भुवनेश्वर में फर्जी एनआईए अधिकारी गिरफ्तार: झूठी एफआईआर बनवाई, महिला का यौन शोषण किया
सारांश
मुख्य बातें
भुवनेश्वर की कमिश्नरेट पुलिस ने 22 मई 2026 को आशीष रेड्डी (45) को गिरफ्तार किया — यह व्यक्ति दिल्ली के लाजपत नगर का निवासी है और खुद को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का वरिष्ठ अधिकारी बताकर एक महिला की झूठी शिकायत तैयार कराने तथा जांच को प्रभावित करने का काम कर रहा था। NIA से सत्यापन के बाद स्पष्ट हुआ कि रेड्डी का एजेंसी से कोई संबंध नहीं है और उसने फर्जी पहचान पत्र के सहारे अपनी छद्म पहचान बनाए रखी थी।
मामले का पूरा घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, पीड़िता ने हाल ही में शिकायत दर्ज कराई थी कि अप्रैल 2026 में पुरी-कोणार्क रोड के पास एक वाहन में अज्ञात लोगों ने उसका अपहरण कर यौन उत्पीड़न किया। यह शिकायत पहले इंफोसिटी थाने में जमा की गई, जिसे बाद में खारवेल नगर थाने को स्थानांतरित किया गया।
जांच में सामने आया कि आरोपी रेड्डी पीड़िता का परिचित था और उसने 'मदद' का भरोसा दिलाकर उससे संपर्क बनाया। इसके बाद उसने खुद को NIA का वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए जांच अधिकारियों पर दबाव डाला और शिकायत की पूरी पटकथा तैयार कराने में अहम भूमिका निभाई।
पीड़िता का खुलासा और झूठी एफआईआर
आगे की पूछताछ में पीड़िता ने स्वयं स्वीकार किया कि अपहरण और यौन उत्पीड़न के आरोप झूठे थे। उसने बताया कि यह शिकायत एक व्यक्तिगत विवाद के बाद आरोपी के प्रभाव में आकर लिखवाई गई थी। पुलिस को यह भी पता चला कि रेड्डी ने महिला से मदद का वादा कर उसका यौन शोषण भी किया।
गौरतलब है कि झूठी एफआईआर दर्ज कराना और जांच एजेंसी की फर्जी पहचान का उपयोग — दोनों अलग-अलग गंभीर अपराध हैं, जो इस मामले को सामान्य धोखाधड़ी से कहीं अधिक जटिल बनाते हैं।
बरामदगी और दर्ज धाराएँ
पुलिस ने आरोपी के पास से निम्नलिखित सामग्री बरामद की:
एक फर्जी NIA पहचान पत्र, NIA लोगो वाली टी-शर्ट, एक वाहन, मोबाइल फोन और एक हथियार। रेड्डी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस की आगे की जांच
कमिश्नरेट पुलिस ने बताया कि आरोपी के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड और अन्य मामलों में संभावित संलिप्तता की जांच जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय जांच एजेंसियों के नाम पर ठगी और फर्जी पहचान के मामले देशभर में चिंता का विषय बने हुए हैं। जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि रेड्डी ने इसी तरह की फर्जी पहचान का उपयोग अन्य मामलों में भी किया या नहीं।