गुजरात वन विभाग की नर्सरी खोजें सिर्फ एक कॉल में: 8320002000 पर डायल करें, SMS से मिलेगा पूरा विवरण
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात वन विभाग ने 9 जुलाई 2026 को गांधीनगर से एक नागरिक-केंद्रित डिजिटल हेल्पलाइन सेवा की जानकारी साझा की, जिसके तहत कोई भी नागरिक 8320002000 नंबर पर मिस्ड कॉल देकर अपने नजदीकी वन विभाग की नर्सरी का पूरा विवरण प्राप्त कर सकता है। यह कॉल स्वतः डिस्कनेक्ट हो जाती है और उपयोगकर्ता के मोबाइल पर एक वेब लिंक युक्त SMS भेजा जाता है। इस लिंक पर क्लिक करते ही संबंधित क्षेत्र की सामाजिक वनीकरण विभाग की नर्सरी की संपर्क जानकारी, गूगल मैप पर स्थान और वन अधिकारियों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हो जाते हैं।
सेवा का उपयोग कैसे करें
नागरिकों के पास दो विकल्प हैं। पहला — 8320002000 पर मिस्ड कॉल दें; कॉल अपने आप कट जाएगी और SMS में लिंक आएगा। दूसरा — इसी नंबर पर 'HI' लिखकर SMS या WhatsApp संदेश भेजें। इस पर प्राप्त लिंक खोलने पर एक मेन्यू मिलेगा, जिसमें राज्यभर की नर्सरियों, रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर्स (RFO), इको-टूरिज्म साइट्स और अन्य वन सेवाओं की जानकारी उपलब्ध होगी।
पौधों की कीमत और वितरण व्यवस्था
प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (सोशल फॉरेस्ट्री) आरके सुगूर के अनुसार, नागरिक वन विभाग की किसी भी नर्सरी से ₹5 से ₹15 की मामूली कीमत पर उच्च गुणवत्ता वाले पौधे खरीद सकते हैं। राज्यभर में वन विभाग की कुल 453 नर्सरियाँ हैं। 15×25 सेंटीमीटर या 10×20 सेंटीमीटर आकार की पॉलीबैग में लगाए गए पौधे निःशुल्क वितरित किए जाते हैं। निःशुल्क या रियायती दर पर पौधे चाहिए तो संबंधित जिले के RFO या डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (DCF) से संपर्क किया जा सकता है।
मंत्रियों की प्रतिक्रिया
वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा, 'मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में समग्र गुजरात को अधिक हरित बनाने के अभियान में हजारों लोग जुड़ें और वृक्षारोपण के लिए नागरिकों को उनके आसपास की वन विभाग की नर्सरियों से पौधे आसानी से मिल सकें। इस वर्ष सामाजिक वनीकरण विंग द्वारा 11.80 करोड़ पौधे नागरिकों में वितरण के लिए तैयार किए गए हैं।' वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने बताया कि यह इन-हाउस डिजिटल हेल्पलाइन सिस्टम राज्यभर के लोगों को सहायता और शिकायत निवारण के लिए उचित वन अधिकारियों से जोड़ने में सहायक है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म की विशेषता
एडिशनल प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (रिसर्च एंड ट्रेनिंग) एसके श्रीवास्तव ने बताया, 'इस पहल की मुख्य विशेषता इसका डायनेमिक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे आवश्यकताओं के अनुसार तेजी से बदला और अपडेट किया जा सकता है।' यह संपूर्ण सिस्टम वन विभाग ने स्वयं इन-हाउस विकसित किया है, जो बिना किसी अतिरिक्त खर्च के सार्वजनिक सेवा वितरण में तकनीक के उपयोग का उदाहरण है। हेल्पलाइन पर प्रतिदिन लगभग 30 से 40 कॉल प्राप्त हो रहे हैं। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से भी जुड़ी है, जिसका लक्ष्य जन भागीदारी से देश का ग्रीन कवर बढ़ाना है।
शिकायत और अतिरिक्त सहायता
वन विभाग से संबंधित किसी भी शिकायत या अतिरिक्त सहायता के लिए नागरिक टोल-फ्री हेल्पलाइन 1926 पर संपर्क कर सकते हैं, जहाँ भी प्रतिदिन लगभग 30 से 40 कॉल आते हैं। यह डिजिटल पहल गुजरात के वनीकरण लक्ष्यों को आम नागरिक तक पहुँचाने की दिशा में एक ठोस कदम है।