क्या गौ माता को ठंड से बचाने के लिए स्पेशल इको-थर्मल कंबल तैयार किए जा रहे हैं?

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क्या गौ माता को ठंड से बचाने के लिए स्पेशल इको-थर्मल कंबल तैयार किए जा रहे हैं?

सारांश

उत्तर प्रदेश में गो-कल्याण योजना के तहत गोशालाओं में ठंड से बचाने के लिए इको-थर्मल कंबल बनाए जा रहे हैं। यह पहल न केवल गो माता की रक्षा कर रही है, बल्कि महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बना रही है। जानिए इस अनूठी योजना के बारे में।

मुख्य बातें

गो-कल्याण योजना अब नवाचार और महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित है।
मलावन गोशाला में इको-थर्मल कंबल बनाए जा रहे हैं।
महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।
यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है।
गो माता की सुरक्षा के लिए यह योजना महत्वपूर्ण है।

लखनऊ, 16 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी गो-कल्याण योजना अब केवल संरक्षण तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि नवाचार और महिला सशक्तिकरण का एक मजबूत मॉडल बनकर उभर रही है। एटा जनपद की मलावन गोशाला में शुरू हुई यह पहल प्रदेश में आत्मनिर्भर गोशालाओं की नई तस्वीर पेश कर रही है। यहां गौ माता को ठंड से बचाने के लिए फूस और टाट की बोरी से तैयार विशेष प्रकार के ‘इको-थर्मल कंबल’ बनाए जा रहे हैं।

ये कंबल न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि कम लागत में तैयार होकर गो संरक्षण को भी मजबूती प्रदान कर रहे हैं। इसके साथ ही गोशाला में बर्मी कम्पोस्ट और गोबर से ‘गो-कास्ट’ जैसे नवाचारी उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं, जिसका बाजार में जबरदस्त डिमांड है।

एटा के मुख्य विकास अधिकारी डॉ. नागेंद्र नारायण मिश्र ने इस मॉडल को गो-कल्याण, पुनर्चक्रण और ग्रामीण आजीविका का उत्कृष्ट संयोजन बताया। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी प्रेमरंजन सिंह के नेतृत्व में गोशाला को आय का बेहतर स्रोत बनाया जा रहा है। जो गोशालाएं पहले बोझ मानी जाती थीं, वे अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर इकाइयां बन रही हैं।

सीडीओ डॉ. नागेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि कार्ययोजना के तहत प्रशिक्षण देकर 30 सखी दीदियों को तैयार किया जा रहा है, जो गोबर से अगरबत्ती, धूपबत्ती, मोमेंटो और गमले जैसे उत्पाद बनाएंगी। इसके अलावा मलावन राष्ट्रीय राजमार्ग के पास एक स्थायी मार्केट प्लेस विकसित किया जाएगा, जहां गो आधारित उत्पादों की सीधी बिक्री होगी।

इस पहल का सबसे प्रभावशाली पक्ष यह है कि इससे स्वयं सहायता समूह की महिलाएं हर माह निश्चित आय अर्जित कर सकेंगी। महिलाओं ने बताया कि वे आगे भी गोशाला संचालन, स्वच्छता, पोषण प्रबंधन और उत्पाद निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाते हुए इसे आत्मनिर्भर गोशाला मॉडल के रूप में विकसित करती रहेंगी। सरकार की योजना से साफ है कि गोसेवा और रोजगार साथ-साथ चल सकते हैं। नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण के जरिए प्रदेश की गोशालाएं अब बोझ नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत कड़ी बनती जा रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह ग्रामीण समुदाय की आर्थिक स्थिति को भी सुधारने का कार्य कर रही है। महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का यह नया अवसर, समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इको-थर्मल कंबल क्या हैं?
इको-थर्मल कंबल फूस और टाट की बोरी से तैयार किए जाते हैं, जो गो माता को ठंड से बचाते हैं।
क्या इस पहल से महिलाओं को रोजगार मिलेगा?
हाँ, इस पहल के तहत महिलाएं गोबर से विभिन्न उत्पाद बनाकर आय अर्जित कर सकेंगी।
गो-कल्याण योजना का उद्देश्य क्या है?
इस योजना का उद्देश्य गो माता की सुरक्षा के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाना है।
क्या ये कंबल पर्यावरण के अनुकूल हैं?
जी हाँ, ये कंबल पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल हैं।
इस पहल से क्या लाभ होगा?
इस पहल से गोशालाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और ग्रामीण महिलाओं को स्थायी रोजगार मिलेगा।
राष्ट्र प्रेस
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