26 अक्टूबर 2026
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गणेश शंकर विद्यार्थी जयंती 2026: गडकरी, खट्टर, योगी समेत दर्जनों नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

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गणेश शंकर विद्यार्थी जयंती 2026: गडकरी, खट्टर, योगी समेत दर्जनों नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

सारांश

स्वतंत्रता सेनानी और 'प्रताप' के संस्थापक-संपादक गणेश शंकर विद्यार्थी की जयंती पर 26 अक्टूबर 2026 को देशभर के नेताओं ने एक्स पर श्रद्धांजलि दी। केंद्रीय मंत्रियों से लेकर तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों तक — सभी ने उनकी निर्भीक लेखनी और राष्ट्रसेवा को याद किया।

मुख्य बातें

स्वतंत्रता सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी की जयंती 26 अक्टूबर 2026 को मनाई गई।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर , नितिन गडकरी और वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने एक्स पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
उत्तर प्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ , मध्य प्रदेश के CM मोहन यादव और राजस्थान के CM भजनलाल शर्मा ने भी नमन किया।
UP के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बिहार के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भी श्रद्धांजलि दी।
विद्यार्थी हिंदी पत्रिका 'प्रताप' के संस्थापक-संपादक थे और 1931 में कानपुर दंगों में पीड़ितों की रक्षा करते हुए शहीद हुए थे।

स्वतंत्रता सेनानी और भारतीय पत्रकारिता के अग्रदूत गणेश शंकर विद्यार्थी की जयंती पर 26 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ राजनेताओं ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। नई दिल्ली से लेकर लखनऊ, भोपाल, जयपुर तक — देशभर के नेताओं ने उनकी निर्भीक पत्रकारिता और राष्ट्रसेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को नमन किया।

केंद्रीय मंत्रियों की श्रद्धांजलि

केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने एक्स पर लिखा, 'अपनी निर्भीक लेखनी एवं प्रखर विचारों से राष्ट्र चेतना को जागृत करने में अद्वितीय योगदान देने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी व पत्रकारिता जगत के पुरोधा गणेश शंकर विद्यार्थी की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन करता हूं। आपके ओजस्वी विचार व आदर्श जीवन सदैव युवाओं को राष्ट्र के नवनिर्माण और समाज की सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।'

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने विद्यार्थी को 'महान स्वतंत्रता सेनानी' बताते हुए विनम्र अभिवादन किया। केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री एवं उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (BJP) अध्यक्ष पंकज चौधरी ने एक्स पर कहा, 'देश के प्रति उनका समर्पण और अगाध प्रेम हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।'

मुख्यमंत्रियों के संदेश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, 'कलम को जनचेतना की आवाज और पत्रकारिता को राष्ट्रसेवा का माध्यम बनाने वाले महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि। सत्य के लिए निर्भीकता, अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और मानवता के लिए उनका सर्वोच्च बलिदान हमें सत्य एवं न्याय के पक्ष में दृढ़ता से खड़े रहने की प्रेरणा देता है।'

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विद्यार्थी के व्यक्तित्व को 'देशभक्ति, प्रखर चिंतन एवं कर्तव्यनिष्ठा की त्रिवेणी' बताते हुए उनके चरणों में नमन किया। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उन्हें 'कलम के अप्रतिम साधक, प्रखर वक्ता एवं निर्भीक पत्रकारिता के पुरोधा' एवं 'अमर हुतात्मा' संबोधित करते हुए एक्स पर श्रद्धांजलि दी।

अन्य नेताओं का नमन

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विद्यार्थी को 'स्वतंत्रता की अलख जगाने वाले निर्भीक पत्रकार' बताते हुए शत-शत नमन किया। बिहार के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध कलम को हथियार बनाने की उनकी भूमिका को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

गणेश शंकर विद्यार्थी: एक संक्षिप्त परिचय

गणेश शंकर विद्यार्थी का जन्म 26 अक्टूबर 1890 को हुआ था। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सक्रिय सेनानी और प्रसिद्ध हिंदी पत्रिका 'प्रताप' के संस्थापक-संपादक थे। उनकी लेखनी ने औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध जनचेतना जागृत करने में निर्णायक भूमिका निभाई। गौरतलब है कि उन्होंने 1931 में कानपुर के साम्प्रदायिक दंगों के दौरान पीड़ितों की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था — यही उनकी समाज के प्रति प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण है।

यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब देशभर में स्वतंत्र पत्रकारिता की भूमिका पर बहस जारी है। विद्यार्थी का जीवन आज भी पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए एक आदर्श के रूप में स्थापित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या उनकी विरासत केवल सालाना श्रद्धांजलि तक सीमित है? विद्यार्थी ने जिस निर्भीक पत्रकारिता को जीया और जिसके लिए जान दी, उस आदर्श को आज के संदर्भ में व्यवहार में उतारने की ज़रूरत है। उल्लेखनीय है कि श्रद्धांजलि देने वाले अधिकांश नेता उस सत्ता-प्रतिष्ठान का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसकी जवाबदेही तय करना विद्यार्थी की पत्रकारिता का मूल उद्देश्य था। यह विरोधाभास मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर अनदेखा रह जाता है।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गणेश शंकर विद्यार्थी कौन थे?
गणेश शंकर विद्यार्थी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख सेनानी और हिंदी पत्रकारिता के अग्रदूत थे, जिनका जन्म 26 अक्टूबर 1890 को हुआ था। वे प्रसिद्ध हिंदी पत्रिका 'प्रताप' के संस्थापक-संपादक थे और अपनी निर्भीक लेखनी से राष्ट्रीय चेतना जगाने के लिए जाने जाते हैं।
गणेश शंकर विद्यार्थी की मृत्यु कैसे हुई?
गणेश शंकर विद्यार्थी ने 1931 में कानपुर के साम्प्रदायिक दंगों के दौरान पीड़ितों की जान बचाने का प्रयास करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। उनका यह बलिदान उन्हें 'अमर हुतात्मा' का दर्जा दिलाता है।
26 अक्टूबर 2026 को किन नेताओं ने विद्यार्थी को श्रद्धांजलि दी?
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, नितिन गडकरी और पंकज चौधरी के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के CM मोहन यादव, राजस्थान के CM भजनलाल शर्मा, UP के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बिहार के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने एक्स पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
गणेश शंकर विद्यार्थी का पत्रकारिता में क्या योगदान था?
उन्होंने 'प्रताप' पत्रिका के माध्यम से हिंदी पत्रकारिता को जनचेतना और राष्ट्रसेवा का माध्यम बनाया। औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध उनकी निर्भीक और प्रखर लेखनी ने स्वाधीनता आंदोलन में जनजागरण का काम किया।
गणेश शंकर विद्यार्थी की जयंती क्यों मनाई जाती है?
उनकी जयंती 26 अक्टूबर को उनके जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाई जाती है, ताकि उनकी देशभक्ति, निर्भीक पत्रकारिता और सामाजिक समरसता के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुँचाया जा सके। यह अवसर पत्रकारिता और सामाजिक न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को याद करने का राष्ट्रीय अवसर है।
राष्ट्र प्रेस
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