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गति शक्ति विश्वविद्यालय वडोदरा: ट्रांसपोर्ट-लॉजिस्टिक्स शिक्षा का देश का पहला केंद्रीय विश्वविद्यालय

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गति शक्ति विश्वविद्यालय वडोदरा: ट्रांसपोर्ट-लॉजिस्टिक्स शिक्षा का देश का पहला केंद्रीय विश्वविद्यालय

सारांश

वडोदरा का गति शक्ति विश्वविद्यालय महज़ एक नया संस्थान नहीं — यह भारत के लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट क्षेत्र की मानव-संसाधन कमी को पाटने का सीधा प्रयास है। 23 राज्यों के छात्र, एयरबस से मोनाश तक की साझेदारियाँ और 91% प्लेसमेंट — वीजीआरसी के ज़रिए वडोदरा अब वैश्विक शिक्षा मानचित्र पर दस्तक दे रहा है।

मुख्य बातें

गति शक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी) की स्थापना 6 दिसंबर 2022 को वडोदरा में हुई — यह देश का पहला और एकमात्र परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स केंद्रित केंद्रीय विश्वविद्यालय है।
23 से अधिक राज्यों के 1,000 से ज़्यादा छात्र स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर पर अध्ययनरत हैं।
विश्वविद्यालय ने 2025 में 91% और 2026 में 89% का प्लेसमेंट रिकॉर्ड दर्ज किया; 60 से अधिक कंपनियाँ कैंपस प्लेसमेंट में शामिल।
हर वर्ष भारतीय रेलवे, रक्षा बलों और मित्र देशों के 1,100 से अधिक अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।
एयरबस, सीमेंस, अमेज़न, डीआरडीओ, मोनाश यूनिवर्सिटी सहित राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ साझेदारी।
पाठ्यक्रम प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति से जुड़े हैं।

गति शक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी), वडोदरा में 6 दिसंबर 2022 को स्थापित, भारत का पहला और एकमात्र परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स केंद्रित केंद्रीय विश्वविद्यालय है, जो तेज़ी से राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। आगामी वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (वीजीआरसी) के संदर्भ में यह संस्थान वडोदरा की शैक्षणिक उत्कृष्टता और उद्योग-आधारित कौशल विकास मॉडल का प्रतीक बनकर उभर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, वीजीआरसी वडोदरा को ज्ञान, नवाचार और निवेश के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगा।

विश्वविद्यालय की स्थापना और उद्देश्य

भारत जैसे-जैसे आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छू रहा है, कुशल और भविष्य के लिए तैयार मानव संसाधन की माँग भी उतनी ही तेज़ी से बढ़ रही है। इसी ज़रूरत को पूरा करने के लिए जीएसवी की स्थापना की गई। वडोदरा के लालबाग क्षेत्र में स्थित यह संस्थान पारंपरिक शिक्षा की सीमाओं से परे, पूरी तरह उद्योग-आधारित और नवाचार-केंद्रित मॉडल पर संचालित होता है।

विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति से जुड़े हैं, जो देश के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को सीधा समर्थन देते हैं। गौरतलब है कि वाघोडिया में नए परिसर के निर्माण की प्रक्रिया भी जारी है।

पाठ्यक्रम और विशेषज्ञता के क्षेत्र

जीएसवी में रेलवे, एविएशन, मैरीटाइम, रोड एवं हाईवे, मेट्रो रेल, सप्लाई चेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्मार्ट मोबिलिटी जैसे भविष्य-उन्मुख क्षेत्रों में विश्वस्तरीय शिक्षा दी जाती है। यहाँ बीटेक, एमटेक, एमबीए और पीएचडी स्तर के कार्यक्रम संचालित होते हैं। एआई और डेटा साइंस, एविएशन इंजीनियरिंग तथा मैरीटाइम इंजीनियरिंग जैसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को तकनीक-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए सक्षम बना रहे हैं।

वर्तमान में देश के 23 से अधिक राज्यों के 1,000 से ज़्यादा छात्र यहाँ स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर पर अध्ययनरत हैं। इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय हर वर्ष भारतीय रेलवे, रक्षा बलों और मित्र देशों के 1,100 से अधिक अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान करता है।

उद्योग साझेदारी और व्यावहारिक शिक्षण

जीएसवी की सबसे बड़ी ताकत इसका व्यावहारिक शिक्षण मॉडल है। छात्रों को उद्योग इंटर्नशिप, लाइव प्रोजेक्ट्स, हैंड्स-ऑन लर्निंग और भारतीय रेलवे के प्रशिक्षण संस्थानों से जुड़ने के अवसर मिलते हैं। इसी कारण एयरबस, एल एंड टी, सीमेंस, अमेज़न, डीआरडीओ, एसएपी, नोकिया, डीएफसीसीआईएल, भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना, भारतीय नौसेना और ऑस्ट्रेलिया की मोनाश यूनिवर्सिटी सहित कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संस्थानों ने जीएसवी के साथ साझेदारी की है।

प्लेसमेंट रिकॉर्ड और रोज़गार

रोज़गार के मोर्चे पर भी विश्वविद्यालय ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। 60 से अधिक प्रतिष्ठित कंपनियाँ कैंपस प्लेसमेंट में भाग ले चुकी हैं। विश्वविद्यालय ने 2025 में 91 प्रतिशत और 2026 में 89 प्रतिशत का उत्कृष्ट प्लेसमेंट रिकॉर्ड दर्ज किया है।

वीजीआरसी और वडोदरा की वैश्विक पहचान

विशेषज्ञों का मानना है कि गति शक्ति विश्वविद्यालय न केवल ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए नया नेतृत्व तैयार कर रहा है, बल्कि 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय विजन को भी मज़बूती प्रदान कर रहा है। आगामी वीजीआरसी के ज़रिए वडोदरा की शिक्षा, नवाचार और निवेश क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 छात्रों की मौजूदा क्षमता और देश की विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर महत्वाकांक्षा के बीच की खाई अभी बहुत गहरी है। वाघोडिया परिसर का निर्माण और क्षमता विस्तार की गति ही तय करेगी कि यह संस्थान प्रतीकात्मक उपस्थिति से आगे बढ़कर वास्तविक क्षेत्रीय परिवर्तन का वाहक बन सकता है या नहीं। वीजीआरसी जैसे मंचों से निवेश आकर्षित करना ज़रूरी है, पर असली कसौटी यह होगी कि उद्योग साझेदारियाँ कक्षाओं से निकलकर ज़मीनी रोज़गार तक कितनी पहुँचती हैं।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गति शक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी) क्या है और यह कहाँ स्थित है?
गति शक्ति विश्वविद्यालय भारत का पहला और एकमात्र परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स केंद्रित केंद्रीय विश्वविद्यालय है, जो वडोदरा के लालबाग क्षेत्र में स्थित है। इसकी स्थापना 6 दिसंबर 2022 को हुई थी और यह प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान से जुड़ा है।
जीएसवी में कौन-कौन से पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं?
जीएसवी में बीटेक, एमटेक, एमबीए और पीएचडी स्तर के कार्यक्रम संचालित होते हैं। रेलवे, एविएशन, मैरीटाइम, मेट्रो रेल, एआई व डेटा साइंस, स्मार्ट मोबिलिटी और सप्लाई चेन जैसे भविष्य-उन्मुख क्षेत्रों में विशेषज्ञता दी जाती है।
जीएसवी का प्लेसमेंट रिकॉर्ड कैसा रहा है?
विश्वविद्यालय ने 2025 में 91 प्रतिशत और 2026 में 89 प्रतिशत का प्लेसमेंट रिकॉर्ड दर्ज किया है। 60 से अधिक प्रतिष्ठित कंपनियाँ कैंपस प्लेसमेंट में भाग ले चुकी हैं, जिनमें एयरबस, सीमेंस और अमेज़न जैसी बड़ी कंपनियाँ शामिल हैं।
वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (वीजीआरसी) में जीएसवी की क्या भूमिका है?
वीजीआरसी के संदर्भ में जीएसवी वडोदरा की शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार क्षमता और उद्योग-आधारित कौशल विकास मॉडल का प्रमुख उदाहरण बनकर उभर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह सम्मेलन वडोदरा को ज्ञान, नवाचार और निवेश के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक होगा।
जीएसवी में कितने छात्र पढ़ते हैं और किन संस्थानों के साथ साझेदारी है?
वर्तमान में देश के 23 से अधिक राज्यों के 1,000 से ज़्यादा छात्र यहाँ अध्ययनरत हैं। एयरबस, एल एंड टी, सीमेंस, अमेज़न, डीआरडीओ, नोकिया, भारतीय सेना, वायुसेना, नौसेना और ऑस्ट्रेलिया की मोनाश यूनिवर्सिटी सहित कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ साझेदारी है।
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