गुलमर्ग में 5 जुलाई से ऑड-ईवन ट्रैफिक सिस्टम लागू, GDA का एक महीने का पायलट प्रोजेक्ट
सारांश
मुख्य बातें
गुलमर्ग डेवलपमेंट अथॉरिटी (GDA) ने 5 जुलाई 2026 से 5 अगस्त 2026 तक जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गुलमर्ग में 'ऑड-ईवन' ट्रैफिक सिस्टम पायलट आधार पर लागू करने का निर्णय लिया है। इस व्यवस्था के तहत वाहनों का प्रवेश उनके रजिस्ट्रेशन नंबर के अंतिम अंक के आधार पर तय होगा — विषम (ऑड) तारीखों पर ऑड नंबर और सम (ईवन) तारीखों पर ईवन नंबर वाले वाहन ही गुलमर्ग में प्रवेश कर सकेंगे।
क्यों लिया गया यह फैसला
हाल के पर्यटन सीज़न में गुलमर्ग की सड़कों पर यातायात का दबाव तेज़ी से बढ़ा है। GDA के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तारिक हुसैन के अनुसार, सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो सामने आए जिनमें पर्यटकों ने ट्रैफिक जाम के कारण केबल कार सेवा और अन्य पर्यटन गतिविधियाँ समय पर न ले पाने की शिकायत की थी। इन शिकायतों ने प्रशासन को त्वरित कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।
हुसैन ने कहा, 'गुलमर्ग की सड़क और पार्किंग सुविधाओं की सीमित क्षमता है। वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करना ज़रूरी हो गया था, ताकि पर्यटक बिना किसी परेशानी के अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यहाँ पहुँच सकें और गुलमर्ग का आनंद ले सकें।'
ऑड-ईवन सिस्टम कैसे काम करेगा
नई व्यवस्था सीधी और स्पष्ट है — विषम तारीखों (1, 3, 5, 7...) पर केवल विषम रजिस्ट्रेशन नंबर वाले वाहन गुलमर्ग में प्रवेश कर सकेंगे, जबकि सम तारीखों (2, 4, 6, 8...) पर सम नंबर वाले वाहनों को अनुमति होगी। GDA ने ट्रांसपोर्टरों, टूर ऑपरेटरों और पर्यटकों से इस व्यवस्था का पालन करने की अपील की है।
यह ऐसे समय में आया है जब गर्मियों के पर्यटन सीज़न में गुलमर्ग में पर्यटकों की संख्या अपने चरम पर होती है और सीमित सड़क व पार्किंग क्षमता के कारण यातायात व्यवस्था चरमराने लगती है।
पायलट प्रोजेक्ट का उद्देश्य और दायरा
GDA के सीईओ हुसैन ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था किसी को असुविधा पहुँचाने के लिए नहीं, बल्कि यातायात को नियंत्रित कर सभी पर्यटकों को बेहतर अनुभव देने के लिए लागू की जा रही है। उन्होंने कहा, 'यह फिलहाल एक पायलट परियोजना है और इसके दौरान मिलने वाले अनुभव तथा सुझावों के आधार पर आवश्यक सुधार किए जाएंगे।'
गौरतलब है कि ऑड-ईवन सिस्टम पहले दिल्ली जैसे महानगरों में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए आज़माया जा चुका है, लेकिन किसी पहाड़ी पर्यटन स्थल पर इसे पायलट आधार पर लागू करना अपने आप में एक अनूठी पहल है।
स्थानीय परिवहन संचालकों की भागीदारी
प्रशासन ने बताया कि स्थानीय परिवहन संचालकों के साथ जल्द बैठक कर उनकी राय ली जाएगी, ताकि सभी पक्षों को साथ लेकर प्रभावी यातायात प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके। GDA को उम्मीद है कि इस पहल से गुलमर्ग में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, पर्यावरण पर दबाव कम पड़ेगा और पर्यटक समय पर अपनी यात्रा पूरी कर सकेंगे।
आगे क्या होगा
5 अगस्त 2026 तक चलने वाले इस पायलट प्रोजेक्ट की समीक्षा के बाद GDA तय करेगी कि इसे आगे जारी रखा जाए, विस्तारित किया जाए या इसमें बदलाव किए जाएं। यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो यह मॉडल जम्मू-कश्मीर के अन्य व्यस्त पर्यटन स्थलों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।