गुवाहाटी 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर ठगी: ED ने 6 बैंकों के 43 खातों से ₹2.12 करोड़ जब्त किए
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के गुवाहाटी जोनल ऑफिस-I ने 7 अक्टूबर 2026 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 5(1) के तहत एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी कर 6 बैंकों के 43 खातों में जमा कुल ₹2.12 करोड़ की राशि को अस्थायी रूप से जब्त किया है। यह कार्रवाई गुवाहाटी के एक वरिष्ठ नागरिक के साथ 'डिजिटल अरेस्ट' के जरिए किए गए सुनियोजित साइबर धोखाधड़ी मामले से जुड़ी है, जिसमें ठगों ने सरकारी एजेंसियों के अधिकारी बनकर पीड़ित से ₹2.13 करोड़ हड़प लिए।
मामले की पृष्ठभूमि और ठगी का तरीका
जांच से पता चला है कि सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच अज्ञात साइबर अपराधियों ने TRAI, मुंबई क्राइम ब्रांच और CBI के अधिकारी बनकर पीड़ित से संपर्क किया। उन्होंने पीड़ित को झूठा विश्वास दिलाया कि उनके आधार कार्ड से खुला एक बैंक खाता मनी लॉन्ड्रिंग में संलिप्त है।
इसके बाद ठगों ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से पीड़ित को 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा। उन्हें नकली अदालती कार्यवाही और फर्जी 'डिजिटल अरेस्ट वारंट' दिखाए गए तथा हर दो घंटे में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए बाध्य किया गया। यह भी धमकी दी गई कि किसी को इस बारे में बताने पर उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में ले लिया जाएगा।
पीड़ित ने किस तरह गँवाई जीवनभर की बचत
ठगों ने पहले 'RBI जांच' और फिर एक फर्जी 'बेल बॉन्ड' का बहाना बनाकर पीड़ित से कुल 19 ट्रांजैक्शन के ज़रिए ₹2.13 करोड़ अपने बताए बैंक खातों में ट्रांसफर करवाए। इसके लिए पीड़ित को अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट, म्यूचुअल फंड और शेयर बेचने पड़े और अपने पेंशन अकाउंट तथा इंश्योरेंस पॉलिसी के बदले ऋण भी लेना पड़ा।
गौरतलब है कि यह मामला देशभर में बढ़ रहे 'डिजिटल अरेस्ट' घोटालों की उस श्रृंखला का हिस्सा है, जिसमें अपराधी वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाकर उनकी जीवनभर की बचत को ठगते हैं।
मनी लॉन्ड्रिंग का जटिल नेटवर्क
ED की जांच के अनुसार, ठगी की रकम को सबसे पहले 'पहले-स्तर के म्यूल खातों' में जमा किया गया। वहाँ से इसे देशभर के व्यक्तियों, फर्मों और कंपनियों के अनेक बैंक खातों के माध्यम से विभिन्न हिस्सों में बाँटकर घुमाया गया।
रकम का पता मिटाने के लिए अपराधियों ने इसे नकद में निकाला, डिजिटल करेंसी में बदला, पेमेंट गेटवे में ट्रांसफर किया और अन्य खातों में भेजा। जांच में यह भी सामने आया कि इन खातों में हुए लेन-देन उनके खाताधारकों की घोषित वित्तीय प्रोफाइल से बिल्कुल भिन्न थे, जो साइबर अपराधियों द्वारा संचालित एक संगठित म्यूल खाता नेटवर्क की ओर इशारा करता है।
ED की जांच और कानूनी आधार
ED ने यह जांच साइबर पुलिस स्टेशन, CID, असम और गुवाहाटी द्वारा अज्ञात साइबर अपराधियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी।
जब्त किए गए ₹2.12 करोड़ उन 43 बैंक खातों में थे — जो Axis Bank, Bank of India, Federal Bank, IndusInd Bank, Punjab National Bank (PNB) और State Bank of India (SBI) में संचालित थे — जिनके माध्यम से अपराध की रकम का लेन-देन होना पाया गया और जिनमें अभी भी बैलेंस मौजूद था।
आगे क्या होगा
ED के अनुसार, इस मामले में आगे की जांच अभी जारी है और अधिक खातों व संदिग्धों की पहचान की जा सकती है। यह कार्रवाई 'डिजिटल अरेस्ट' के बढ़ते खतरे के विरुद्ध केंद्रीय जांच एजेंसियों की बढ़ती सक्रियता को दर्शाती है, और आने वाले समय में इस नेटवर्क से जुड़े और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।