20 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पाकिस्तान मध्यस्थ नहीं, सिर्फ 'कूरियर सर्विस' है: पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे का बड़ा बयान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पाकिस्तान मध्यस्थ नहीं, सिर्फ 'कूरियर सर्विस' है: पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे का बड़ा बयान

सारांश

पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने पाकिस्तान की तथाकथित मध्यस्थता को सीधे खारिज किया — 'वे सिर्फ कूरियर सर्विस हैं।' कोलकाता में दिए इस बयान में उन्होंने ईरान-अमेरिका संघर्ष, भारत की आत्मनिर्भरता रणनीति और ड्रोन युद्ध के बदलते समीकरणों पर भी खुलकर राय रखी।

मुख्य बातें

जनरल (सेवानिवृत्त) एम.एम.
नरवणे ने 6 जून 2026 को कोलकाता में कहा कि पाकिस्तान ईरान-अमेरिका विवाद में मध्यस्थ नहीं, बल्कि 'कूरियर सर्विस' मात्र है।
उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा को अविभाज्य बताया और आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण पर जोर दिया।
भारत-बांग्लादेश संबंधों में सुधार का भरोसा जताया; सीमा बाड़बंदी एक दशक से जारी, शेष हिस्से कवर हो रहे हैं।
यूक्रेन और ईरान-अमेरिका संघर्ष से सबक लेते हुए भारतीय सशस्त्र बलों ने ड्रोन और UAV खरीद में तेजी लाई है।
सैन्य आधुनिकीकरण में स्वदेशी उपकरणों और MSME को प्राथमिकता देने की बात कही।

पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) एम.एम. नरवणे ने 6 जून 2026 को कोलकाता में स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी अर्थ में वास्तविक मध्यस्थ नहीं है — वह महज एक 'कूरियर सर्विस' की भूमिका निभा रहा है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस्लामाबाद खुद को ईरान-अमेरिका तनाव में सुलहकर्ता के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता पर तीखी टिप्पणी

जनरल नरवणे ने कहा, 'किसी को नजरअंदाज करने या न करने का कोई सवाल ही नहीं है। पाकिस्तान मुश्किल से ही मीडिएटर की भूमिका निभा रहा है। वे सिर्फ एक कूरियर सर्विस हैं।' गौरतलब है कि पाकिस्तान हाल के हफ्तों में अमेरिका और ईरान के बीच संदेशवाहक की भूमिका में सक्रिय बताया जा रहा है, लेकिन नरवणे के अनुसार इसे कूटनीतिक मध्यस्थता का दर्जा देना उचित नहीं होगा।

राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा का अंतर्संबंध

ईरान-अमेरिका संघर्ष के वैश्विक व्यापार और सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों पर टिप्पणी करते हुए जनरल नरवणे ने कहा, 'राष्ट्रीय सुरक्षा हमेशा से आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी रही है। असल में, यह अर्थव्यवस्था ही है जो बाकी सब चीजों को चलाती है।' उन्होंने कहा कि भारत का ध्यान आपूर्ति श्रृंखला को विविध बनाने और घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता देने पर केंद्रित है, ताकि भविष्य के किसी भी वैश्विक झटके से देश सुरक्षित रह सके।

भारत-बांग्लादेश संबंध और सीमा बाड़बंदी

भारत-बांग्लादेश संबंधों पर नरवणे ने भरोसा जताया कि दोनों देशों के बीच रिश्तों की दिशा एक बार फिर सकारात्मक और उर्ध्वगामी हो रही है। उन्होंने कहा कि देशों के बीच उतार-चढ़ाव स्वाभाविक हैं और हर मंदी को नकारात्मक नहीं माना जाना चाहिए। बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी के बारे में उन्होंने कहा कि यह कार्य एक दशक से भी अधिक समय से जारी है और पश्चिम बंगाल सहित शेष हिस्सों को भी कवर किया जा रहा है।

ड्रोन और आधुनिक युद्ध में यूएवी की भूमिका

आधुनिक युद्धक्षेत्र में ड्रोन और मानवरहित हवाई वाहनों (UAV) की बढ़ती अहमियत पर जनरल नरवणे ने कहा, 'यूक्रेन से लेकर ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा लड़ाई तक, सभी तरह के यूएवी ने बड़ी भूमिका निभाई है।' उन्होंने बताया कि इन अनुभवों से सीखते हुए भारतीय सशस्त्र बलों ने सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए ड्रोन खरीद पर अपना फोकस काफी बढ़ाया है। इस क्षेत्र में देसी कंपनियों और MSME की भूमिका को उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया।

सैन्य आधुनिकीकरण की अनवरत प्रक्रिया

भारतीय सेना के आधुनिकीकरण पर नरवणे ने कहा, 'सैन्य आधुनिकीकरण एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है — यह कभी खत्म नहीं होती।' उन्होंने स्वदेशी उपकरणों की खरीद को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत रक्षा निर्यात और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि तेहरान और वाशिंगटन दोनों ने इस्लामाबाद की भूमिका को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बीच अपनी रणनीतिक स्थिति को पुनर्परिभाषित कर रहा है। नरवणे की टिप्पणी महज व्यक्तिगत राय नहीं — यह उस व्यापक भारतीय सामरिक सोच की झलक है जो पाकिस्तान को क्षेत्रीय शांति-निर्माता के रूप में नहीं, बल्कि एक अस्थिर कारक के रूप में देखती है।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जनरल नरवणे ने पाकिस्तान को 'कूरियर सर्विस' क्यों कहा?
जनरल नरवणे के अनुसार पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच संदेश पहुँचाने का काम कर रहा है, न कि किसी स्वतंत्र कूटनीतिक भूमिका में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वास्तविक मध्यस्थता के लिए जो विश्वसनीयता और स्वायत्तता चाहिए, वह पाकिस्तान के पास नहीं है।
ईरान-अमेरिका संघर्ष का भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
जनरल नरवणे के अनुसार राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा आपस में गहराई से जुड़ी हैं, इसलिए वैश्विक संघर्ष भारत की आपूर्ति श्रृंखला और व्यापार को प्रभावित कर सकते हैं। भारत इससे निपटने के लिए स्रोतों में विविधता लाने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है।
भारत-बांग्लादेश सीमा बाड़बंदी की क्या स्थिति है?
जनरल नरवणे ने बताया कि बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी का काम एक दशक से भी अधिक समय से जारी है। पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच के शेष हिस्सों को भी कवर किया जा रहा है ताकि पूरी सीमा पर बाड़ लगाई जा सके।
आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका पर नरवणे का क्या कहना है?
नरवणे ने कहा कि यूक्रेन से लेकर ईरान-अमेरिका संघर्ष तक सभी प्रकार के UAV ने निर्णायक भूमिका निभाई है। इन अनुभवों से सीखते हुए भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना ने ड्रोन खरीद में तेजी लाई है और इस क्षेत्र में स्वदेशी कंपनियों व MSME को प्राथमिकता दी जा रही है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर जनरल नरवणे का क्या दृष्टिकोण है?
नरवणे ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध एक बार फिर सकारात्मक और उर्ध्वगामी दिशा में बढ़ रहे हैं। उनके अनुसार द्विपक्षीय संबंधों में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है और हर मंदी को स्थायी नकारात्मकता के रूप में नहीं देखना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले