ग्राम सचिवालय में 1 जुलाई से लेखपाल की नियमित उपस्थिति, UP के ग्रामीणों को तहसील के चक्कर से मिलेगी राहत
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार ने 1 जुलाई 2025 से प्रदेश के प्रत्येक जनपद में ग्राम सचिवालयों में लेखपालों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है, जिससे ग्रामीणों को राजस्व संबंधी सेवाओं के लिए बार-बार तहसील के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। राजस्व परिषद ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर रोस्टर तैयार करने और नई व्यवस्था तत्काल लागू करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सुशासन नीति के अनुरूप यह कदम ग्राम सचिवालयों को 'वन स्टॉप सर्विस सेंटर' के रूप में विकसित करने की दिशा में उठाया गया है।
नई व्यवस्था का स्वरूप
राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि पंचायतीराज विभाग के पूर्व आदेशों के अनुरूप ग्राम सचिवालयों में विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था पहले से है। अब इसी ढाँचे को और सुदृढ़ करते हुए लेखपालों की नियमित उपस्थिति भी इसमें जोड़ी जाएगी। प्रत्येक जनपद में जिलाधिकारी रोस्टर निर्धारित करेंगे और उपस्थिति की निगरानी सुनिश्चित करेंगे।
ग्रामीणों को कौन-सी सेवाएँ मिलेंगी
ग्राम सचिवालयों में पंचायत सहायकों द्वारा संचालित ऑनलाइन सेवाओं में राजस्व विभाग की लगभग दस प्रमुख सेवाएँ पहले से उपलब्ध हैं। इनमें आय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र, हैसियत प्रमाणपत्र और खतौनी की नकल शामिल हैं। लेखपाल की उपस्थिति से इन सेवाओं का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित हो सकेगा, क्योंकि इन प्रमाणपत्रों के सत्यापन में लेखपाल की भूमिका अनिवार्य होती है।
लेखपाल की व्यापक जिम्मेदारियाँ
राजस्व परिषद ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि लेखपाल केवल प्रमाणपत्र कार्य तक सीमित नहीं हैं। तहसील दिवस, थाना दिवस, वरासत, स्वामित्व योजना, किसान सम्मान निधि, राहत एवं पुनर्वास, आपदा प्रबंधन, भूमि विवाद निस्तारण, फसल गिरदावरी, अवैध कब्जों की जाँच, खनन सत्यापन और सार्वजनिक वितरण प्रणाली सत्यापन जैसे दायित्व भी लेखपाल निभाते हैं। विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी उनकी रिपोर्ट और सत्यापन अनिवार्य होता है।
समस्या और समाधान
अब तक ग्राम पंचायत स्तर पर लेखपालों के बैठने की कोई निश्चित व्यवस्था न होने के कारण ग्रामीणों को तहसील या अन्य स्थानों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे उनके समय और धन दोनों की हानि होती थी। यह ऐसे समय में आया है जब प्रदेश सरकार ग्रामीण स्तर पर सेवा वितरण को डिजिटल और भौतिक दोनों माध्यमों से सुदृढ़ करने पर ज़ोर दे रही है। नई रोस्टर प्रणाली से यह समस्या काफी हद तक दूर होने की उम्मीद है।
आगे की राह
यह व्यवस्था 1 जुलाई 2025 से प्रभावी रूप से लागू होगी। कंचन वर्मा के अनुसार, इस पहल से न केवल आम जनता को राहत मिलेगी, बल्कि राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली भी अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनेगी। ग्राम सचिवालय अब सही मायनों में 'वन स्टॉप सर्विस सेंटर' की भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।