एफसीआरए संशोधन बिल अगले हफ्ते लोकसभा में पेश होने की संभावना, विपक्ष बोला — एनजीओ का काम ठप होगा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 1 अगस्त 2026 को विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार की उस योजना पर कड़ा एतराज जताया, जिसके तहत संसद के चल रहे मानसून सत्र में अगले हफ्ते 'विदेशी चंदा (विनियमन) अधिनियम संशोधन विधेयक' — जिसे एफसीआरए बिल कहा जा रहा है — लोकसभा में पेश किए जाने की संभावना है। सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। विपक्ष का आरोप है कि यह विधेयक देशभर के एनजीओ और सिविल सोसाइटी संगठनों के कामकाज को बुरी तरह प्रभावित करेगा।
विपक्ष की मुख्य आपत्तियाँ
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के राष्ट्रीय महासचिव डी. राजा ने कहा, 'कई एनजीओ और सिविल सोसाइटी संगठनों ने गंभीर चिंता जताई है कि उनके काम पर असर पड़ेगा और उनका काम ठप हो जाएगा। सरकार यही करने की कोशिश कर रही है।' उन्होंने यह भी कहा कि बिल का पूरा मसौदा सामने आने के बाद ही आगे की प्रतिक्रिया दी जाएगी।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] के सांसद वी. शिवदासन ने आरोप लगाया कि यह बिल उन पुराने और स्थापित एनजीओ को निशाना बना रहा है जो आम लोगों के हितों के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'वे सिर्फ आरएसएस के हितों की रक्षा करने की कोशिश कर रहे हैं। आरएसएस के हजारों संगठन अलग-अलग तरीकों से करोड़ों रुपए पा रहे हैं, लेकिन सरकार उन सभी अन्य संगठनों को नियंत्रित करना चाहती है जो उनकी जनविरोधी नीतियों के खिलाफ खड़े हैं।' शिवदासन ने यह भी कहा कि CPI(M) इस बिल के विरोध में सभी विपक्षी दलों को एकजुट करने की पहल करेगी।
अल्पसंख्यक समुदायों पर असर की आशंका
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) [NCP-SP] की राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि इस विधेयक का असल मकसद देश में ईसाई और मुस्लिम समुदायों द्वारा संचालित धर्मार्थ गतिविधियों को नियंत्रित करना है। उन्होंने कहा, 'हम बिल के खिलाफ हैं, क्योंकि यह पैसा देश के विकास में — जिसमें शिक्षा भी शामिल है — खर्च हो रहा है। अगर मुस्लिम समुदाय के लोगों को बच्चों की शिक्षा के लिए विदेश से धन मिलता है, तो सरकार को उस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए।'
एक सांसद की संतुलित राय
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के सांसद गोला बाबू राव ने कुछ हद तक संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वैध विदेशी फंडिंग में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए, लेकिन इसके दुरुपयोग की जाँच के लिए एक केंद्रीय एजेंसी की व्यवस्था उपयोगी हो सकती है। उन्होंने कहा, 'असली उद्देश्यों के लिए मिलने वाले फंड का स्वागत किया जाना चाहिए।' यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष का एक बड़ा हिस्सा बिल को पूरी तरह खारिज कर रहा है।
पृष्ठभूमि और आगे की राह
गौरतलब है कि एफसीआरए के तहत विदेशी अनुदान प्राप्त करने वाले संगठनों के पंजीकरण और अनुपालन के नियम पहले भी कई बार कड़े किए जा चुके हैं। 2010 और 2020 में हुए संशोधनों के बाद हज़ारों एनजीओ का पंजीकरण रद्द हो चुका है। आलोचकों का कहना है कि नया संशोधन इसी कड़ी में अगला कदम है। सरकार की ओर से अभी तक विधेयक के मसौदे का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। अगले हफ्ते लोकसभा में इसके पेश होने पर संसद में तीखी बहस की संभावना है।