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गंजम बाढ़: बीजेडी का आरोप — जलाशय प्रबंधन में BJP सरकार की लापरवाही ने डुबोया ओडिशा

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गंजम बाढ़: बीजेडी का आरोप — जलाशय प्रबंधन में BJP सरकार की लापरवाही ने डुबोया ओडिशा

सारांश

चक्रवात अर्नब से पहले ही रेड अलर्ट जारी हो चुका था — फिर भी बीजेडी का आरोप है कि गंजम के जलाशय 80% भरे होने के बावजूद नियंत्रित जल निकासी नहीं की गई। गेट अचानक खोले गए, लोगों को कोई चेतावनी नहीं मिली और लाखों लोग बाढ़ की चपेट में आ गए। बीजेडी इसे प्राकृतिक नहीं, मानव निर्मित आपदा बता रही है।

मुख्य बातें

बीजेडी ने 2 नवंबर 2026 को गंजम बाढ़ के लिए BJP सरकार के जल संसाधन विभाग की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया।
28 अक्टूबर को भंजनगर, सोरडा और धनेई जलाशय लगभग 80% भरे थे; निचले इलाकों को बिना पूर्व चेतावनी के गेट खोले गए।
चक्रवात अर्नब को लेकर 23 अक्टूबर को ही चेतावनी और गंजम-गजपति के लिए रेड अलर्ट जारी हो चुका था।
गंजम, कंधमाल और गजपति तीनों जिले बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित; लाखों लोग परेशान, कई तक प्रशासन अभी तक नहीं पहुँचा।
बीजेडी नेता सुजाता राउत कार्तिकेयन ने इसे 'मानव निर्मित पीड़ा' बताते हुए BJP सरकार से जवाबदेही माँगी।

विपक्षी बीजू जनता दल (बीजेडी) ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को ओडिशा की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गंजम जिले में आई विनाशकारी बाढ़ के लिए जल संसाधन विभाग की लापरवाही और अदूरदर्शी जलाशय प्रबंधन ज़िम्मेदार है। बीजेडी के अनुसार, चक्रवात अर्नब को लेकर 23 अक्टूबर को ही चेतावनी जारी हो चुकी थी, बावजूद इसके प्रशासन ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

मुख्य आरोप: बिना चेतावनी खोले गए जलाशयों के गेट

बीजेडी नेता और पूर्व नौकरशाह सुजाता राउत कार्तिकेयन ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि 28 अक्टूबर को भंजनगर, सोरडा और धनेई जलाशय लगभग 80 प्रतिशत तक भर चुके थे। जब भारी बारिश के कारण अचानक जल प्रवाह बढ़ा, तो इनके गेट खोल दिए गए — लेकिन निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को पहले से कोई चेतावनी नहीं दी गई।

कार्तिकेयन ने कहा, 'इसके कारण गंजम के लोगों पर भीषण आपदा टूट पड़ी। अभूतपूर्व बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हुआ। दुर्भाग्य से उस गलत फैसले ने लाखों लोगों को अपार दुख और भारी नुकसान पहुँचाया।'

प्रभावित ज़िले और जनता की पीड़ा

बीजेडी के अनुसार, गंजम, कंधमाल और गजपति जिले बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं और लाखों लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन अभी तक कई प्रभावित लोगों तक पहुँचने में नाकाम रहा है।

गौरतलब है कि रुषिकुल्या नदी बेसिन में कई मध्यम आकार के जलाशयों के अलावा सैकड़ों लघु सिंचाई परियोजनाएँ, डायवर्जन वीयर और चेक डैम मौजूद हैं। बीजेडी ने सवाल उठाया कि बाढ़ की संभावित परिस्थितियों को देखते हुए इनसे पहले ही आवश्यक मात्रा में पानी क्यों नहीं छोड़ा गया।

सरकार की तैयारी पर सवाल

बीजेडी ने कहा कि 27 से 29 अक्टूबर के बीच दक्षिण ओडिशा में भारी बारिश की चेतावनी दी गई थी और गंजम तथा गजपति जिलों के लिए रेड अलर्ट भी जारी किया गया था। आलोचकों का कहना है कि इतने स्पष्ट पूर्वानुमान के बाद भी जल संसाधन विभाग का जलाशयों से नियंत्रित तरीके से पानी न छोड़ना अक्षम्य लापरवाही है।

कार्तिकेयन ने प्रश्न किया: 'ऐसी अक्षम्य लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है? इस मानव निर्मित पीड़ा का जिम्मेदार कौन है? क्या BJP सरकार लाखों लोगों की परेशानी का जवाब देगी?'

राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा में BJP की सरकार अपेक्षाकृत नई है और बीजेडी विपक्ष में बैठकर राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर नज़र रख रही है। बीजेडी ने दशकों तक ओडिशा में शासन किया और आपदा प्रबंधन को अपनी मज़बूती बताता रहा है — मौजूदा आरोप इसी पृष्ठभूमि में और अधिक राजनीतिक महत्व रखते हैं।

राज्य सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बीजेडी का कहना है कि वह प्रभावित लोगों को न्याय दिलाने के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो जलाशयों से नियंत्रित पूर्व-निकासी क्यों नहीं हुई? यह जल संसाधन प्रबंधन की वह बुनियादी प्रक्रिया है जो ओडिशा ने 1999 के महाचक्रवात के बाद मुश्किल से सीखी थी। विडंबना यह है कि बीजेडी, जो खुद डेढ़ दशक से अधिक सत्ता में रही, अब उसी जवाबदेही की माँग कर रही है जो विपक्ष की भूमिका में उसे दिखती है। असली सवाल यह है कि क्या BJP सरकार स्वतंत्र जाँच और सार्वजनिक रिपोर्ट के ज़रिए इस कथित मानव निर्मित आपदा की जड़ तक जाएगी, या यह आरोप-प्रत्यारोप में दब जाएगा।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गंजम में बाढ़ कैसे आई और बीजेडी क्या आरोप लगा रही है?
चक्रवात अर्नब के कारण हुई भारी बारिश के बाद गंजम में बाढ़ आई। बीजेडी का आरोप है कि 28 अक्टूबर को भंजनगर, सोरडा और धनेई जलाशय 80% भरे होने के बावजूद जल संसाधन विभाग ने पहले से नियंत्रित पानी नहीं छोड़ा और बाद में बिना चेतावनी के अचानक गेट खोल दिए, जिससे विनाशकारी बाढ़ आई।
क्या चक्रवात अर्नब की पहले से चेतावनी दी गई थी?
हाँ, बीजेडी नेता सुजाता राउत कार्तिकेयन के अनुसार 23 अक्टूबर को ही चक्रवात की चेतावनी जारी हो गई थी। 27 से 29 अक्टूबर के बीच दक्षिण ओडिशा में भारी बारिश की संभावना जताई गई थी और गंजम तथा गजपति जिलों के लिए रेड अलर्ट भी जारी किया गया था।
बाढ़ से ओडिशा के कौन-से जिले प्रभावित हैं?
बीजेडी के अनुसार गंजम, कंधमाल और गजपति जिले बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। लाखों लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और कई प्रभावित इलाकों तक प्रशासन अभी तक नहीं पहुँच पाया है।
BJP सरकार ने इन आरोपों पर क्या कहा?
अभी तक ओडिशा की BJP सरकार की ओर से बीजेडी के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्थिति विकसित हो रही है और सरकार का पक्ष आना बाकी है।
रुषिकुल्या नदी बेसिन के जलाशयों की क्या भूमिका रही?
बीजेडी नेता कार्तिकेयन के अनुसार रुषिकुल्या नदी बेसिन में कई मध्यम आकार के जलाशयों के अलावा सैकड़ों लघु सिंचाई परियोजनाएँ, डायवर्जन वीयर और चेक डैम मौजूद हैं। उनका कहना है कि बाढ़ से पहले इनसे नियंत्रित तरीके से पानी छोड़ा जाना चाहिए था, जो नहीं हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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