EU ने पाकिस्तान को दी चेतावनी: मानवाधिकार उल्लंघन जारी रहा तो GSP+ व्यापार सुविधा खतरे में
सारांश
मुख्य बातें
यूरोपीय संघ (EU) ने पाकिस्तान को मानवाधिकार उल्लंघनों के मामले में कड़ी चेतावनी जारी की है। जबरन गुमशुदगी, राजनीतिक दमन और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के हनन को लेकर यूरोपीय संसद और EU प्रतिनिधिमंडल ने इस्लामाबाद को साफ कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर महज हस्ताक्षर करने और कागजी कानून बनाने से जीएसपी प्लस (जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज प्लस) के तहत मिलने वाली विशेष व्यापारिक छूट सुरक्षित नहीं रहेगी। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान को 2027 से लागू होने वाले नए और अधिक सख्त GSP+ नियमों का सामना करना है।
यूरोपीय संसद में उठे सवाल
सितंबर 2026 की शुरुआत में स्पेन की यूरोपीय सांसद सैंड्रा गोमेज लोपेज ने यूरोपीय संसद की मानवाधिकार उपसमिति में अहम सवाल खड़ा किया। उन्होंने पूछा कि यदि पाकिस्तान की प्रतिबद्धताओं के साथ कोई समय सीमा, मापने योग्य लक्ष्य या जवाबदेही तंत्र तय नहीं है तो ऐसे वादों की कोई सार्थकता नहीं है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब यूरोपीय संसद में पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर सवाल उठे हों, लेकिन इस बार भाषा अभूतपूर्व रूप से सख्त रही।
EU राजदूत की स्पष्ट चेतावनी
लोपेज के बयान के दो दिन बाद, पाकिस्तान में यूरोपीय संघ के राजदूत रायमुंडास कारोब्लिस ने कहा कि पाकिस्तान एक 'बेहद महत्वपूर्ण मोड़' पर खड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि ठोस और सत्यापित सुधारों के बिना GSP+ का भविष्य 'बिल्कुल भी सुनिश्चित नहीं' है। कारोब्लिस के यह शब्द इसलिए भी वज़नदार हैं क्योंकि पाकिस्तान इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभार्थी देश है।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर संभावित असर
पाकिस्तान को 2014 से GSP+ का लाभ मिल रहा है। 2024 में उसके लगभग 7.5 अरब यूरो मूल्य के निर्यात इस योजना के तहत पात्र थे, जबकि 7.1 अरब यूरो से अधिक के निर्यात ने वास्तव में इस सुविधा का उपयोग किया — यह करीब 95 प्रतिशत उपयोग दर है। यूरोपीय आयोग के आँकड़ों के अनुसार, इससे पाकिस्तान ने उस वर्ष लगभग 73.2 करोड़ यूरो के शुल्क (टैरिफ) की बचत की।
पाकिस्तान के EU को होने वाले निर्यात में कपड़ा और परिधान क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 70 से 76 प्रतिशत है। यदि यह व्यापारिक सुविधा समाप्त होती है, तो कथित तौर पर कुछ कपड़ा उत्पादों पर 9 से 12 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लग सकता है — जो पाकिस्तान के पहले से दबाव में चल रहे निर्यात क्षेत्र के लिए गंभीर झटका होगा।
यूरोपीय आयोग की रिपोर्ट में गंभीर निष्कर्ष
यूरोपीय आयोग की 2023-2025 अवधि को कवर करने वाली ताज़ा रिपोर्ट में कई चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पीछे गया है, जिनमें जबरन गुमशुदगी, न्यायेतर हत्याएँ, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध, पत्रकारों पर दबाव, अल्पसंख्यक अधिकारों का हनन, न्यायपालिका की स्वतंत्रता में कमी और जबरन मजदूरी जैसी गंभीर समस्याएँ शामिल हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जबरन गुमशुदगी के मामलों में अब तक किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया गया है। पाकिस्तान के स्वयं के जाँच आयोग ने 2025 में 273 नए मामले दर्ज किए हैं। आलोचकों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
आगे क्या होगा
EU की नई GSP+ व्यवस्था 1 जनवरी 2027 से लागू होगी, जिसके तहत लाभार्थी देशों को जिन अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पालन करना होगा, उनकी संख्या 27 से बढ़ाकर 32 कर दी जाएगी। पाकिस्तान को फिलहाल 2028 के अंत तक अपनी वर्तमान स्थिति बनाए रखने की अनुमति मिलेगी, लेकिन इसके बाद उसे नए और अधिक कड़े मानकों के तहत दोबारा आवेदन करना होगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस्लामाबाद आने वाले महीनों में कोई ठोस सुधार कदम उठाता है या फिर अरबों यूरो की व्यापारिक छूट खोने का जोखिम मोल लेता है।