युद्ध का बदलता स्वरूप और भविष्य की रणनीति पर जनरल एमएम नरवणे के अहम विचार, वडोदरा में दिया संबोधन
सारांश
मुख्य बातें
सेवानिवृत्त थलसेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने 29 अगस्त को वडोदरा में एक नए को-वर्किंग स्पेस 'इंडिया एक्सेलेरेटर' के उद्घाटन समारोह में भाग लिया और पत्रकारों से बातचीत में युद्ध की बदलती प्रकृति, प्रेटोरियनवाद और भारत-चीन सीमा वार्ता पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भविष्य के युद्ध को पिछले युद्धों की रणनीति से नहीं लड़ा जा सकता।
युद्ध की बदलती प्रकृति और नई रणनीति
जनरल नरवणे ने कहा कि युद्ध का स्वरूप हमेशा बदलता रहा है और यदि भविष्य में किसी संघर्ष की स्थिति उत्पन्न होती है, तो भारत को अपनी रणनीति में आवश्यक परिवर्तन करने होंगे। उन्होंने कहा, 'हमें पिछले युद्ध की तरह आने वाले युद्ध को नहीं लड़ना होगा।' उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए कहा कि भविष्योन्मुखी रणनीति पर काम करने से ही सफलता मिलती है, जैसी उस अभियान के दौरान मिली थी।
प्रेटोरियनवाद पर नरवणे का पक्ष
सेवानिवृत्त जनरल ने प्रेटोरियनवाद (Theatrisation) के विषय पर भी विस्तार से बात की। उनके अनुसार, यह विषय सबसे पहले कारगिल युद्ध के दौरान उठाया गया था — जिसे अब 25-26 वर्ष हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई नई अवधारणा नहीं है, बल्कि एक प्रक्रिया है जिसे अब भारत में भी लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, भविष्य में युद्ध की आशंका को देखते हुए भारत के लिए थिएटराइजेशन की ओर बढ़ना अनिवार्य हो गया है।
भारत-चीन सीमा वार्ता पर विचार
भारत और चीन के बीच जारी 25 दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता पर जनरल नरवणे ने कहा कि यह बातचीत दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच होती है। भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन की ओर से उनके विदेश मंत्री इस वार्ता में शामिल हुए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत-चीन के बीच सीमा विवाद की जड़ यह है कि दोनों देशों के बीच सीमा रेखा अभी तक स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं हो पाई है, जिसके कारण समय-समय पर तनाव उभरता रहता है।
स्टार्टअप और विकसित भारत का सपना
उद्घाटन समारोह के संदर्भ में जनरल नरवणे ने कहा कि इंडिया एक्सेलेरेटर का यह नया दफ्तर स्टार्टअप उद्यमियों को मार्गदर्शन और आर्थिक सहायता दोनों प्रदान करेगा। उनका मानना है कि यदि भारत 'विकसित भारत' के लक्ष्य को साकार करना चाहता है, तो स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि उद्यमिता और राष्ट्र निर्माण एक-दूसरे के पूरक हैं।
आगे की राह
जनरल नरवणे के ये विचार ऐसे समय में आए हैं जब भारत अपनी सैन्य संरचना में थिएटर कमांड के गठन पर सक्रिय रूप से विचार कर रहा है और भारत-चीन सीमा पर स्थिरता बनाए रखने के प्रयास जारी हैं। उनका यह संदेश स्पष्ट है — भविष्य की चुनौतियों के लिए अभी से तैयारी करनी होगी।