वलसाड में नाबालिग से यौन उत्पीड़न: तस्वीरों से ब्लैकमेल कर ₹46 लाख वसूले, 21 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के वलसाड जिले की डूंगरी पुलिस ने 29 अक्टूबर 2026 को 21 वर्षीय ध्रुविल पटेल को नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न, घटना की तस्वीरें प्रसारित करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करने और कुल ₹46.09 लाख की नकदी तथा सोने के आभूषणों की वसूली के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया। पीड़िता के परिवार ने 19 अक्टूबर को शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके लगभग 10 दिन बाद यह गिरफ्तारी अमल में आई।
मुख्य घटनाक्रम
शिकायत के अनुसार, वलसाड के शंकरतालाव मंदिर फलिया निवासी आरोपी ध्रुविल पटेल ने कथित तौर पर 31 अगस्त और 26 सितंबर को नाबालिग लड़की को उसके अभिभावकों से बहला-फुसलाकर वलसाड के तिथल रोड स्थित होटल आमंत्रण में ले जाया। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने पीड़िता की इच्छा के विरुद्ध उसका यौन उत्पीड़न किया और इस दौरान तस्वीरें खींचीं।
बाद में आरोपी ने उन तस्वीरों को सार्वजनिक करने और पीड़िता को बदनाम करने की धमकी देकर उसे डराया-धमकाया। पुलिस के बयान के अनुसार, इस ब्लैकमेल के ज़रिए उसने पीड़िता के घर से अलग-अलग मौकों पर ₹2.61 लाख नकद तथा 32.4 तोला वजन के सोने के आभूषण, जिनका मूल्य ₹43.48 लाख आँका गया है, वसूल किए।
पुलिस की कार्रवाई और कानूनी धाराएँ
पीड़िता के परिवार की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 308(2), 64(2)(एम) और 351(2) के साथ-साथ बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) की धारा 4 और 6 के तहत मामला दर्ज किया गया।
डूंगरी पुलिस निरीक्षक यू एच पटेल के नेतृत्व में गठित एक टीम ने तकनीकी विश्लेषण और मानव खुफिया जानकारी के आधार पर आरोपी का पता लगाया। सहायक उप-निरीक्षक हिरेनभाई पटेल को मिली सूचना के बाद टीम को मौके पर भेजा गया और ध्रुविल पटेल को गिरफ्तार कर डूंगरी पुलिस स्टेशन लाया गया।
बरामदगी और जब्ती
पुलिस हिरासत के दौरान जाँचकर्ताओं ने आरोपी के पास से 15.33 तोला वजन के सोने के आभूषण बरामद किए, जिनका मूल्य ₹19.54 लाख है। इसके अतिरिक्त ₹5,000 नकद, एक ₹5,000 मूल्य का मोबाइल फोन, एक सिम कार्ड और एक डायरी भी जब्त की गई। बरामद संपत्ति का कुल मूल्य ₹19.64 लाख आँका गया है।
पीड़िता और परिवार पर असर
यह मामला उस दर्दनाक वास्तविकता को उजागर करता है जिसमें नाबालिग पीड़ितों को न केवल यौन हिंसा बल्कि उसके बाद डिजिटल ब्लैकमेल का भी शिकार बनाया जाता है। गौरतलब है कि परिवार ने घटनाओं के काफी समय बाद शिकायत दर्ज की, जो इस तरह के मामलों में सामाजिक दबाव और पीड़िता की मनोवैज्ञानिक स्थिति को दर्शाता है। पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामला सुनिश्चित करता है कि आरोपी को विशेष अदालत में सुनवाई का सामना करना होगा।
आगे की जाँच
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की आगे की जाँच जारी है। वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में यह अभियान चलाया गया। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अन्य पीड़ितों की पहचान होती है और बरामद किए गए उपकरणों — मोबाइल, सिम कार्ड और डायरी — की फोरेंसिक जाँच से कोई नए सुराग मिलते हैं।