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EU ने पाकिस्तान को दी चेतावनी: मानवाधिकार उल्लंघन जारी रहा तो GSP+ व्यापार सुविधा खतरे में

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EU ने पाकिस्तान को दी चेतावनी: मानवाधिकार उल्लंघन जारी रहा तो GSP+ व्यापार सुविधा खतरे में

सारांश

यूरोपीय संघ ने पाकिस्तान को बेमिसाल सख्त भाषा में चेताया है कि जबरन गुमशुदगी, अल्पसंख्यक दमन और पत्रकारों पर हमलों जैसे मानवाधिकार उल्लंघन जारी रहे तो 7 अरब यूरो से अधिक के निर्यात को शुल्क-मुक्त प्रवेश देने वाली GSP+ सुविधा छिन सकती है — यह पाकिस्तान के कपड़ा उद्योग के लिए अस्तित्व का संकट होगा।

मुख्य बातें

यूरोपीय संघ ने पाकिस्तान को मानवाधिकार उल्लंघनों पर कड़ी चेतावनी दी; GSP+ व्यापार सुविधा दांव पर।
2024 में पाकिस्तान ने GSP+ से लगभग 73.2 करोड़ यूरो की टैरिफ बचत की; 7.1 अरब यूरो से अधिक का निर्यात इस सुविधा का उपयोग कर रहा था।
EU राजदूत रायमुंडास कारोब्लिस ने कहा — ठोस सुधारों के बिना GSP+ का भविष्य 'बिल्कुल भी सुनिश्चित नहीं'।
पाकिस्तान में 2025 में जबरन गुमशुदगी के 273 नए मामले दर्ज; एक भी दोषसिद्धि नहीं।
नई GSP+ व्यवस्था 1 जनवरी 2027 से लागू; अनुपालन समझौतों की संख्या 27 से 32 होगी।
सुविधा समाप्त होने पर कपड़ा उत्पादों पर 9-12% अतिरिक्त शुल्क लगने की आशंका।

यूरोपीय संघ (EU) ने पाकिस्तान को मानवाधिकार उल्लंघनों के मामले में कड़ी चेतावनी जारी की है। जबरन गुमशुदगी, राजनीतिक दमन और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के हनन को लेकर यूरोपीय संसद और EU प्रतिनिधिमंडल ने इस्लामाबाद को साफ कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर महज हस्ताक्षर करने और कागजी कानून बनाने से जीएसपी प्लस (जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज प्लस) के तहत मिलने वाली विशेष व्यापारिक छूट सुरक्षित नहीं रहेगी। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान को 2027 से लागू होने वाले नए और अधिक सख्त GSP+ नियमों का सामना करना है।

यूरोपीय संसद में उठे सवाल

सितंबर 2026 की शुरुआत में स्पेन की यूरोपीय सांसद सैंड्रा गोमेज लोपेज ने यूरोपीय संसद की मानवाधिकार उपसमिति में अहम सवाल खड़ा किया। उन्होंने पूछा कि यदि पाकिस्तान की प्रतिबद्धताओं के साथ कोई समय सीमा, मापने योग्य लक्ष्य या जवाबदेही तंत्र तय नहीं है तो ऐसे वादों की कोई सार्थकता नहीं है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब यूरोपीय संसद में पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर सवाल उठे हों, लेकिन इस बार भाषा अभूतपूर्व रूप से सख्त रही।

EU राजदूत की स्पष्ट चेतावनी

लोपेज के बयान के दो दिन बाद, पाकिस्तान में यूरोपीय संघ के राजदूत रायमुंडास कारोब्लिस ने कहा कि पाकिस्तान एक 'बेहद महत्वपूर्ण मोड़' पर खड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि ठोस और सत्यापित सुधारों के बिना GSP+ का भविष्य 'बिल्कुल भी सुनिश्चित नहीं' है। कारोब्लिस के यह शब्द इसलिए भी वज़नदार हैं क्योंकि पाकिस्तान इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभार्थी देश है।

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर संभावित असर

पाकिस्तान को 2014 से GSP+ का लाभ मिल रहा है। 2024 में उसके लगभग 7.5 अरब यूरो मूल्य के निर्यात इस योजना के तहत पात्र थे, जबकि 7.1 अरब यूरो से अधिक के निर्यात ने वास्तव में इस सुविधा का उपयोग किया — यह करीब 95 प्रतिशत उपयोग दर है। यूरोपीय आयोग के आँकड़ों के अनुसार, इससे पाकिस्तान ने उस वर्ष लगभग 73.2 करोड़ यूरो के शुल्क (टैरिफ) की बचत की।

पाकिस्तान के EU को होने वाले निर्यात में कपड़ा और परिधान क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 70 से 76 प्रतिशत है। यदि यह व्यापारिक सुविधा समाप्त होती है, तो कथित तौर पर कुछ कपड़ा उत्पादों पर 9 से 12 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लग सकता है — जो पाकिस्तान के पहले से दबाव में चल रहे निर्यात क्षेत्र के लिए गंभीर झटका होगा।

यूरोपीय आयोग की रिपोर्ट में गंभीर निष्कर्ष

यूरोपीय आयोग की 2023-2025 अवधि को कवर करने वाली ताज़ा रिपोर्ट में कई चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पीछे गया है, जिनमें जबरन गुमशुदगी, न्यायेतर हत्याएँ, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध, पत्रकारों पर दबाव, अल्पसंख्यक अधिकारों का हनन, न्यायपालिका की स्वतंत्रता में कमी और जबरन मजदूरी जैसी गंभीर समस्याएँ शामिल हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जबरन गुमशुदगी के मामलों में अब तक किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया गया है। पाकिस्तान के स्वयं के जाँच आयोग ने 2025 में 273 नए मामले दर्ज किए हैं। आलोचकों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।

आगे क्या होगा

EU की नई GSP+ व्यवस्था 1 जनवरी 2027 से लागू होगी, जिसके तहत लाभार्थी देशों को जिन अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पालन करना होगा, उनकी संख्या 27 से बढ़ाकर 32 कर दी जाएगी। पाकिस्तान को फिलहाल 2028 के अंत तक अपनी वर्तमान स्थिति बनाए रखने की अनुमति मिलेगी, लेकिन इसके बाद उसे नए और अधिक कड़े मानकों के तहत दोबारा आवेदन करना होगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस्लामाबाद आने वाले महीनों में कोई ठोस सुधार कदम उठाता है या फिर अरबों यूरो की व्यापारिक छूट खोने का जोखिम मोल लेता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाता है कि इस्लामाबाद ने GSP+ की शर्तों को गंभीरता से कभी नहीं लिया। 2027 के सख्त नियमों की छाया में, बिना ठोस सुधारों के पाकिस्तान अरबों यूरो की व्यापारिक छूट खोने के कगार पर पहुँच सकता है।
RashtraPress
12 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान को EU की GSP+ सुविधा से क्या लाभ मिलता है?
GSP+ के तहत पाकिस्तान के निर्यात को यूरोपीय बाजार में शुल्क-मुक्त या रियायती दरों पर प्रवेश मिलता है। 2024 में इससे पाकिस्तान ने लगभग 73.2 करोड़ यूरो की टैरिफ बचत की और 7.1 अरब यूरो से अधिक का निर्यात इस सुविधा का उपयोग कर रहा था।
EU ने पाकिस्तान को मानवाधिकार उल्लंघन पर क्यों चेतावनी दी?
यूरोपीय आयोग की 2023-2025 रिपोर्ट में पाकिस्तान में जबरन गुमशुदगी, न्यायेतर हत्याएँ, पत्रकारों पर दबाव, अल्पसंख्यक अधिकारों का हनन और जबरन मजदूरी जैसी गंभीर समस्याएँ सामने आई हैं। जबरन गुमशुदगी के किसी भी मामले में दोषसिद्धि नहीं होना EU के लिए विशेष चिंता का विषय है।
GSP+ सुविधा समाप्त होने पर पाकिस्तान पर क्या असर पड़ेगा?
पाकिस्तान के EU निर्यात में कपड़ा क्षेत्र की 70-76% हिस्सेदारी है। सुविधा समाप्त होने पर कपड़ा उत्पादों पर 9-12% अतिरिक्त शुल्क लग सकता है, जिससे पाकिस्तानी निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता गंभीर रूप से प्रभावित होगी।
नई GSP+ व्यवस्था कब से लागू होगी और इसमें क्या बदलाव हैं?
नई व्यवस्था 1 जनवरी 2027 से लागू होगी। इसमें लाभार्थी देशों को जिन अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पालन करना होगा, उनकी संख्या 27 से बढ़ाकर 32 कर दी गई है। पाकिस्तान को 2028 के अंत तक मौजूदा दर्जा मिलेगा, उसके बाद नए सख्त मानकों पर दोबारा आवेदन करना होगा।
पाकिस्तान में जबरन गुमशुदगी की स्थिति क्या है?
पाकिस्तान के स्वयं के जाँच आयोग ने 2025 में 273 नए जबरन गुमशुदगी के मामले दर्ज किए हैं, लेकिन अब तक एक भी दोषसिद्धि नहीं हुई है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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