को होने हैं।
कई प्रमुख सहयोगी दलों ने डीएमके के प्रस्ताव पर असहमति जताई है।
वीसीके ने सीटों के कम आवंटन पर नाराजगी व्यक्त की है।
कमल हासन की पार्टी ने चुनाव चिह्न पर लड़ने के प्रस्ताव को ठुकराया है।

चेन्नई, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति में चुनावों से पहले तेजी आ गई है। डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) की अगुवाई वाले गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। डीएमके नेतृत्व ने अपने सहयोगी दलों को एक स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे सोमवार, 23 मार्च तक प्रस्तावित सीट बंटवारे के फार्मूले को स्वीकार करें, अन्यथा चुनावी तैयारियों में देरी हो सकती है।

राज्य में विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल को होने वाले हैं, जिससे समय की कमी हो रही है और नामांकन प्रक्रिया भी शीघ्र शुरू होने वाली है, इसलिए संवाद को तेज करना आवश्यक हो गया है।

कई दौर की बैठकों के बावजूद कुछ प्रमुख सहयोगी दल जैसे-विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके), सीपीआई (एम), और देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कड़गम (डीएमडीके)-डीएमके के प्रस्तावित सीटों के आंकड़ों पर सहमत नहीं हो पाए हैं। यह असहमति गठबंधन में तनाव पैदा कर रही है।

वीसीके इस मुद्दे पर सबसे अधिक सक्रिय दिखाई दे रही है। पार्टी के प्रमुख थोल तिरुमावलवन ने एक वीडियो संदेश जारी कर सीटों के कम आवंटन पर असंतोष प्रकट किया है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, बातचीत पर्दे के पीछे अभी भी जारी है और किसी समझौते की संभावना बनी हुई है।

वहीं, सीपीआई(एम) भी इस मामले को गंभीरता से ले रही है। पार्टी नेतृत्व ने कई उच्चस्तरीय बैठकों में डीएमके के प्रस्ताव पर विचार किया है। कहा जा रहा है कि उन्हें जितनी सीटों की उम्मीद थी, प्रस्ताव उससे कम है। फिलहाल पार्टी ने अपनी अंतिम राय डीएमके को नहीं दी है।

दूसरी ओर, हाल ही में गठबंधन में शामिल हुई डीएमडीके का कहना है कि बातचीत चल रही है। पार्टी नेताओं का दावा है कि सीटों की संख्या और क्षेत्र का बंटवारा तब तय होगा जब दोनों पक्षों के बीच सहमति बन जाएगी।

इस बीच, कमल हासन की पार्टी मक्कल नीधि मय्यम (एमएनएम) ने डीएमके के चुनाव चिह्न पर लड़ने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह अपने 'टॉर्च लाइट' चुनाव चिन्ह के साथ ही चुनावी मैदान में उतरेगी। इस पर डीएमके नेतृत्व विचार कर रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीएमके ने सीट बंटवारे के लिए कब तक का समय दिया है?
डीएमके ने अपने सहयोगी दलों को 23 मार्च तक सीट बंटवारे के प्रस्ताव को स्वीकार करने का समय दिया है।
राज्य में विधानसभा चुनाव कब हैं?
राज्य में विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल को होने वाले हैं।
कौन से प्रमुख सहयोगी दल डीएमके के प्रस्ताव पर सहमत नहीं हुए हैं?
विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके), सीपीआई (एम), और देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कड़गम (डीएमडीके) प्रमुख सहयोगी दल हैं जो सहमत नहीं हुए हैं।
क्या वीसीके ने सीट बंटवारे पर अपनी असहमति जताई है?
हाँ, वीसीके के प्रमुख थोल तिरुमावलवन ने वीडियो संदेश में सीटों के कम आवंटन पर असंतोष व्यक्त किया है।
कमल हासन की पार्टी का क्या कहना है?
कमल हासन की पार्टी मक्कल नीधि मय्यम (एमएनएम) ने डीएमके के चुनाव चिह्न पर लड़ने का प्रस्ताव ठुकरा दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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