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ईडी की कार्रवाई: पश्चिमी रेलवे कर्मचारी प्रशांत रबारी पर ₹2.58 करोड़ की आय से अधिक संपत्ति का मामला

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ईडी की कार्रवाई: पश्चिमी रेलवे कर्मचारी प्रशांत रबारी पर ₹2.58 करोड़ की आय से अधिक संपत्ति का मामला

सारांश

प्रवर्तन निदेशालय ने पश्चिमी रेलवे कर्मचारी प्रशांत रबारी के खिलाफ ₹2.58 करोड़ की कथित आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने पर पीएमएलए विशेष अदालत, अहमदाबाद में अभियोजन शिकायत दर्ज की है। ₹2 करोड़ से अधिक की अचल संपत्तियाँ पहले ही कुर्क की जा चुकी हैं।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिमी रेलवे कर्मचारी प्रशांत रबारी के खिलाफ पीएमएलए के तहत अभियोजन शिकायत दर्ज की।
रबारी पर आरोप है कि उन्होंने 1 जनवरी 2017 से 2 फरवरी 2021 के बीच कथित तौर पर ₹2.58 करोड़ की आय से अधिक संपत्ति जुटाई।
ईडी ने ₹2,00,44,981 मूल्य की अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क कीं।
मामला मूल रूप से सीबीआई, गांधीनगर द्वारा 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988' के तहत दर्ज एफआईआर पर आधारित है।
अभियोजन शिकायत अहमदाबाद के भद्रा स्थित पीएमएलए विशेष अदालत में दाखिल की गई है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिमी रेलवे के कर्मचारी प्रशांत रबारी के खिलाफ अहमदाबाद की पीएमएलए विशेष अदालत, भद्रा में अभियोजन शिकायत दर्ज की है। आरोप है कि रबारी ने 1 जनवरी 2017 से 2 फरवरी 2021 के बीच नौकरी के दौरान कथित तौर पर भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों के ज़रिए अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक लगभग ₹2.58 करोड़ की चल और अचल संपत्तियाँ अर्जित कीं। ईडी के अहमदाबाद जोनल कार्यालय ने 27 अक्टूबर 2026 को इस कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की।

मामले की पृष्ठभूमि

इस मामले की नींव केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), गांधीनगर द्वारा दर्ज एक प्राथमिकी (एफआईआर) से पड़ी, जो 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988' की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई थी। चूँकि उक्त एफआईआर में आरोपित अपराध 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002' के तहत अनुसूचित अपराधों की श्रेणी में आते हैं, इसलिए ईडी ने स्वतंत्र रूप से मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू की।

गौरतलब है कि ईडी की जाँच सीबीआई की कार्रवाई के समानांतर चलती है — एक एजेंसी भ्रष्टाचार के मूल अपराध की जाँच करती है, जबकि दूसरी उससे उत्पन्न धन के शोधन की। यह दोहरी जाँच प्रणाली सरकारी कर्मचारियों के आय से अधिक संपत्ति के मामलों में अब एक स्थापित प्रक्रिया बन चुकी है।

मुख्य आरोप और संपत्तियाँ

ईडी के अनुसार, रबारी ने पश्चिमी रेलवे में सेवाकाल के दौरान कथित तौर पर ₹2.58 करोड़ से अधिक की चल और अचल संपत्तियाँ जुटाईं, जो उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक बताई जाती हैं। एजेंसी का आरोप है कि ये संपत्तियाँ रबारी और उनकी पत्नी के नाम पर दर्ज की गई थीं।

जाँच के दौरान ईडी ने ₹2,00,44,981 मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क करने का आदेश जारी किया। एजेंसी का कहना है कि ये संपत्तियाँ कथित अवैध गतिविधियों से प्राप्त धन का सीधे इस्तेमाल करके खरीदी गई थीं।

अदालत में अभियोजन शिकायत

संपत्ति कुर्की के बाद, ईडी ने अहमदाबाद के भद्रा स्थित पीएमएलए विशेष अदालत में रबारी के खिलाफ औपचारिक अभियोजन शिकायत दायर की है। इसमें पीएमएलए के प्रावधानों के तहत आगे की कार्यवाही की माँग की गई है। यह शिकायत मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अभियोजन की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जाता है।

आम जनता और रेलवे पर असर

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के विरुद्ध केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता पर जनचर्चा तेज़ है। रेलवे जैसे बड़े सार्वजनिक संस्थान में कर्मचारियों द्वारा कथित भ्रष्टाचार की यह कड़ी उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है, जिसमें ईडी और सीबीआई की संयुक्त कार्रवाइयाँ मध्यम-स्तर के सरकारी कर्मचारियों तक भी पहुँच रही हैं।

आलोचकों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयाँ तब अधिक प्रभावी होती हैं जब अभियोजन समय पर पूरा हो और दोषसिद्धि दर ऊँची हो — अन्यथा ये केवल संपत्ति कुर्की तक सीमित रह जाती हैं।

आगे की राह

अब मामला पीएमएलए विशेष अदालत, अहमदाबाद के समक्ष है, जहाँ अभियोजन शिकायत की सुनवाई होगी। सीबीआई की एफआईआर पर आधारित मूल भ्रष्टाचार मामले में कार्यवाही भी समानांतर चलती रहेगी। दोनों एजेंसियों की कार्रवाई का परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि अदालत में संपत्तियों और आय के बीच कथित अंतर को साबित करने में अभियोजन पक्ष कितना सफल होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो निवारक प्रभाव के लिहाज़ से सकारात्मक संकेत है। हालाँकि असली कसौटी यह है कि संपत्ति कुर्की के बाद अदालत में दोषसिद्धि कितनी बार होती है — एक ऐसा मानक जिस पर ईडी की ऐतिहासिक सफलता दर सीमित रही है। सीबीआई और ईडी की समानांतर कार्रवाई संसाधन-गहन है; बिना त्वरित सुनवाई के, अभियुक्त वर्षों तक अनिर्णय की स्थिति में रहते हैं। रेलवे जैसे विशाल सार्वजनिक संस्थान में भ्रष्टाचार की यह कड़ी इस बात की याद दिलाती है कि प्रणालीगत सुधार के बिना व्यक्तिगत अभियोजन पर्याप्त नहीं है।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रशांत रबारी के खिलाफ ईडी ने क्या कार्रवाई की है?
ईडी ने पश्चिमी रेलवे कर्मचारी प्रशांत रबारी के खिलाफ पीएमएलए, 2002 के तहत अहमदाबाद की भद्रा स्थित पीएमएलए विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दर्ज की है। इससे पहले एजेंसी ₹2,00,44,981 मूल्य की अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क कर चुकी है।
रबारी पर आय से अधिक संपत्ति का आरोप कितने रुपए का है?
ईडी के अनुसार, रबारी ने 1 जनवरी 2017 से 2 फरवरी 2021 के बीच कथित तौर पर लगभग ₹2.58 करोड़ की चल और अचल संपत्तियाँ जुटाईं, जो उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक बताई जाती हैं।
इस मामले की जाँच कैसे शुरू हुई?
मामले की शुरुआत सीबीआई, गांधीनगर द्वारा 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988' की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर से हुई। चूँकि उक्त अपराध पीएमएलए के तहत अनुसूचित अपराध की श्रेणी में आते हैं, इसलिए ईडी ने स्वतंत्र मनी लॉन्ड्रिंग जाँच शुरू की।
ईडी ने कितनी संपत्ति कुर्क की है और किसके नाम पर थी?
ईडी ने ₹2,00,44,981 मूल्य की अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। एजेंसी के अनुसार ये संपत्तियाँ रबारी और उनकी पत्नी के नाम पर दर्ज थीं और कथित अवैध गतिविधियों से प्राप्त धन से खरीदी गई बताई जाती हैं।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
अभियोजन शिकायत दाखिल होने के बाद मामला अब अहमदाबाद की पीएमएलए विशेष अदालत में सुनवाई के लिए आएगा। सीबीआई की एफआईआर पर आधारित मूल भ्रष्टाचार मामले की कार्यवाही भी समानांतर जारी रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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