IAS शिखर अग्रवाल मामला: राजस्थान सरकार ने गोयल फैशंस के प्रोत्साहन लाभ रोके, ACB जांच जारी
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान सरकार ने 2 नवंबर 2026 को वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के मद्देनज़र एम/एस गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना के तहत स्वीकृत विशेष पैकेज पर तत्काल रोक लगा दी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की प्रारंभिक जांच पूरी होने तक कंपनी को किसी भी प्रकार की रियायत या लाभ नहीं दिया जाएगा।
मामले की पृष्ठभूमि
शिखर अग्रवाल उद्योग विभाग के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव रह चुके हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को अनुचित लाभ पहुंचाए, बदले में व्यक्तिगत तथा पारिवारिक फायदे प्राप्त किए। यह कंपनी अनंता ब्रांड के अंतर्गत रिसॉर्ट संचालित करती है।
गौरतलब है कि राजस्थान में निवेश प्रोत्साहन योजनाएँ हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर विस्तारित हुई हैं, और यह पहली बार नहीं है जब किसी वरिष्ठ IAS अधिकारी पर ऐसे प्रोत्साहनों के दुरुपयोग के आरोप लगे हों। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य सरकार निवेशकों के विश्वास को बनाए रखने पर विशेष ज़ोर दे रही है।
आरोपों का विवरण
जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, अग्रवाल ने कंपनी को विशेष रियायतें दीं, रिसॉर्ट निर्माण नियमों में छूट प्रदान की और आवश्यक प्रमाणपत्रों का उचित सत्यापन किए बिना मंजूरियाँ दे दीं। ACB अग्रवाल और उनके परिवार से जुड़े संपत्ति लेनदेन की भी जांच कर रही है।
प्रारंभिक जांच में कथित तौर पर यह सामने आया है कि उदयपुर और अलवर स्थित अनंता रिसॉर्ट्स में कई विला और कॉटेज बाजार मूल्य से कम कीमत पर खरीदे गए थे। जांच एजेंसियाँ इन संपत्ति सौदों से जुड़े वित्तीय लेनदेन, पंजीकरण के समय और सरकारी रियायतों से संभावित संबंधों की पड़ताल कर रही हैं।
सरकार की कार्रवाई
मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की राज्यस्तरीय जांच समिति ने गोयल फैशंस को मिलने वाले सभी लाभों पर फिलहाल रोक लगा दी है। उद्योग एवं वाणिज्य आयुक्त ने इस संबंध में आवश्यक आदेश भी जारी कर दिए हैं।
सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17A के तहत आगे की जांच की अनुमति भी प्रदान कर दी है। यह धारा किसी लोकसेवक के विरुद्ध जांच से पहले सरकार की पूर्व मंजूरी अनिवार्य बनाती है — जो इस मामले में अब मिल चुकी है।
मुख्यमंत्री का रुख
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सरकारी योजनाओं और निवेश प्रोत्साहन कार्यक्रमों में पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि औद्योगिक विकास के नाम पर ईमानदारी से समझौता स्वीकार्य नहीं है।
आलोचकों का कहना है कि यह कदम सरकार की जवाबदेही के प्रति गंभीरता का संकेत है, हालांकि जांच के परिणाम और अंतिम कार्रवाई ही इस नीति की असली कसौटी होगी।
आगे की राह
ACB की प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि गोयल फैशंस के लाभ स्थायी रूप से रद्द किए जाएंगे या बहाल। अग्रवाल के खिलाफ धारा 17A की मंजूरी मिलने से अब एजेंसी के पास व्यापक जांच के अधिकार होंगे, जिसमें संपत्ति लेनदेन और कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णयों की विस्तृत पड़ताल शामिल है।