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IAS शिखर अग्रवाल मामला: राजस्थान सरकार ने गोयल फैशंस के प्रोत्साहन लाभ रोके, ACB जांच जारी

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IAS शिखर अग्रवाल मामला: राजस्थान सरकार ने गोयल फैशंस के प्रोत्साहन लाभ रोके, ACB जांच जारी

सारांश

राजस्थान में वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल पर भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गोयल फैशंस के निवेश प्रोत्साहन लाभ रोक दिए हैं। ACB को धारा 17A के तहत जांच की मंजूरी मिल चुकी है — जो सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई में बड़ा कदम माना जा रहा है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के हस्तक्षेप के बाद गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड के निवेश प्रोत्साहन लाभों पर 2 नवंबर 2026 को रोक लगाई गई।
वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल पर पद का दुरुपयोग कर कंपनी को अनुचित रियायतें देने और व्यक्तिगत लाभ लेने के आरोप हैं।
ACB ने उदयपुर और अलवर स्थित अनंता रिसॉर्ट्स में बाजार मूल्य से कम कीमत पर खरीदे गए विला-कॉटेज की जांच शुरू की।
सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17A के तहत जांच की अनुमति दी।
उद्योग एवं वाणिज्य आयुक्त ने कंपनी को लाभ रोकने के आवश्यक आदेश जारी कर दिए हैं।

राजस्थान सरकार ने 2 नवंबर 2026 को वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के मद्देनज़र एम/एस गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना के तहत स्वीकृत विशेष पैकेज पर तत्काल रोक लगा दी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की प्रारंभिक जांच पूरी होने तक कंपनी को किसी भी प्रकार की रियायत या लाभ नहीं दिया जाएगा।

मामले की पृष्ठभूमि

शिखर अग्रवाल उद्योग विभाग के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव रह चुके हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को अनुचित लाभ पहुंचाए, बदले में व्यक्तिगत तथा पारिवारिक फायदे प्राप्त किए। यह कंपनी अनंता ब्रांड के अंतर्गत रिसॉर्ट संचालित करती है।

गौरतलब है कि राजस्थान में निवेश प्रोत्साहन योजनाएँ हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर विस्तारित हुई हैं, और यह पहली बार नहीं है जब किसी वरिष्ठ IAS अधिकारी पर ऐसे प्रोत्साहनों के दुरुपयोग के आरोप लगे हों। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य सरकार निवेशकों के विश्वास को बनाए रखने पर विशेष ज़ोर दे रही है।

आरोपों का विवरण

जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, अग्रवाल ने कंपनी को विशेष रियायतें दीं, रिसॉर्ट निर्माण नियमों में छूट प्रदान की और आवश्यक प्रमाणपत्रों का उचित सत्यापन किए बिना मंजूरियाँ दे दीं। ACB अग्रवाल और उनके परिवार से जुड़े संपत्ति लेनदेन की भी जांच कर रही है।

प्रारंभिक जांच में कथित तौर पर यह सामने आया है कि उदयपुर और अलवर स्थित अनंता रिसॉर्ट्स में कई विला और कॉटेज बाजार मूल्य से कम कीमत पर खरीदे गए थे। जांच एजेंसियाँ इन संपत्ति सौदों से जुड़े वित्तीय लेनदेन, पंजीकरण के समय और सरकारी रियायतों से संभावित संबंधों की पड़ताल कर रही हैं।

सरकार की कार्रवाई

मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की राज्यस्तरीय जांच समिति ने गोयल फैशंस को मिलने वाले सभी लाभों पर फिलहाल रोक लगा दी है। उद्योग एवं वाणिज्य आयुक्त ने इस संबंध में आवश्यक आदेश भी जारी कर दिए हैं।

सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17A के तहत आगे की जांच की अनुमति भी प्रदान कर दी है। यह धारा किसी लोकसेवक के विरुद्ध जांच से पहले सरकार की पूर्व मंजूरी अनिवार्य बनाती है — जो इस मामले में अब मिल चुकी है।

मुख्यमंत्री का रुख

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सरकारी योजनाओं और निवेश प्रोत्साहन कार्यक्रमों में पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि औद्योगिक विकास के नाम पर ईमानदारी से समझौता स्वीकार्य नहीं है।

आलोचकों का कहना है कि यह कदम सरकार की जवाबदेही के प्रति गंभीरता का संकेत है, हालांकि जांच के परिणाम और अंतिम कार्रवाई ही इस नीति की असली कसौटी होगी।

आगे की राह

ACB की प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि गोयल फैशंस के लाभ स्थायी रूप से रद्द किए जाएंगे या बहाल। अग्रवाल के खिलाफ धारा 17A की मंजूरी मिलने से अब एजेंसी के पास व्यापक जांच के अधिकार होंगे, जिसमें संपत्ति लेनदेन और कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णयों की विस्तृत पड़ताल शामिल है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह प्रावधान अक्सर वरिष्ठ नौकरशाहों को ढाल के रूप में इस्तेमाल होता रहा है। असली परीक्षा यह है कि क्या ACB की जांच केवल रियायतों तक सीमित रहेगी या संपत्ति लेनदेन की पूरी श्रृंखला को उजागर करेगी। राज्य में निवेश प्रोत्साहन की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच का परिणाम पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक किया जाए।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IAS शिखर अग्रवाल मामला क्या है?
वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल, जो उद्योग विभाग के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव रहे हैं, पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को अनुचित सरकारी रियायतें दीं और बदले में व्यक्तिगत तथा पारिवारिक लाभ प्राप्त किए। ACB इस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।
गोयल फैशंस के लाभ क्यों रोके गए?
राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना के तहत गोयल फैशंस को स्वीकृत विशेष पैकेज पर रोक इसलिए लगाई गई है क्योंकि ACB की प्रारंभिक जांच अभी जारी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने तक कंपनी को कोई भी रियायत या लाभ नहीं दिया जाएगा।
धारा 17A के तहत जांच की अनुमति का क्या मतलब है?
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17A के अंतर्गत किसी लोकसेवक के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले सरकार की पूर्व मंजूरी अनिवार्य होती है। इस मंजूरी के मिलने के बाद ACB अब शिखर अग्रवाल के खिलाफ व्यापक जांच कर सकती है, जिसमें संपत्ति लेनदेन और कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णय शामिल हैं।
अनंता रिसॉर्ट्स में क्या अनियमितताएँ पाई गई हैं?
प्रारंभिक जांच में कथित तौर पर सामने आया है कि उदयपुर और अलवर स्थित अनंता रिसॉर्ट्स में कई विला और कॉटेज बाजार मूल्य से कम कीमत पर खरीदे गए थे। जांच एजेंसियाँ इन संपत्ति सौदों, उनके पंजीकरण के समय और सरकारी रियायतों से उनके संभावित संबंध की पड़ताल कर रही हैं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का इस मामले पर क्या रुख है?
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट किया है कि राजस्थान सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर कायम है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास और निवेश प्रोत्साहन के नाम पर पारदर्शिता और ईमानदारी से कोई समझौता नहीं होगा।
राष्ट्र प्रेस
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