12 अगस्त 2026
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ई-पंजीकरण विरोध: गौतमबुद्ध नगर में वकीलों-डीड राइटर्स का अनिश्चितकालीन धरना, 300 से अधिक रजिस्ट्रियाँ लंबित

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ई-पंजीकरण विरोध: गौतमबुद्ध नगर में वकीलों-डीड राइटर्स का अनिश्चितकालीन धरना, 300 से अधिक रजिस्ट्रियाँ लंबित

सारांश

उत्तर प्रदेश की ई-पंजीकरण व्यवस्था के खिलाफ गौतमबुद्ध नगर के वकील और डीड राइटर्स सड़क पर उतर आए हैं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के सब रजिस्ट्रार कार्यालयों में काम ठप, 300 से अधिक रजिस्ट्रियाँ लंबित — और सरकारी राजस्व पर भी सीधी चोट।

मुख्य बातें

गौतमबुद्ध नगर के अधिवक्ताओं और डीड राइटर्स ने 19 जून से ई-पंजीकरण व्यवस्था के विरोध में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया।
नोएडा सेक्टर-33 और ग्रेटर नोएडा गामा-2 के सब रजिस्ट्रार कार्यालयों में रजिस्ट्री कार्य पूरी तरह ठप।
विरोध प्रदर्शन के चलते अब तक 300 से अधिक रजिस्ट्रियाँ लंबित हो चुकी हैं।
प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि नई व्यवस्था से उनके रोज़गार और आम नागरिकों को तकनीकी-कानूनी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
रजिस्ट्री और स्टांप शुल्क बाधित होने से सरकारी राजस्व पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

उत्तर प्रदेश सरकार की नई ई-पंजीकरण व्यवस्था के विरोध में गौतमबुद्ध नगर के अधिवक्ताओं और डीड राइटर्स ने 19 जून से अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है, जिसके चलते जिले के दो प्रमुख सब रजिस्ट्रार कार्यालयों में रजिस्ट्री का कार्य पूरी तरह ठप हो गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक सरकार इस फैसले को वापस नहीं लेती या आवश्यक संशोधन नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अब तक 300 से अधिक रजिस्ट्रियाँ लंबित हो चुकी हैं।

मुख्य घटनाक्रम

नोएडा के सेक्टर-33 स्थित सब रजिस्ट्रार कार्यालय और ग्रेटर नोएडा के गामा-2 स्थित सब रजिस्ट्रार कार्यालय में अधिवक्ताओं और डीड राइटर्स ने कामकाज बाधित कर दिया है। धरने पर बैठे अधिवक्ताओं का कहना है कि नई ई-पंजीकरण व्यवस्था न केवल उनके रोज़गार को प्रभावित करेगी, बल्कि आम नागरिकों को भी गंभीर तकनीकी और कानूनी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

बड़ी संख्या में नागरिक अपने दस्तावेज़ों की रजिस्ट्री कराने के लिए कार्यालय पहुँचे, लेकिन कार्य बाधित होने के कारण उन्हें बिना काम के वापस लौटना पड़ा।

ई-पंजीकरण व्यवस्था क्या है

उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में यह नई ई-पंजीकरण व्यवस्था लागू की है। इसके तहत संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए नागरिकों को अनिवार्य रूप से सब रजिस्ट्रार कार्यालय जाने की ज़रूरत नहीं होगी — कई प्रक्रियाएँ डिजिटल माध्यम से पूरी की जा सकेंगी। सरकार का दावा है कि इससे समय और संसाधनों की बचत होगी।

गौरतलब है कि गौतमबुद्ध नगर में इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने की तैयारी अभी चल रही थी, लेकिन उससे पहले ही विरोध प्रदर्शन ने प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

आम जनता और राजस्व पर असर

धरने के कारण दोनों कार्यालयों में संपत्ति रजिस्ट्री का कार्य लगभग पूरी तरह ठप है। इसका सीधा असर सरकारी राजस्व पर भी पड़ रहा है — रजिस्ट्री शुल्क और स्टांप शुल्क से मिलने वाली आय बाधित हो रही है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार डिजिटल शासन को प्राथमिकता देने का संकल्प दोहरा रही है।

प्रदर्शनकारियों की माँगें

धरने पर बैठे अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया है कि सरकार द्वारा ई-पंजीकरण निर्णय को वापस लेने या उसमें आवश्यक संशोधन किए जाने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि इस व्यवस्था से डीड राइटर्स और अधिवक्ताओं की आजीविका सीधे प्रभावित होगी, जो वर्षों से इस प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा रहे हैं।

क्या होगा आगे

अभी तक प्रशासन या राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि धरना जारी रहा, तो लंबित रजिस्ट्रियों की संख्या और बढ़ने की आशंका है, जिससे सरकारी राजस्व को और नुकसान हो सकता है। आने वाले दिनों में प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच वार्ता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गौतमबुद्ध नगर का यह विरोध उस बड़े सच को उजागर करता है जिसे नीति-निर्माता अक्सर नज़रअंदाज़ करते हैं — तकनीकी बदलाव की रफ़्तार और ज़मीनी तैयारी के बीच की खाई। डीड राइटर्स और अधिवक्ता वर्षों से इस पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं; उनकी आजीविका की चिंता को महज़ 'बदलाव-विरोध' कहकर खारिज करना उचित नहीं। असली सवाल यह है कि क्या सरकार ने इस संक्रमण काल में प्रभावित वर्गों के पुनर्वास या वैकल्पिक भूमिका की कोई योजना बनाई है — और अगर नहीं, तो ऐसे विरोध आगे भी होते रहेंगे।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ई-पंजीकरण व्यवस्था क्या है और इसका विरोध क्यों हो रहा है?
उत्तर प्रदेश सरकार की ई-पंजीकरण व्यवस्था के तहत संपत्ति रजिस्ट्री की प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से पूरी की जा सकेगी, जिससे सब रजिस्ट्रार कार्यालय जाना अनिवार्य नहीं रहेगा। अधिवक्ताओं और डीड राइटर्स का कहना है कि इससे उनकी आजीविका प्रभावित होगी और आम नागरिकों को तकनीकी व कानूनी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
गौतमबुद्ध नगर में कौन-से कार्यालय प्रभावित हैं?
नोएडा के सेक्टर-33 स्थित सब रजिस्ट्रार कार्यालय और ग्रेटर नोएडा के गामा-2 स्थित सब रजिस्ट्रार कार्यालय में धरने के कारण रजिस्ट्री कार्य पूरी तरह बाधित है। दोनों कार्यालयों में मिलाकर 300 से अधिक रजिस्ट्रियाँ लंबित हो चुकी हैं।
धरने का आम नागरिकों पर क्या असर पड़ रहा है?
बड़ी संख्या में लोग दस्तावेज़ों की रजिस्ट्री कराने कार्यालय पहुँचे लेकिन काम ठप होने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा। इसके अलावा रजिस्ट्री शुल्क और स्टांप शुल्क से मिलने वाले सरकारी राजस्व पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य माँग क्या है?
धरने पर बैठे अधिवक्ताओं और डीड राइटर्स की माँग है कि उत्तर प्रदेश सरकार ई-पंजीकरण का फैसला वापस ले या उसमें आवश्यक संशोधन करे। जब तक यह माँग पूरी नहीं होती, उनका अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।
क्या सरकार ने इस विरोध पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक राज्य सरकार या स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। धरना जारी रहने की स्थिति में लंबित रजिस्ट्रियों की संख्या और बढ़ने की आशंका है।
राष्ट्र प्रेस
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