गांधी जयंती पर गुजरात पुलिस का 'नशा मुक्त समाज' अभियान, अहमदाबाद-वडोदरा में वॉकथॉन
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात पुलिस ने 2 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर अहमदाबाद और वडोदरा में 'नशा मुक्त समाज' अभियान चलाया। दोनों शहरों में आयोजित वॉकथॉन में पुलिसकर्मियों, विद्यार्थियों, सामाजिक संस्थाओं और स्वयंसेवी संगठनों ने भाग लेकर नशे के विरुद्ध जन-जागरण का संदेश दिया।
वडोदरा में वॉकथॉन का आयोजन
वडोदरा में पुलिस कमिश्नर की अध्यक्षता में वॉकथॉन आयोजित की गई, जो डेरीडेन सर्कल से आरंभ होकर सयाजीबाग के एम्फीथिएटर पर समाप्त हुई। इसमें बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी, छात्र-छात्राएँ, सामाजिक संस्थाओं और गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे। प्रतिभागियों ने हाथों में बैनर और पोस्टर थामकर 'से नो टू ड्रग्स' और 'से नो टू टोबैको' जैसे संदेशों के साथ जागरूकता फैलाई।
पुलिस कमिश्नर नरसिंहमा कोमार ने विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल सरकारी एजेंसियों के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं — समाज और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी ज़रूरी है। उन्होंने प्रोफेसरों से विद्यार्थियों की गलत आदतों के प्रति अभिभावकों को सचेत करने का भी आग्रह किया।
अहमदाबाद में 'नशा मुक्त समाज, स्वस्थ समाज' कार्यक्रम
अहमदाबाद में भी पुलिस ने 'नशा मुक्त समाज, स्वस्थ समाज' कार्यक्रम का आयोजन किया। अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर ने उपस्थित नागरिकों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराते हुए कहा, 'हिम्मत करो, व्यसन छोड़ो। अहमदाबाद शहर पुलिस आपकी मदद के लिए तत्पर है।' यह कार्यक्रम नशा-विरोधी चेतना को जन-आंदोलन का रूप देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सोशल मीडिया पर गांधीवादी मूल्यों का आह्वान
गुजरात पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया: 'गांधी जी के सत्य, अहिंसा और अनुशासन के मूल्यों को जीवन में उतारकर सुरक्षित और जिम्मेदार समाज के निर्माण में सहभागी बनें।' यह संदेश गांधी जयंती के व्यापक सामाजिक उद्देश्यों के साथ पुलिस की नशा-विरोधी मुहिम को जोड़ता है।
अभियान का व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि गुजरात में नशाबंदी कानून दशकों से लागू है, फिर भी मादक पदार्थों की तस्करी और उपयोग एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। यह अभियान ऐसे समय में आया है जब राज्य में युवाओं के बीच नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर सामाजिक चिंता गहरी हो रही है। महात्मा गांधी की जयंती को इस अभियान के लिए चुनना प्रतीकात्मक दृष्टि से सार्थक है, क्योंकि गांधी स्वयं नशे के कट्टर विरोधी थे।
आगामी दिनों में इस अभियान को अन्य जिलों तक विस्तारित करने और स्कूल-कॉलेज स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बताई जा रही है।