एकनाथ शिंदे ठाणे अस्पताल में भर्ती, अत्यधिक थकान और बुखार के बाद हालत स्थिर
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे को 4 जुलाई 2026 को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद ठाणे के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम उनकी निरंतर निगरानी कर रही है और फिलहाल उनकी हालत पूरी तरह स्थिर बताई जा रही है।
तबीयत कैसे बिगड़ी
शिवसेना सूत्रों के मुताबिक, बीते कुछ दिनों से लगातार राजनीतिक कार्यक्रमों, भारी कार्यभार और अत्यधिक शारीरिक थकान के चलते शिंदे की सेहत प्रभावित हुई। शुक्रवार को महाराष्ट्र विधानसभा का सत्र चल रहा था, तभी उन्हें तेज बुखार और गंभीर कमज़ोरी महसूस हुई। शुरुआत में उन्होंने काम जारी रखा, लेकिन स्थिति और बिगड़ने पर उन्हें तत्काल ठाणे के अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
'ऑपरेशन टाइगर' और लगातार राजनीतिक सक्रियता
हाल के दिनों में एकनाथ शिंदे अपने 'ऑपरेशन टाइगर' अभियान के तहत बेहद सक्रिय थे। इसी अभियान के दौरान उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों और एमएलसी सचिन अहीर ने शिंदे की शिवसेना का दामन थामा। इस अभियान को सफल बनाने के लिए उन्हें लगातार काम करना पड़ा और कई बार नई दिल्ली की यात्राएँ भी करनी पड़ीं। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में दलबदल की गतिविधियाँ तेज़ हो रही हैं।
राजनीतिक कार्यक्रम पर असर
शुक्रवार शाम 4 बजे ठाणे के गंगूबाई शिंदे हॉल में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रम निर्धारित था, जिसमें उद्धव ठाकरे गुट की धुले की प्रमुख नेता और उपनेता शुभांगी पाटील को आधिकारिक रूप से शिंदे की शिवसेना में शामिल होना था। अस्पताल में भर्ती होने के कारण यह कार्यक्रम टालना पड़ा। गौरतलब है कि शुभांगी पाटील इससे पहले महा विकास अघाड़ी (MVA) की उम्मीदवार के रूप में नासिक स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव लड़ चुकी हैं।
देर रात हुआ कार्यक्रम
बाद में यह कार्यक्रम देर रात आयोजित किया गया और करीब रात 1:15 बजे इसका समापन हुआ। डिप्टी सीएम की अनुपस्थिति में उनके पुत्र और सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने रात 2 बजे वरिष्ठ पार्टी पदाधिकारियों की मौजूदगी में शुभांगी पाटील को पार्टी की सदस्यता दिलाई।
आगे क्या
पार्टी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि एकनाथ शिंदे की सेहत को लेकर किसी गंभीर चिंता की स्थिति नहीं है और वे डॉक्टरों की निगरानी में हैं। उनके जल्द स्वस्थ होकर राजनीतिक गतिविधियों में लौटने की उम्मीद जताई जा रही है।