1 अगस्त 2026
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एफसीआरए संशोधन बिल अगले हफ्ते लोकसभा में पेश होने की संभावना, विपक्ष बोला — एनजीओ का काम ठप होगा

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एफसीआरए संशोधन बिल अगले हफ्ते लोकसभा में पेश होने की संभावना, विपक्ष बोला — एनजीओ का काम ठप होगा

सारांश

केंद्र सरकार अगले हफ्ते लोकसभा में एफसीआरए संशोधन बिल पेश करने की तैयारी में है। विपक्ष एकजुट होकर इसका विरोध कर रहा है — CPI, CPI(M) और NCP-SP का आरोप है कि यह बिल एनजीओ और अल्पसंख्यक समुदायों के धर्मार्थ कार्यों को निशाना बनाता है।

मुख्य बातें

सूत्रों के अनुसार एफसीआरए संशोधन बिल अगले हफ्ते लोकसभा में मानसून सत्र के दौरान पेश होने की संभावना है।
CPI के राष्ट्रीय महासचिव डी.
राजा ने कहा कि बिल से एनजीओ और सिविल सोसाइटी संगठनों का काम ठप हो जाएगा।
शिवदासन ने सभी विपक्षी दलों को एकजुट कर बिल के खिलाफ मोर्चा खोलने की बात कही।
NCP-SP प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि बिल ईसाई और मुस्लिम समुदायों की धर्मार्थ गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए लाया जा रहा है।
YSRCP सांसद गोला बाबू राव ने संतुलित रुख अपनाते हुए वैध विदेशी फंडिंग का स्वागत किया, लेकिन दुरुपयोग जाँच के लिए केंद्रीय एजेंसी की वकालत की।

नई दिल्ली में 1 अगस्त 2026 को विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार की उस योजना पर कड़ा एतराज जताया, जिसके तहत संसद के चल रहे मानसून सत्र में अगले हफ्ते 'विदेशी चंदा (विनियमन) अधिनियम संशोधन विधेयक' — जिसे एफसीआरए बिल कहा जा रहा है — लोकसभा में पेश किए जाने की संभावना है। सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। विपक्ष का आरोप है कि यह विधेयक देशभर के एनजीओ और सिविल सोसाइटी संगठनों के कामकाज को बुरी तरह प्रभावित करेगा।

विपक्ष की मुख्य आपत्तियाँ

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के राष्ट्रीय महासचिव डी. राजा ने कहा, 'कई एनजीओ और सिविल सोसाइटी संगठनों ने गंभीर चिंता जताई है कि उनके काम पर असर पड़ेगा और उनका काम ठप हो जाएगा। सरकार यही करने की कोशिश कर रही है।' उन्होंने यह भी कहा कि बिल का पूरा मसौदा सामने आने के बाद ही आगे की प्रतिक्रिया दी जाएगी।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] के सांसद वी. शिवदासन ने आरोप लगाया कि यह बिल उन पुराने और स्थापित एनजीओ को निशाना बना रहा है जो आम लोगों के हितों के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'वे सिर्फ आरएसएस के हितों की रक्षा करने की कोशिश कर रहे हैं। आरएसएस के हजारों संगठन अलग-अलग तरीकों से करोड़ों रुपए पा रहे हैं, लेकिन सरकार उन सभी अन्य संगठनों को नियंत्रित करना चाहती है जो उनकी जनविरोधी नीतियों के खिलाफ खड़े हैं।' शिवदासन ने यह भी कहा कि CPI(M) इस बिल के विरोध में सभी विपक्षी दलों को एकजुट करने की पहल करेगी।

अल्पसंख्यक समुदायों पर असर की आशंका

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) [NCP-SP] की राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि इस विधेयक का असल मकसद देश में ईसाई और मुस्लिम समुदायों द्वारा संचालित धर्मार्थ गतिविधियों को नियंत्रित करना है। उन्होंने कहा, 'हम बिल के खिलाफ हैं, क्योंकि यह पैसा देश के विकास में — जिसमें शिक्षा भी शामिल है — खर्च हो रहा है। अगर मुस्लिम समुदाय के लोगों को बच्चों की शिक्षा के लिए विदेश से धन मिलता है, तो सरकार को उस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए।'

एक सांसद की संतुलित राय

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के सांसद गोला बाबू राव ने कुछ हद तक संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वैध विदेशी फंडिंग में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए, लेकिन इसके दुरुपयोग की जाँच के लिए एक केंद्रीय एजेंसी की व्यवस्था उपयोगी हो सकती है। उन्होंने कहा, 'असली उद्देश्यों के लिए मिलने वाले फंड का स्वागत किया जाना चाहिए।' यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष का एक बड़ा हिस्सा बिल को पूरी तरह खारिज कर रहा है।

पृष्ठभूमि और आगे की राह

गौरतलब है कि एफसीआरए के तहत विदेशी अनुदान प्राप्त करने वाले संगठनों के पंजीकरण और अनुपालन के नियम पहले भी कई बार कड़े किए जा चुके हैं। 2010 और 2020 में हुए संशोधनों के बाद हज़ारों एनजीओ का पंजीकरण रद्द हो चुका है। आलोचकों का कहना है कि नया संशोधन इसी कड़ी में अगला कदम है। सरकार की ओर से अभी तक विधेयक के मसौदे का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। अगले हफ्ते लोकसभा में इसके पेश होने पर संसद में तीखी बहस की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि नए प्रावधान किस हद तक वैध नागरिक समाज गतिविधियों को प्रभावित करेंगे और क्या सरकार पारदर्शी जवाबदेही तंत्र देगी। बिना मसौदे के सार्वजनिक हुए बहस अधूरी है, और संसद में इसे बिना व्यापक परामर्श के पारित करने की कोशिश लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करती है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एफसीआरए संशोधन बिल 2026 क्या है?
यह 'विदेशी चंदा (विनियमन) अधिनियम' में प्रस्तावित संशोधन है, जिसे केंद्र सरकार मानसून सत्र में लोकसभा में पेश करने की तैयारी में है। यह बिल विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले एनजीओ और सिविल सोसाइटी संगठनों के नियमन से जुड़ा है।
विपक्ष एफसीआरए बिल का विरोध क्यों कर रहा है?
विपक्षी दलों का कहना है कि यह बिल देश में काम कर रहे एनजीओ और सिविल सोसाइटी संगठनों के कामकाज को ठप कर देगा। CPI(M) और NCP-SP जैसे दलों ने यह भी आरोप लगाया है कि इसका निशाना ईसाई और मुस्लिम समुदायों की धर्मार्थ गतिविधियाँ हैं।
एफसीआरए बिल से एनजीओ पर क्या असर पड़ेगा?
विपक्ष और कई सिविल सोसाइटी संगठनों की आशंका है कि नए प्रावधान विदेशी अनुदान प्राप्त करने की प्रक्रिया को और कठिन बना देंगे, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कार्यों में लगे संगठनों का काम प्रभावित होगा। हालाँकि बिल का पूरा मसौदा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।
YSRCP का एफसीआरए बिल पर क्या रुख है?
YSRCP सांसद गोला बाबू राव ने संतुलित रुख अपनाया — उन्होंने वैध विदेशी फंडिंग का समर्थन किया, लेकिन साथ ही कहा कि दुरुपयोग रोकने के लिए एक केंद्रीय एजेंसी की व्यवस्था होनी चाहिए।
एफसीआरए में पहले कब-कब संशोधन हो चुके हैं?
विदेशी चंदा (विनियमन) अधिनियम में 2010 और 2020 में प्रमुख संशोधन किए जा चुके हैं। 2020 के संशोधन के बाद हज़ारों एनजीओ का पंजीकरण रद्द हो गया था। आलोचकों का कहना है कि नया बिल उसी सिलसिले की अगली कड़ी है।
राष्ट्र प्रेस
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