इंजीनियर राशिद के पिता हाजी खजिर मोहम्मद शेख का निधन, एआईपी ने मानवीय आधार पर रिहाई की अपील की
सारांश
मुख्य बातें
बारामूला लोकसभा सांसद इंजीनियर राशिद के पिता हाजी खजिर मोहम्मद शेख का 18 मई को निधन हो गया। अवामी इत्तेहाद पार्टी (एआईपी) के मुख्य प्रवक्ता इनाम उन नबी ने इस दुखद सूचना की पुष्टि की। इंजीनियर राशिद इस समय न्यायिक हिरासत में हैं और अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पा रहे।
हाजी खजिर मोहम्मद शेख: एक परिचय
इनाम उन नबी ने हाजी खजिर मोहम्मद शेख को एक अनुभवी शिक्षक, नेक इंसान और अत्यंत सम्मानित व्यक्तित्व बताया। उनके अनुसार, हाजी साहब ने अपना पूरा जीवन शिक्षा, नैतिकता और सामाजिक मूल्यों की सेवा में समर्पित कर दिया। वे अपनी सादगी, बुद्धिमत्ता और विनम्रता के लिए जम्मू-कश्मीर भर में व्यापक रूप से सराहे जाते थे।
एआईपी प्रवक्ता ने यह भी कहा कि इंजीनियर राशिद की पूरी राजनीतिक और सामाजिक यात्रा में हाजी खजिर साहब एक मजबूत स्तंभ की तरह उनके साथ खड़े रहे। उनके निधन से न केवल शोकाकुल परिवार में, बल्कि उनके छात्रों, शुभचिंतकों और प्रशंसकों के बीच भी गहरा शून्य पैदा हो गया है।
एआईपी की मानवीय अपील
इनाम उन नबी ने भारत सरकार और संबंधित अधिकारियों से भावुक अपील करते हुए कहा कि जेल में बंद सांसद इंजीनियर राशिद को तत्काल रिहाई दी जाए, ताकि एक बेटा अपने पिता के जनाजे की नमाज और अंतिम संस्कार में शामिल हो सके। उन्होंने कहा, 'किसी बेटे के लिए अपने पिता को अंतिम विदाई देने से वंचित होने से बड़ा कोई दुख नहीं हो सकता।'
एआईपी प्रवक्ता ने यह भी कहा कि राजनीतिक मतभेदों से परे, व्यक्तिगत त्रासदी और दुख के ऐसे क्षणों में मानवीय संवेदनाओं को ही सर्वोपरि रखा जाना चाहिए। उनके शब्दों में, 'एक पिता इस दुनिया से चले गए हैं और उनका बेटा सलाखों के पीछे है — यह पूरे परिवार और उन सभी के लिए अत्यंत पीड़ादायक क्षण है जो उन्हें जानते हैं।'
पार्टी की एकजुटता
एआईपी के समस्त नेतृत्व और कार्यकर्ताओं ने शोक की इस घड़ी में इंजीनियर राशिद और उनके परिवार के साथ पूरी एकजुटता व्यक्त की है। इनाम उन नबी ने दुआ की कि हाजी साहब को जन्नत में सर्वोच्च स्थान मिले और शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में सब्र और हिम्मत प्राप्त हो।
आगे क्या
अभी तक भारत सरकार या संबंधित अधिकारियों की ओर से एआईपी की रिहाई की अपील पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इंजीनियर राशिद की हिरासत और उनके परिवार की स्थिति पर जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक और सामाजिक हलकों की नज़रें टिकी हैं।