फर्टिलाइजर सेल ऐप से नवसारी के किसानों को राहत, घर बैठे होती है उर्वरक की प्री-बुकिंग
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के नवसारी जिले में केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा विकसित फर्टिलाइजर सेल एप्लीकेशन सिस्टम (FSAS) मोबाइल ऐप किसानों के लिए उर्वरक खरीद की प्रक्रिया को सरल बना रहा है। इस ऐप के माध्यम से किसान घर बैठे उर्वरक की प्री-बुकिंग कर सकते हैं और नज़दीकी उपलब्ध विक्रेता से खाद प्राप्त कर सकते हैं। नवसारी में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चलाया जा रहा है।
किसानों को कैसे मिल रहा है फायदा
नवसारी के किसान अशोकभाई गांधी इस ऐप के नियमित उपयोगकर्ता हैं। उनके अनुसार, पहले उर्वरक के लिए दुकानों पर लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता था और कई बार खाद उपलब्ध न होने पर खाली हाथ लौटना पड़ता था। अब वे ऐप के ज़रिए पहले से बुकिंग करते हैं और क्यूआर कोड दिखाकर नज़दीकी विक्रेता से उर्वरक खरीद लेते हैं।
गांधी ने बताया, 'यह मोबाइल ऐप किसानों के बहुत काम का है। इसने उर्वरक खरीद में आने वाली सभी परेशानियों को दूर कर दिया है।'
पंजीकरण की प्रक्रिया
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस ऐप का उपयोग करने के लिए किसानों को अपने आधार नंबर के माध्यम से पंजीकरण करना होता है। इसके बाद खेती की ज़मीन का विवरण दर्ज करना होता है। पंजीकरण पूरा होने पर किसान को एक क्यूआर कोड जारी किया जाता है, जिसे दिखाकर वे अपने क्षेत्र के अधिकृत उर्वरक विक्रेताओं और सप्लायर्स से खाद खरीद सकते हैं।
अधिकारियों की राय
नवसारी के नायब कृषि निदेशक पी.आर. कथीरिया ने बताया कि इस ऐप से किसानों को घर बैठे यह जानकारी मिल जाएगी कि नज़दीक की किस दुकान पर खाद उपलब्ध है। उन्होंने कहा, 'किसानों को अब इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा और बेवजह लाइन में खड़े रहने की ज़रूरत नहीं होगी।'
डिजिटल कृषि की दिशा में बड़ा कदम
यह ऐप देश में पहली बार कृषि मंत्रालय द्वारा विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य किसानों को सब्सिडी वाले उर्वरक की आसान, पारदर्शी और समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करना है। ऐप ने फर्टिलाइजर की उपलब्धता, वितरण और माँग का रियल-टाइम प्रबंधन संभव बनाया है।
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नवसारी में पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने पर इसे गुजरात के अन्य जिलों में भी विस्तारित किया जा सकता है। यह कदम खेती में डिजिटल तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने की व्यापक नीति का हिस्सा है, जिससे कृषि उत्पादकता और किसानों की आय में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।