15 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गुप्त नवरात्रि 2025: दस महाविद्याओं के ये 10 दिव्य स्वरूप, मां काली से मां कमला तक की साधना

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गुप्त नवरात्रि 2025: दस महाविद्याओं के ये 10 दिव्य स्वरूप, मां काली से मां कमला तक की साधना

सारांश

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से शुरू हो गई है — यह पर्व केवल उपवास नहीं, बल्कि मां आदिशक्ति के दस महाविद्या स्वरूपों की गहन साधना का अवसर है। मां काली से लेकर मां कमला तक, हर स्वरूप एक अलग दिव्य शक्ति का प्रतीक है।

मुख्य बातें

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का पर्व 15 जुलाई 2025 से आरंभ हुआ है।
गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं — मां शक्ति के 10 दिव्य स्वरूपों — की आराधना की जाती है।
साल में चार नवरात्रि आती हैं; आषाढ़ और माघ की नवरात्रि को 'गुप्त नवरात्रि' कहते हैं।
मां महाकाली दस महाविद्याओं में प्रथम और मां कमला (लक्ष्मी स्वरूप) दसवीं महाविद्या हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि की साधना से विशेष सिद्धियाँ और आत्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का पावन पर्व 15 जुलाई 2025 से आरंभ हो गया है। हिंदू धर्म में यह पर्व साधना, भक्ति और मां आदिशक्ति की विशेष आराधना के लिए समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नियम, श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई उपासना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

गुप्त नवरात्रि क्या है और क्यों है खास

वर्ष में कुल चार नवरात्रि आती हैं — चैत्र, शारदीय, आषाढ़ और माघ। इनमें आषाढ़ और माघ माह की नवरात्रि को 'गुप्त नवरात्रि' कहा जाता है, जो साधकों और तांत्रिक उपासकों के लिए विशेष महत्व रखती है। इस अवधि में दस महाविद्याओं — मां शक्ति के दस दिव्य स्वरूपों — की आराधना की परंपरा है। गौरतलब है कि ये महाविद्याएं तंत्र, योग और भक्ति तीनों मार्गों में समान रूप से पूजनीय हैं।

दस महाविद्याओं के दिव्य स्वरूप

1. मां महाकाली: दस महाविद्याओं में प्रथम स्थान पर विराजमान मां महाकाली को शक्ति, साहस और अधर्म के विनाश की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। भक्त संकटमोचन और आत्मबल की प्राप्ति के लिए उनकी उपासना करते हैं।

2. मां तारा देवी: दस महाविद्याओं में द्वितीय स्थान पर प्रतिष्ठित मां तारा को ज्ञान, करुणा और मोक्ष की दात्री देवी माना जाता है। उनकी उपासना से आध्यात्मिक उत्थान की मान्यता है।

3. मां छिन्नमस्ता: मां छिन्नमस्ता का स्वरूप रहस्यमयी और अद्वितीय माना जाता है। यह रूप त्याग, शक्ति और आत्म-नियंत्रण का प्रतीक है। साधक विशेष सिद्धियों और आध्यात्मिक उन्नति के लिए उनकी आराधना करते हैं।

4. मां षोडशी (त्रिपुरसुंदरी): मां षोडशी को सौंदर्य, सौभाग्य और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इन्हें ललिता और राजराजेश्वरी नामों से भी जाना जाता है। उनकी उपासना से जीवन में सुख-समृद्धि आने की मान्यता प्रचलित है।

5. मां भुवनेश्वरी: मां भुवनेश्वरी को सृष्टि की मूल शक्ति माना जाता है। भक्त जीवन में स्थिरता, मानसिक शांति और आध्यात्मिक विकास के लिए उनकी पूजा-अर्चना करते हैं।

6. मां भैरवी: मां भैरवी शक्ति और साहस की प्रतीक हैं। साधक नकारात्मक शक्तियों से रक्षा और आत्मविश्वास की वृद्धि के लिए उनकी आराधना करते हैं।

7. मां धूमावती: मां धूमावती को विपरीत परिस्थितियों से मुक्ति दिलाने वाली देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उनकी उपासना से जीवन की बाधाएं और कष्ट दूर होते हैं।

8. मां बगलामुखी: मां बगलामुखी को शत्रुओं पर विजय और विघ्नों को रोकने वाली देवी माना जाता है। उनकी पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व बताया गया है।

9. मां मातंगी: मां मातंगी कला, ज्ञान और वाणी की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। संगीत, शिक्षा और रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े साधक विशेष रूप से उनकी उपासना करते हैं।

10. मां कमला: मां कमला को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। वे धन, वैभव और समृद्धि की देवी हैं। उनकी उपासना से सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है।

साधना का महत्व और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के मंदिरों और साधना केंद्रों में गुप्त नवरात्रि की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। धार्मिक विद्वानों के अनुसार गुप्त नवरात्रि में की गई साधना का फल सामान्य नवरात्रि से कई गुना अधिक माना जाता है, क्योंकि यह पर्व आंतरिक शक्ति के जागरण और आत्मिक उत्थान पर केंद्रित है। 15 जुलाई से आरंभ यह पर्व भक्तों के लिए आत्मशुद्धि और दिव्य कृपा प्राप्ति का विशेष अवसर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि इन दस महाविद्याओं का दार्शनिक और सामाजिक आयाम कहीं अधिक गहरा है — ये स्वरूप भारतीय तंत्र-परंपरा में स्त्री-शक्ति के विविध रूपों का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि शारदीय और चैत्र नवरात्रि की तुलना में गुप्त नवरात्रि को मुख्यधारा मीडिया में कम स्थान मिलता है, जबकि साधना परंपरा में इसका महत्व किसी भी अन्य नवरात्रि से कम नहीं। धार्मिक विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि की दृष्टि से इन पर्वों की गहन व्याख्या पाठकों को उनकी जड़ों से जोड़ने का काम करती है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुप्त नवरात्रि 2025 कब से शुरू हो रही है?
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2025 का आरंभ 15 जुलाई से हो गया है। यह पर्व साल में दो बार — आषाढ़ और माघ महीने में — मनाया जाता है।
गुप्त नवरात्रि में किन देवियों की पूजा की जाती है?
गुप्त नवरात्रि में मां आदिशक्ति के दस महाविद्या स्वरूपों की आराधना की जाती है — मां महाकाली, तारा देवी, छिन्नमस्ता, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और मां कमला। ये दसों स्वरूप शक्ति के अलग-अलग दिव्य पहलुओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
गुप्त नवरात्रि और सामान्य नवरात्रि में क्या अंतर है?
चैत्र और शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है और ये पर्व सार्वजनिक रूप से मनाए जाते हैं। गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना होती है, जो मुख्यतः तांत्रिक और गुप्त उपासना पद्धति से जुड़ी है।
मां बगलामुखी की पूजा में पीले रंग का महत्व क्यों है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां बगलामुखी की उपासना में पीले रंग का विशेष स्थान है — पीले वस्त्र, पीले फूल और पीली सामग्री से पूजा करने की परंपरा है। माना जाता है कि यह रंग देवी की शक्ति को जागृत करने में सहायक होता है।
गुप्त नवरात्रि की साधना से क्या लाभ मिलता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि में नियम, श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई साधना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और आध्यात्मिक उन्नति होती है। साधकों के लिए यह विशेष सिद्धियाँ प्राप्त करने का भी अवसर माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 5 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 1 साल पहले