पाकिस्तान मध्यस्थ नहीं, सिर्फ 'कूरियर सर्विस' है: पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे का बड़ा बयान
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) एम.एम. नरवणे ने 6 जून 2026 को कोलकाता में स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी अर्थ में वास्तविक मध्यस्थ नहीं है — वह महज एक 'कूरियर सर्विस' की भूमिका निभा रहा है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस्लामाबाद खुद को ईरान-अमेरिका तनाव में सुलहकर्ता के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता पर तीखी टिप्पणी
जनरल नरवणे ने कहा, 'किसी को नजरअंदाज करने या न करने का कोई सवाल ही नहीं है। पाकिस्तान मुश्किल से ही मीडिएटर की भूमिका निभा रहा है। वे सिर्फ एक कूरियर सर्विस हैं।' गौरतलब है कि पाकिस्तान हाल के हफ्तों में अमेरिका और ईरान के बीच संदेशवाहक की भूमिका में सक्रिय बताया जा रहा है, लेकिन नरवणे के अनुसार इसे कूटनीतिक मध्यस्थता का दर्जा देना उचित नहीं होगा।
राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा का अंतर्संबंध
ईरान-अमेरिका संघर्ष के वैश्विक व्यापार और सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों पर टिप्पणी करते हुए जनरल नरवणे ने कहा, 'राष्ट्रीय सुरक्षा हमेशा से आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी रही है। असल में, यह अर्थव्यवस्था ही है जो बाकी सब चीजों को चलाती है।' उन्होंने कहा कि भारत का ध्यान आपूर्ति श्रृंखला को विविध बनाने और घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता देने पर केंद्रित है, ताकि भविष्य के किसी भी वैश्विक झटके से देश सुरक्षित रह सके।
भारत-बांग्लादेश संबंध और सीमा बाड़बंदी
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर नरवणे ने भरोसा जताया कि दोनों देशों के बीच रिश्तों की दिशा एक बार फिर सकारात्मक और उर्ध्वगामी हो रही है। उन्होंने कहा कि देशों के बीच उतार-चढ़ाव स्वाभाविक हैं और हर मंदी को नकारात्मक नहीं माना जाना चाहिए। बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी के बारे में उन्होंने कहा कि यह कार्य एक दशक से भी अधिक समय से जारी है और पश्चिम बंगाल सहित शेष हिस्सों को भी कवर किया जा रहा है।
ड्रोन और आधुनिक युद्ध में यूएवी की भूमिका
आधुनिक युद्धक्षेत्र में ड्रोन और मानवरहित हवाई वाहनों (UAV) की बढ़ती अहमियत पर जनरल नरवणे ने कहा, 'यूक्रेन से लेकर ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा लड़ाई तक, सभी तरह के यूएवी ने बड़ी भूमिका निभाई है।' उन्होंने बताया कि इन अनुभवों से सीखते हुए भारतीय सशस्त्र बलों ने सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए ड्रोन खरीद पर अपना फोकस काफी बढ़ाया है। इस क्षेत्र में देसी कंपनियों और MSME की भूमिका को उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया।
सैन्य आधुनिकीकरण की अनवरत प्रक्रिया
भारतीय सेना के आधुनिकीकरण पर नरवणे ने कहा, 'सैन्य आधुनिकीकरण एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है — यह कभी खत्म नहीं होती।' उन्होंने स्वदेशी उपकरणों की खरीद को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत रक्षा निर्यात और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।