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ईंधन मूल्यवृद्धि सरकार की नाकामी का नतीजा: महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल का आरोप

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ईंधन मूल्यवृद्धि सरकार की नाकामी का नतीजा: महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल का आरोप

सारांश

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने ईंधन संकट को सरकार की नीतिगत विफलता करार दिया और प्याज किसानों को ₹3,000 प्रति क्विंटल न मिलने पर आंदोलन की चेतावनी दी — यह महाराष्ट्र में विपक्ष की बढ़ती आक्रामकता का संकेत है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने 28 मई को ईंधन मूल्यवृद्धि के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
सपकाल के अनुसार पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी की कीमतों में वृद्धि ठोस नीति के अभाव का नतीजा है।
प्याज किसान ₹3,000 प्रति क्विंटल की माँग कर रहे हैं, जबकि सरकार ₹1,500 प्रति क्विंटल पर अड़ी है।
PM मोदी ने 2014 में नासिक दौरे पर ₹2,400 प्रति क्विंटल का आश्वासन दिया था — सपकाल ने इसे याद दिलाया।
कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि माँगें न मानी गईं तो नए सिरे से विरोध प्रदर्शन शुरू होंगे।
सपकाल ने BJP पर बकरीद के आसपास सांप्रदायिक माहौल बनाने का आरोप लगाया, जिससे लाखों पशुपालक किसानों को नुकसान हुआ।

महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने गुरुवार, 28 मई को मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी की कीमतों में हुई भारी वृद्धि तथा ईंधन की किल्लत पूरी तरह केंद्र सरकार की नीतिगत विफलताओं का परिणाम है। उनके अनुसार, ठोस ऊर्जा नीति के अभाव में आम जनता और छोटे व्यवसायों को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।

ईंधन संकट पर सपकाल के आरोप

सपकाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'आत्मनिर्भरता' के वादे की आड़ में अर्थव्यवस्था की घोर उपेक्षा की। उनके शब्दों में, 'ठोस नीति के अभाव में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी गैस की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। ईंधन की कमी के स्पष्ट संकेत होने के बावजूद प्रधानमंत्री पाँच राज्यों में चुनाव प्रचार में व्यस्त रहे और अब देश की जनता को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।'

उन्होंने यह भी दावा किया कि 2014 में सत्ता में आने के बाद से मोदी सरकार ने लगातार ईंधन की कीमतें बढ़ाई हैं, जिससे सरकारी और निजी तेल कंपनियों दोनों ने भारी मुनाफा कमाया। सपकाल के अनुसार, यदि सरकार ने तेल खरीद के लिए आरक्षित निधि बनाई होती तो इस संकट से बचा जा सकता था, 'लेकिन इसके बजाय कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दी गई।'

आम जनता और व्यवसायों पर असर

कांग्रेस नेता ने कहा कि ईंधन और गैस की किल्लत ने होटलों, रेस्तराँ, छोटे व्यवसायों और घरों में खाना पकाने को बुरी तरह प्रभावित किया है। उनका कहना था कि सरकार की नीतियों के कारण अर्थव्यवस्था की नींव हिल गई है।

प्याज किसानों का मुद्दा

प्याज की कीमतों के सवाल पर सपकाल ने बताया कि महाराष्ट्र मंत्रिमंडल के लगभग आधे सदस्यों ने नई दिल्ली में केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात की, लेकिन महाराष्ट्र को बैठक से कोई ठोस लाभ नहीं मिला। उन्होंने कहा, 'सरकार ₹1,500 प्रति क्विंटल की दर से प्याज खरीदने की बात कर रही है, लेकिन किसान ₹3,000 प्रति क्विंटल की माँग कर रहे हैं, साथ ही नेफेड (NAFED) के माध्यम से पूरे स्टॉक की खरीद की माँग भी है।'

सपकाल ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में नासिक दौरे के दौरान किसानों को ₹2,400 प्रति क्विंटल का आश्वासन दिया था। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी निशाना साधते हुए कहा, 'उस समय भी इसी तरह के वादे किए गए थे, लेकिन अब केवल ₹1,500 प्रति क्विंटल की बात हो रही है — यह किसानों के साथ धोखा है।' उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की माँगें नहीं मानी गईं तो कांग्रेस नए सिरे से विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी।

सांप्रदायिक सद्भाव पर आरोप

सपकाल ने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) जानबूझकर हर त्योहार और उत्सव में हिंदू-मुस्लिम मुद्दों को उठाती है ताकि सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ा जा सके। उनके अनुसार, बकरीद के आसपास बनाए गए माहौल से लाखों पशुपालक किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने इसे भाजपा के कथित राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बताया।

आगे की राह

कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि ईंधन मूल्यवृद्धि और प्याज किसानों की माँगों पर सरकार की ओर से संतोषजनक कदम न उठाए जाने पर पार्टी आंदोलन तेज करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में विपक्ष सरकार को किसान और महँगाई के मुद्दों पर लगातार घेर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

400 से ₹1,500 प्रति क्विंटल तक का सफर एक दशक में हुआ है, और यह महाराष्ट्र के किसान-बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए वास्तविक राजनीतिक जोखिम है। गौरतलब है कि NAFED के माध्यम से खरीद की माँग पहले भी उठती रही है और अक्सर आधी-अधूरी पूरी होती है। असली परीक्षा यह है कि क्या विपक्ष का यह दबाव किसानों को ठोस राहत दिला पाता है या महज चुनावी बयानबाजी बनकर रह जाता है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हर्षवर्धन सपकाल ने ईंधन मूल्यवृद्धि पर क्या कहा?
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी की कीमतों में वृद्धि ठोस नीति के अभाव और सरकार की विफलता का परिणाम है। उनके अनुसार, ईंधन संकट के संकेत स्पष्ट होने के बावजूद प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार में व्यस्त रहे।
महाराष्ट्र में प्याज किसानों की क्या माँग है?
किसान ₹3,000 प्रति क्विंटल की दर से NAFED के माध्यम से पूरे स्टॉक की खरीद की माँग कर रहे हैं, जबकि सरकार ₹1,500 प्रति क्विंटल की पेशकश कर रही है। सपकाल ने याद दिलाया कि 2014 में PM मोदी ने नासिक में ₹2,400 प्रति क्विंटल का आश्वासन दिया था।
कांग्रेस ने किसानों के मुद्दे पर क्या चेतावनी दी है?
सपकाल ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार किसानों की माँगें नहीं मानती तो कांग्रेस नए सिरे से विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी वादाखिलाफी का आरोप लगाया।
सपकाल ने BJP पर सांप्रदायिक माहौल बनाने का आरोप क्यों लगाया?
सपकाल के अनुसार, BJP जानबूझकर हर त्योहार में हिंदू-मुस्लिम मुद्दे उठाती है। उन्होंने कहा कि बकरीद के आसपास बनाए गए माहौल से लाखों पशुपालक किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।
ईंधन संकट का आम जनता और व्यवसायों पर क्या असर पड़ा है?
सपकाल के अनुसार, ईंधन और गैस की किल्लत ने होटलों, रेस्तराँ, छोटे व्यवसायों और घरों में खाना पकाने को बुरी तरह प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण अर्थव्यवस्था चरमरा गई है।
राष्ट्र प्रेस
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