स्वामित्व योजना: गुजरात के 14,866 गांवों की मैपिंग पूरी, ग्रामीणों को मिलेगा कानूनी मालिकाना हक
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना के तहत सर्वे ऑफ इंडिया ने गुजरात के 14,866 गांवों में ग्रामीण रिहायशी क्षेत्रों की जियोस्पेशियल मैपिंग पूरी कर ली है, जिससे लाखों ग्रामीण परिवारों को कानूनी संपत्ति-स्वामित्व दस्तावेज जारी करने का भौगोलिक-स्थानिक आधार तैयार हो गया है। 2 नवंबर 2026 को गांधीनगर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह उपलब्धि भूमि प्रशासन, बुनियादी ढांचे की योजना और शहरी विकास के क्षेत्र में सर्वे ऑफ इंडिया के व्यापक कार्यक्रम का हिस्सा है।
मुख्य घटनाक्रम
गांधीनगर स्थित गुजरात, दमन और दीव जियोस्पेशियल निदेशालय ने राज्य के समस्त चिह्नित गांवों की ड्रोन-आधारित मैपिंग पूरी कर ली है। इस मैपिंग के आधार पर ग्रामीण परिवारों को 'प्रॉपर्टी कार्ड' यानी कानूनी मालिकाना हक के दस्तावेज जारी किए जाएंगे, जो अब तक अधिकांश गांवों में उपलब्ध नहीं थे।
निदेशालय के निदेशक सिद्धांत सेन ने बताया कि 1767 में स्थापित सर्वे ऑफ इंडिया ने ढाई शताब्दियों से अधिक समय से देश के भौगोलिक मानचित्रण में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, 'इस संस्थान की शुरुआत 'ग्रेट ट्रिगोनोमेट्रिकल सर्वे' से हुई थी, जिसमें सर्वेक्षकों ने घने जंगलों, रेगिस्तानों और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में थियोडोलाइट जैसे उपकरणों से भूमि की माप की थी।'
स्वामित्व योजना का महत्व
स्वामित्व योजना ग्रामीण भारत में उन करोड़ों परिवारों को संपत्ति के कानूनी दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई थी, जिनके पास आवासीय भूमि का कोई अधिकारिक रिकॉर्ड नहीं था। ऐसे दस्तावेजों के अभाव में ग्रामीण बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं के लाभ और संपत्ति विवाद निपटारे में बाधाएं झेलते रहे हैं।
गौरतलब है कि गुजरात में 14,866 गांवों की मैपिंग पूरी होना देश के उन राज्यों में से एक के लिए बड़ी उपलब्धि है, जहां ग्रामीण आबादी का एक बड़ा वर्ग कृषि और तटीय आजीविका पर निर्भर है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य की दिशा में डिजिटल भूमि प्रशासन को प्राथमिकता दे रही है।
तकनीकी अवसंरचना और विस्तार
निदेशालय ने गुजरात और दमन-दीव में 102 कंटीन्यूअसली ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन (CORS) स्थापित किए हैं, जो सर्वेक्षकों, किसानों, इंजीनियरों और ड्रोन ऑपरेटरों को सेंटीमीटर-स्तर की सटीकता के साथ रियल-टाइम पोजिशनिंग सेवाएं प्रदान करते हैं। अब तक 1,042 उपयोगकर्ताओं ने इस सुविधा के लिए पंजीकरण कराया है।
इसके अलावा, वडीनार, पोरबंदर, ओखा और कांडला में टाइड-गेज वेधशालाएं समुद्र के स्तर में बदलाव की निरंतर निगरानी कर रही हैं। काकरापार में न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) के लिए 121 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का LiDAR-आधारित सर्वे पूरा हो चुका है और अगले चरण में 183 वर्ग किलोमीटर के अतिरिक्त क्षेत्र के सर्वे की तैयारी है।
शहरी विकास पर असर
अमृत 2.0 (AMRUT 2.0) के तहत राज्य के 55 शहरों की GIS-आधारित मैपिंग शुरू की गई है, जिससे जलापूर्ति, सीवेज सिस्टम, हरित क्षेत्र और शहरी बुनियादी ढांचे की वैज्ञानिक योजना बनाने में मदद मिलेगी। निदेशालय मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की मैपिंग का काम भी कर रहा है।
'नक्शा' प्रोजेक्ट के तहत — जिसे केंद्रीय भूमि संसाधन विभाग और गुजरात सरकार संयुक्त रूप से लागू कर रही हैं — पाँच शहरों की मैपिंग पूरी हो चुकी है। इस पहल का उद्देश्य शहरी भूमि और संपत्ति रिकॉर्ड को आधुनिक बनाना तथा स्वामित्व दस्तावेजों की पारदर्शिता बढ़ाना है।
आगे की राह
निदेशालय ड्रोन, LiDAR, ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) और जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (GIS) जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से अपनी मैपिंग क्षमताओं को और विस्तार देने की योजना पर काम कर रहा है। सेन के अनुसार, 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सटीक भौगोलिक जानकारी की उपलब्धता अपरिहार्य है, विशेष रूप से बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान, बांध सुरक्षा आकलन और सड़क-पुल-नहर नियोजन जैसे कार्यों के लिए।