रक्षा अलंकरण समारोह 2026: राष्ट्रपति मुर्मु ने वीर चक्र, कीर्ति चक्र व शौर्य चक्र से नवाज़ा दर्जनों जाँबाज़ों को
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 9 जून 2026 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह 2026 (प्रथम चरण) में सशस्त्र बलों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के कर्मियों को देश के प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कार प्रदान किए। इस ऐतिहासिक समारोह में वीर चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र सहित कई पुरस्कार उन जवानों को दिए गए जिन्होंने जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर भारत, भारत-म्यांमार सीमा और समुद्री-अंतरिक्ष अभियानों में असाधारण साहस का प्रदर्शन किया।
समारोह में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उपस्थित रहे। समारोह का आयोजन राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति देश की प्रतिबद्धता और सैनिकों के अदम्य साहस को सम्मान देने की परंपरा के अनुरूप किया गया।
शौर्य चक्र: अदम्य साहस के प्रतीक
मेजर आशीष कुमार को नवंबर 2024 में अनंतनाग में चलाए गए लंबे आतंकवाद-विरोधी अभियान का नेतृत्व करने के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया, जिसमें एक ए++ श्रेणी के आतंकवादी सहित दो आतंकवादी मारे गए।
कांस्टेबल संजय तिवारी और कांस्टेबल फेदा हुसैन डार को श्रीनगर के खानयार इलाके में एक विदेशी आतंकवादी को मार गिराने के लिए सम्मानित किया गया। सहायक कमांडेंट मोहम्मद शफीक, लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज पराशर, राम गोयल और कांस्टेबल सद्दाम हुसैन को बांदीपोरा के चुंटावाड़ी ऑपरेशन में दुश्मन की भीषण गोलीबारी के बीच साहस दिखाने के लिए पुरस्कृत किया गया।
सहायक कमांडेंट विपिन विल्सन ने मणिपुर के जिरीबाम जिले में एक बड़े आतंकवादी हमले का दृढ़ता से मुकाबला किया और 10 भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों को मार गिराने में सहायता की — इस शौर्य के लिए उन्हें शौर्य चक्र प्रदान किया गया। राइफलमैन भोज राम साहू को भारत-म्यांमार सीमा पर घुसपैठ विरोधी अभियान में निडरता से कार्रवाई करने के लिए सम्मानित किया गया।
विंग कमांडर अभिमन्यु सिंह को गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद हवा में कैनोपी के अचानक विफल होने के बाद लड़ाकू विमान को सुरक्षित वापस लाने के लिए शौर्य चक्र दिया गया — यह वायु सेना के अनुशासन और साहस का विरल उदाहरण है।
इसके अतिरिक्त, मेजर भार्गव कलिता ने एक ए++ श्रेणी के कुख्यात आतंकवादी को मार गिराया। मेजर लीशंगथेम दीपक सिंह ने एक अपहृत नागरिक को सकुशल बचाया। मेजर अंशुल बाल्टू ने असम में भीषण मुठभेड़ में असाधारण साहस दिखाया और मेजर शिवकांत यादव ने शोपियां में उच्च जोखिम वाले अभियान में एक आतंकवादी को मार गिराया।
सूबेदार पी एच मोसेस, मेजर विवेक, राइफलमैन मंगलेम संग वैफेई, लेफ्टिनेंट कर्नल घटागे आदित्य श्रीकुमार, कैप्टन योगेंद्र सिंह ठाकुर, सूबेदार शमशेर सिंह और नायक राहुल सिंह को भी जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में असाधारण नेतृत्व के लिए शौर्य चक्र प्रदान किए गए।
राइफलमैन धुरबा ज्योति दत्ता को कई गोलियाँ लगने के बावजूद घात लगाकर हमला किए गए सैन्य वाहन को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर साथी सैनिकों की जान बचाने के लिए यह पुरस्कार मिला।
लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना के और लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ए को नाविक सागर परिक्रमा-दो के दौरान आईएनएसवी तारिणी पर सवार होकर की गई ऐतिहासिक समुद्री परिक्रमा में उल्लेखनीय धैर्य और साहस के लिए सम्मानित किया गया।
वीर चक्र: प्रमुख सैन्य अभियानों में वीरता
कर्नल कोशांक लांबा को आतंकवादी ढाँचों को नष्ट करने में सटीक कार्रवाई का सफल नेतृत्व करने के लिए वीर चक्र प्रदान किया गया। वायु सेना के ग्रुप कैप्टन रणजीत सिंह सिद्धू, ग्रुप कैप्टन मनीष अरोरा, ग्रुप कैप्टन अनिमेष पटनी, ग्रुप कैप्टन कुणाल कालरा, ग्रुप कैप्टन जॉय चंद्र, लेफ्टिनेंट कर्नल सुशील बिष्ट, विंग कमांडर सार्थक कुमार, स्क्वाड्रन लीडर सिद्धांत सिंह, स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक और स्क्वाड्रन लीडर आरशवीर सिंह ठाकुर को सटीक हमलों, वायु रक्षा अभियानों और रणनीतिक शत्रु ठिकानों को नष्ट करने में उनकी भूमिका के लिए वीर चक्र दिया गया।
नायब सूबेदार सतीश कुमार को नियंत्रण रेखा के साथ जवाबी बमबारी अभियानों में अनुकरणीय नेतृत्व और भारी शत्रु गोलाबारी के बीच सामरिक वर्चस्व सुनिश्चित करने के लिए सम्मानित किया गया।
कीर्ति चक्र: द्वितीय सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता सम्मान
भारत के द्वितीय सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार कीर्ति चक्र से कई कर्मियों को नवाज़ा गया। लांस नायक मीनाक्षी सुंदरम ए को कुलगाम में गोलीबारी के दौरान गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद एक आतंकवादी को मार गिराने के लिए सम्मानित किया गया। नायब सूबेदार डोलेश्वर सुब्बा को किश्तवाड़ में भीषण मुठभेड़ में दो आतंकवादियों को मार गिराने के लिए यह पुरस्कार मिला।
मेजर अर्शदीप सिंह को आतंकवाद विरोधी अभियान में आगे बढ़कर नेतृत्व करने और कई सशस्त्र आतंकवादियों को मार गिराने के लिए सम्मानित किया गया। भारत के चुनिंदा गगनयात्रियों में से एक ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर को भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम में योगदान और उच्च जोखिम वाले अंतरिक्ष अभियानों को अंजाम देने की तत्परता के लिए कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया।
कैप्टन लालरिनावमा सैलो को श्रीनगर जिले में विशेष बलों के अभियान के दौरान तीन कट्टर आतंकवादियों को मार गिराने के लिए कीर्ति चक्र प्रदान किया गया।
मरणोपरांत पुरस्कार: सर्वोच्च बलिदान को राष्ट्र की श्रद्धांजलि
मरणोपरांत वीरता पुरस्कारों ने उन जवानों के सर्वोच्च बलिदान को राष्ट्र की भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की जो देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए। एल/डीएफआर बलदेव चंद को घातक चोटों के बावजूद आतंकवादियों से आमने-सामने की लड़ाई में शौर्य चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया।
सिपाही जंजल प्रवीण प्रभाकर को दो आतंकवादियों को मार गिराने के लिए कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को उत्तरी सिक्किम में उफनती नदी से एक साथी सैनिक को बचाते हुए प्राण न्योछावर करने के लिए कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) दिया गया।
बीएसएफ के सब-इंस्पेक्टर मोहम्मद इम्तियाज और कांस्टेबल दीपक चिंगाखम को सीमा पार गोलाबारी के दौरान गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद लड़ते रहने के लिए वीर चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। राइफलमैन सुनील कुमार को हवाई खतरे को नाकाम करने और तत्पश्चात अपनी चोटों के कारण शहीद होने के लिए वीर चक्र (मरणोपरांत) प्रदान किया गया।
यह समारोह इस बात का प्रमाण है कि भारत की सुरक्षा केवल नीतियों और हथियारों पर नहीं, बल्कि उन असंख्य जवानों की निष्ठा और बलिदान पर टिकी है जो हर मोर्चे पर अडिग खड़े रहते हैं।