गुजरात FDCA की बड़ी कार्रवाई: वडोदरा-सूरत में 4 कंपनियों के दवा लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात खाद्य एवं औषधि नियंत्रण प्रशासन (FDCA) ने 8 अक्टूबर 2026 को वडोदरा और सूरत में चार कंपनियों के दवा बिक्री लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिए। इन कंपनियों पर कोडिन-बेस्ड कफ सिरप, ट्रामाडोल और सिल्डेनाफिल जैसी दवाओं की अवैध स्टॉकिंग और बिक्री का आरोप है। यह कार्रवाई राज्य में नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध कारोबार के विरुद्ध जारी अभियान का हिस्सा है।
मुख्य घटनाक्रम
यह अभियान स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया के निर्देश पर और FDCA कमिश्नर की देखरेख में चलाया गया। वडोदरा जिले के करजन में, FDCA अधिकारियों ने महाराष्ट्र नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) से प्राप्त विशेष सूचना के आधार पर चामुंडा फार्मा पर संयुक्त छापेमारी की।
इस छापे में 13,938 बोतल एनरेक्स (कोडिन) कफ सिरप — अनुमानित मूल्य ₹27.8 लाख — और 12,240 ट्रामाडोल टैबलेट — अनुमानित मूल्य ₹50,000 — जब्त की गईं। फर्म को सील कर दिया गया और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के अंतर्गत फॉर्म 20बी व 21बी के तहत प्रदत्त बिक्री लाइसेंस 1 अक्टूबर 2026 से स्थायी रूप से निरस्त कर दिए गए।
मजीसा मेडिकल स्टोर्स पर कार्रवाई
करजन में ही चामुंडा फार्मा से संबद्ध मजीसा मेडिकल स्टोर्स का भी निरीक्षण किया गया। यहाँ NDPS घटक युक्त लोमोटिल टैबलेट का स्टॉक पाया गया। इसके अलावा, कोई पंजीकृत फार्मासिस्ट उपस्थित नहीं था और दवाओं के उचित भंडारण के लिए आवश्यक रेफ्रिजरेटर भी बंद मिला।
अधिकारियों ने कारण बताओ नोटिस जारी किया और फर्म का खुदरा दवा बिक्री लाइसेंस 5 अक्टूबर 2026 से स्थायी रूप से रद्द कर दिया।
ऑनलाइन बिक्री पर नकेल: सूरत में दो और कंपनियाँ जद में
1 अक्टूबर 2026 को सूरत के वराछा में डर्मेटिक्स इंडिया पर छापा मारा गया। जाँच में पाया गया कि कंपनी बिना वैध ड्रग लाइसेंस के अपनी वेबसाइट के ज़रिए दवाएँ बेच रही थी। सिल्डेनाफिल, मिनोक्सिडिल और केटोकोनाजोल का स्टॉक जब्त किया गया, जिसकी कुल अनुमानित कीमत ₹11.26 लाख से अधिक है। परीक्षण के लिए नमूने वडोदरा स्थित सरकारी FDA प्रयोगशाला भेजे गए हैं और लैब रिपोर्ट आने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
3 अक्टूबर 2026 को मोटा वराछा में क्यारा इंटरनेशनल के निरीक्षण में डिजिटल साक्ष्य मिले, जिनसे स्पष्ट हुआ कि कंपनी ने पिछले महीने मीशो जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के ज़रिए लगभग ₹3.60 लाख की एलोपैथिक दवाएँ बेची थीं। इन्हें 'सिलडेनाफिल आयुर्वेदिक' नाम से भ्रामक तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा था। गौरतलब है कि इसी व्यक्ति के विरुद्ध पहले भी बिना लाइसेंस दवाएँ रखने पर कार्रवाई की जा चुकी है; इस नए मामले को दोबारा अपराध मानते हुए ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत विधिक कार्रवाई की जा रही है।
सरकार की प्रतिक्रिया
स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने कहा, 'मीशो जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या प्राइवेट वेबसाइट के ज़रिए आयुर्वेदिक बताकर सिल्डेनाफिल जैसी एलोपैथिक दवाएँ बेचना या बिना डॉक्टर की पर्ची के दवाएँ बेचना बेहद गंभीर अपराध है।' उन्होंने बताया कि साइबर सेल और FDCA की संयुक्त टीम ई-कॉमर्स वेबसाइटों की निरंतर डिजिटल निगरानी करेगी।
पानशेरिया ने संबंधित अधिकारियों को युवाओं के बीच कोडिन-बेस्ड कफ सिरप और अन्य दवाओं के नशे के रूप में दुरुपयोग को रोकने के लिए माइक्रो-लेवल योजना बनाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'ऑनलाइन और फिजिकल, दोनों माध्यमों से दवाओं की गैर-कानूनी बिक्री के खिलाफ सख्त जाँच और कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।'
आगे क्या होगा
यह अभियान गुजरात में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोर्चों पर अवैध दवा कारोबार के विरुद्ध राज्य की बढ़ती सक्रियता को दर्शाता है। वडोदरा की सरकारी FDA प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद डर्मेटिक्स इंडिया के मामले में अतिरिक्त कानूनी कदम उठाए जाएँगे। FDCA की डिजिटल निगरानी इकाई के गठन से भविष्य में ऐसे मामलों की पहचान और त्वरित कार्रवाई की उम्मीद है।