गुजरात के 4 जिले सूखाग्रस्त घोषित: ₹8,500/हेक्टेयर फसल सहायता और 150 दिन रोजगार की घोषणा
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने 26 अक्टूबर 2026 को देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, कच्छ और जामनगर जिलों को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित किया। कम और विलंबित वर्षा के चलते प्रभावित किसानों एवं पशुपालकों के लिए फसल क्षति सहायता, रियायती दर पर चारा और ग्रामीण निवासियों को 150 दिनों का रोजगार देने की घोषणा की गई है। ये सभी राहत उपाय 1 नवंबर 2026 से प्रभावी होंगे।
मुख्य घोषणाएँ और राहत पैकेज
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में कृषि मंत्री जीतू वाघानी की उपस्थिति में यह निर्णय सुनाया। सरकार ने केंद्र की 'सूखा आकलन नियमावली, 2016' के अंतर्गत सभी आवश्यक प्रक्रियाएँ पूरी करने के बाद यह घोषणा की।
राहत पैकेज के तहत चारों जिलों में फसल क्षति से प्रभावित किसानों को राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) के मानदंडों के अनुसार ₹8,500 प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा 2 हेक्टेयर तय की गई है।
ग्रामीण रोजगार और पशुपालन राहत
ग्रामीण आजीविका को सहारा देने के लिए सरकार ने सूखा प्रभावित तालुकों में वीबी-जीरामजी (विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका मिशन – ग्रामीण) योजना के तहत 150 दिनों का रोजगार देने का फैसला किया है। यह कदम ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब खरीफ फसल के नुकसान ने ग्रामीण परिवारों की आय पर सीधा असर डाला है।
पशुपालकों के लिए सूखाग्रस्त तालुकों में पशु शिविरों में रखे गए जानवरों हेतु SDRF से ₹80 प्रति पशु प्रतिदिन की सहायता 2 महीने तक दी जाएगी। इसके बाद यह खर्च राज्य सरकार स्वयं वहन करेगी। अब तक 1.21 करोड़ किलोग्राम चारा ₹2 प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर वितरित किया जा चुका है और वर्तमान में राज्य के पास 3 करोड़ किलोग्राम चारे का भंडार उपलब्ध है।
वर्षा आँकड़े और जल संसाधन की स्थिति
गौरतलब है कि गुजरात में इस वर्ष औसत वर्षा का लगभग 89 प्रतिशत प्राप्त हुआ, फिर भी ये चार जिले सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज करने के कारण सर्वाधिक प्रभावित रहे। राज्य के 206 प्रमुख बांधों में वर्तमान में उनकी कुल क्षमता का 66 प्रतिशत जल भंडार है।
रबी सीजन के लिए 76 बांधों के कमांड क्षेत्रों में सिंचाई जल आपूर्ति की योजना तैयार की गई है। उत्तरी गुजरात के 11 बांध (धरोई और दांतीवाड़ा), मध्य गुजरात के 12 बांध (करजन और पनाम) और दक्षिणी गुजरात के 9 बांध (उकाई, काकरापार और दमंगंगा) इस योजना में शामिल हैं। इसके अलावा शेतरुंजी, ब्राह्मणी, माछू सहित 39 बांध और कच्छ के 5 बांध भी इसमें जोड़े गए हैं।
सरकार की तैयारी और मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री पटेल ने कहा, 'सरकार ने विलंबित वर्षा से उत्पन्न होने वाली कठिनाइयों का अनुमान लगाया था और जिलों को औपचारिक रूप से सूखा प्रभावित घोषित करने से पहले ही अग्रिम तैयारियाँ शुरू कर दी थीं।' उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में किसी भी संकट की स्थिति में किसानों और पशुपालकों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
पेयजल आपूर्ति को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने चिन्हित बांधों में जल 30 जून 2027 तक आरक्षित रखने का निर्णय लिया है। जल की उपलब्धता के अनुसार रबी सीजन में एक से चार सिंचाई चक्रों तक पानी उपलब्ध कराने की योजना है।
आगे क्या
राहत उपायों के क्रियान्वयन की शुरुआत 1 नवंबर 2026 से होगी। अतिरिक्त चारे के स्टॉक की खरीद प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि SDRF की सीमित राशि से कितने किसान परिवारों को वास्तविक राहत मिल पाती है, क्योंकि ₹8,500 प्रति हेक्टेयर की दर को कृषि विशेषज्ञ अपर्याप्त मानते रहे हैं।