2 नवंबर 2026
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स्वामित्व योजना: गुजरात के 14,866 गांवों की मैपिंग पूरी, ग्रामीणों को मिलेगा कानूनी मालिकाना हक

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स्वामित्व योजना: गुजरात के 14,866 गांवों की मैपिंग पूरी, ग्रामीणों को मिलेगा कानूनी मालिकाना हक

सारांश

गुजरात के 14,866 गांवों की जियोस्पेशियल मैपिंग पूरी होने के साथ, स्वामित्व योजना का एक बड़ा मील का पत्थर पार हुआ है। अब उन ग्रामीण परिवारों को कानूनी मालिकाना हक मिलने की राह खुलेगी जो दशकों से संपत्ति दस्तावेज के बिना जी रहे थे — और यह 'विकसित भारत 2047' की नींव में एक ठोस ईंट है।

मुख्य बातें

सर्वे ऑफ इंडिया ने स्वामित्व योजना के तहत गुजरात के 14,866 गांवों में ग्रामीण रिहायशी क्षेत्रों की जियोस्पेशियल मैपिंग पूरी की।
मैपिंग से ग्रामीण परिवारों को कानूनी प्रॉपर्टी कार्ड (मालिकाना हक दस्तावेज) जारी करने का आधार तैयार हुआ।
गुजरात और दमन-दीव में 102 CORS स्टेशन स्थापित; 1,042 उपयोगकर्ताओं ने पंजीकरण कराया।
AMRUT 2.0 के तहत 55 शहरों की GIS-आधारित मैपिंग तथा मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की मैपिंग भी जारी।
काकरापार में NPCIL के लिए 121 वर्ग किलोमीटर का LiDAR सर्वे पूरा; अगले चरण में 183 वर्ग किलोमीटर का सर्वे प्रस्तावित।
' नक्शा ' प्रोजेक्ट के तहत पाँच शहरों की मैपिंग पूरी, शहरी भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण का लक्ष्य।

केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना के तहत सर्वे ऑफ इंडिया ने गुजरात के 14,866 गांवों में ग्रामीण रिहायशी क्षेत्रों की जियोस्पेशियल मैपिंग पूरी कर ली है, जिससे लाखों ग्रामीण परिवारों को कानूनी संपत्ति-स्वामित्व दस्तावेज जारी करने का भौगोलिक-स्थानिक आधार तैयार हो गया है। 2 नवंबर 2026 को गांधीनगर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह उपलब्धि भूमि प्रशासन, बुनियादी ढांचे की योजना और शहरी विकास के क्षेत्र में सर्वे ऑफ इंडिया के व्यापक कार्यक्रम का हिस्सा है।

मुख्य घटनाक्रम

गांधीनगर स्थित गुजरात, दमन और दीव जियोस्पेशियल निदेशालय ने राज्य के समस्त चिह्नित गांवों की ड्रोन-आधारित मैपिंग पूरी कर ली है। इस मैपिंग के आधार पर ग्रामीण परिवारों को 'प्रॉपर्टी कार्ड' यानी कानूनी मालिकाना हक के दस्तावेज जारी किए जाएंगे, जो अब तक अधिकांश गांवों में उपलब्ध नहीं थे।

निदेशालय के निदेशक सिद्धांत सेन ने बताया कि 1767 में स्थापित सर्वे ऑफ इंडिया ने ढाई शताब्दियों से अधिक समय से देश के भौगोलिक मानचित्रण में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, 'इस संस्थान की शुरुआत 'ग्रेट ट्रिगोनोमेट्रिकल सर्वे' से हुई थी, जिसमें सर्वेक्षकों ने घने जंगलों, रेगिस्तानों और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में थियोडोलाइट जैसे उपकरणों से भूमि की माप की थी।'

स्वामित्व योजना का महत्व

स्वामित्व योजना ग्रामीण भारत में उन करोड़ों परिवारों को संपत्ति के कानूनी दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई थी, जिनके पास आवासीय भूमि का कोई अधिकारिक रिकॉर्ड नहीं था। ऐसे दस्तावेजों के अभाव में ग्रामीण बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं के लाभ और संपत्ति विवाद निपटारे में बाधाएं झेलते रहे हैं।

गौरतलब है कि गुजरात में 14,866 गांवों की मैपिंग पूरी होना देश के उन राज्यों में से एक के लिए बड़ी उपलब्धि है, जहां ग्रामीण आबादी का एक बड़ा वर्ग कृषि और तटीय आजीविका पर निर्भर है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य की दिशा में डिजिटल भूमि प्रशासन को प्राथमिकता दे रही है।

तकनीकी अवसंरचना और विस्तार

निदेशालय ने गुजरात और दमन-दीव में 102 कंटीन्यूअसली ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन (CORS) स्थापित किए हैं, जो सर्वेक्षकों, किसानों, इंजीनियरों और ड्रोन ऑपरेटरों को सेंटीमीटर-स्तर की सटीकता के साथ रियल-टाइम पोजिशनिंग सेवाएं प्रदान करते हैं। अब तक 1,042 उपयोगकर्ताओं ने इस सुविधा के लिए पंजीकरण कराया है।

इसके अलावा, वडीनार, पोरबंदर, ओखा और कांडला में टाइड-गेज वेधशालाएं समुद्र के स्तर में बदलाव की निरंतर निगरानी कर रही हैं। काकरापार में न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) के लिए 121 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का LiDAR-आधारित सर्वे पूरा हो चुका है और अगले चरण में 183 वर्ग किलोमीटर के अतिरिक्त क्षेत्र के सर्वे की तैयारी है।

शहरी विकास पर असर

अमृत 2.0 (AMRUT 2.0) के तहत राज्य के 55 शहरों की GIS-आधारित मैपिंग शुरू की गई है, जिससे जलापूर्ति, सीवेज सिस्टम, हरित क्षेत्र और शहरी बुनियादी ढांचे की वैज्ञानिक योजना बनाने में मदद मिलेगी। निदेशालय मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की मैपिंग का काम भी कर रहा है।

'नक्शा' प्रोजेक्ट के तहत — जिसे केंद्रीय भूमि संसाधन विभाग और गुजरात सरकार संयुक्त रूप से लागू कर रही हैं — पाँच शहरों की मैपिंग पूरी हो चुकी है। इस पहल का उद्देश्य शहरी भूमि और संपत्ति रिकॉर्ड को आधुनिक बनाना तथा स्वामित्व दस्तावेजों की पारदर्शिता बढ़ाना है।

आगे की राह

निदेशालय ड्रोन, LiDAR, ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) और जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (GIS) जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से अपनी मैपिंग क्षमताओं को और विस्तार देने की योजना पर काम कर रहा है। सेन के अनुसार, 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सटीक भौगोलिक जानकारी की उपलब्धता अपरिहार्य है, विशेष रूप से बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान, बांध सुरक्षा आकलन और सड़क-पुल-नहर नियोजन जैसे कार्यों के लिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

866 गांवों की मैपिंग का पूरा होना निःसंदेह एक तकनीकी उपलब्धि है, लेकिन असली परीक्षा मैपिंग से आगे है — यानी संपत्ति कार्ड वितरण की गति और गुणवत्ता। अनुभव बताता है कि जियोस्पेशियल डेटा तैयार हो जाने और ग्रामीण परिवारों तक कागज़ात पहुंचने के बीच प्रशासनिक देरी अक्सर योजना का सबसे कमज़ोर पड़ाव बनती है। यह भी उल्लेखनीय है कि स्वामित्व के तहत प्रॉपर्टी कार्ड मिलने के बाद उनके बैंक ऋण और कानूनी मान्यता में वास्तविक रूपांतरण को लेकर अभी तक स्वतंत्र मूल्यांकन सीमित रहे हैं।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वामित्व योजना क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
स्वामित्व योजना केंद्र सरकार की एक पहल है जिसके तहत ड्रोन और जियोस्पेशियल तकनीक से ग्रामीण आवासीय क्षेत्रों की मैपिंग कर ग्रामीण परिवारों को कानूनी संपत्ति-स्वामित्व दस्तावेज (प्रॉपर्टी कार्ड) दिए जाते हैं। इसका मकसद उन करोड़ों परिवारों को संपत्ति का अधिकार देना है जिनके पास अब तक कोई आधिकारिक भूमि रिकॉर्ड नहीं था।
गुजरात में स्वामित्व योजना के तहत अब तक क्या हासिल हुआ है?
सर्वे ऑफ इंडिया के गुजरात, दमन और दीव जियोस्पेशियल निदेशालय ने गुजरात के 14,866 गांवों में ग्रामीण रिहायशी क्षेत्रों की जियोस्पेशियल मैपिंग पूरी कर ली है। इस मैपिंग के आधार पर अब ग्रामीण परिवारों को कानूनी मालिकाना हक के दस्तावेज जारी किए जाएंगे।
CORS स्टेशन क्या हैं और इनसे ग्रामीणों को क्या फायदा होगा?
CORS यानी कंटीन्यूअसली ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन ऐसे केंद्र हैं जो सर्वेक्षकों, किसानों, इंजीनियरों और ड्रोन ऑपरेटरों को सेंटीमीटर-स्तर की सटीकता के साथ रियल-टाइम जीपीएस पोजिशनिंग सेवाएं देते हैं। गुजरात और दमन-दीव में 102 ऐसे स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जिनका उपयोग 1,042 पंजीकृत उपयोगकर्ता कर रहे हैं।
स्वामित्व योजना के तहत प्रॉपर्टी कार्ड मिलने से ग्रामीणों को क्या लाभ होगा?
कानूनी मालिकाना हक दस्तावेज मिलने से ग्रामीण परिवार अपनी संपत्ति को बैंक ऋण के लिए गिरवी रख सकेंगे, सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में सहूलियत होगी और संपत्ति विवादों के निपटारे में पारदर्शिता आएगी। अब तक दस्तावेज़ के अभाव में ये सुविधाएं अधिकांश ग्रामीण परिवारों की पहुंच से बाहर थीं।
सर्वे ऑफ इंडिया गुजरात में स्वामित्व के अलावा और कौन-से प्रमुख प्रोजेक्ट चला रहा है?
AMRUT 2.0 के तहत 55 शहरों की GIS-आधारित मैपिंग, मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की मैपिंग, काकरापार में NPCIL के लिए 121 वर्ग किलोमीटर का LiDAR सर्वे, और 'नक्शा' प्रोजेक्ट के तहत पाँच शहरों का शहरी भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण प्रमुख चल रहे कार्य हैं।
राष्ट्र प्रेस
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