पूर्व सांसद मधु गौड़ याशकी ने युद्ध के संदर्भ में भारतीयों के हितों को लेकर उठाए सवाल
सारांश
Key Takeaways
- मधु गौड़ याशकी ने मोदी पर भारतीय हितों की रक्षा में विफलता का आरोप लगाया।
- उन्होंने सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।
- यह मुद्दा 140 करोड़ भारतीयों के हितों से जुड़ा है।
- सर्वदलीय बैठकें अतीत में महत्वपूर्ण रही हैं।
- लोकतंत्र के लिए एक मजबूत विपक्ष आवश्यक है।
हैदराबाद, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री मोदी के पश्चिम एशिया युद्ध पर दिए गए बयान पर कांग्रेस के पूर्व सांसद मधु गौड़ याशकी ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पश्चिम एशियाई देशों में चल रहे युद्ध के दौरान भारतीय हितों की रक्षा करने में पूरी तरह से असफल रहे हैं। विपक्ष के नेता ने भारत और विदेशों में रह रहे भारतीयों पर युद्ध के संभावित प्रभाव को लेकर गहरी चिंता प्रकट की है। यहां तक कि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार ने ईरानी राष्ट्रपति की मृत्यु की भी निंदा नहीं की है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि प्रधानमन्त्री मोदी किस प्रकार की कूटनीति का प्रदर्शन कर रहे हैं?
उन्होंने आगे कहा कि जब देश युद्ध की चपेट में था और कांग्रेस विपक्ष में थी, तब सोनिया गांधी तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ खड़ी रहीं। राष्ट्रीय हित की बात हो, तो सभी एकजुट होते हैं। यहां तक कि 26/11 के हमलों के समय भी नरेंद्र मोदी राजनीति खेलने में लगे रहे। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रधानमंत्री ने सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाई। यह केवल भाजपा का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह 140 करोड़ भारतीयों के हितों से जुड़ा विषय है।
कांग्रेस नेता ने सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री को तुरंत एक सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए ताकि संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह की स्थिति पर चर्चा की जा सके। केवल अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों को बुलाना पर्याप्त नहीं है। अतीत में, ऐसी स्थितियों में तत्कालीन प्रधानमंत्रियों ने सर्वदलीय बैठकें बुलाई हैं और विपक्ष से भी सलाह ली है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के लिए एक मजबूत विपक्ष आवश्यक है, और प्रधानमंत्री मोदी जनता को साथ लेकर चलने में असफल रहे हैं। उन्होंने प्रमुख विपक्षी दल से भी संपर्क नहीं किया है। भारत और भारतीयों के हितों की रक्षा के मामले में उन्होंने कभी भी देश को एकजुट नहीं किया है।