ज्ञानवापी के सील वजूखाने में शिवलिंग पूजा की अनुमति पर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को करेगा सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय 24 जुलाई 2025 (गुरुवार) को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के सील किए गए वजूखाना क्षेत्र में स्थित शिवलिंग पर सावन मास के दौरान पूजा और जलाभिषेक की अनुमति देने की माँग वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। हिंदू पक्ष ने न्यायालय को आश्वस्त किया है कि वे सुरक्षा-संबंधी सभी शर्तों का पूर्णतः पालन करने को तैयार हैं।
याचिका में क्या माँगा गया है
हिंदू पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया है कि सावन के पवित्र महीने में वाराणसी स्थित ज्ञानवापी परिसर के सील वजूखाना क्षेत्र में मौजूद शिवलिंग पर धार्मिक अनुष्ठान करने की इजाजत दी जाए। याचिकाकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि वे न्यायालय द्वारा निर्धारित सभी शर्तों — जिनमें सुरक्षा प्रबंध भी शामिल हैं — का पूरी तरह अनुपालन करेंगे।
गौरतलब है कि वर्ष 2022 में सर्वोच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के बाद से परिसर के इस हिस्से को सील कर दिया गया था। तब से यह क्षेत्र किसी भी धार्मिक गतिविधि के लिए बंद है।
मध्यस्थता की कोशिश नाकाम
इस महीने की शुरुआत में सर्वोच्च न्यायालय की 'समाधान समारोह' पहल के तहत दोनों पक्षों को बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने का अवसर दिया गया था। हालाँकि, हिंदू और मुस्लिम — दोनों पक्षों ने इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप से अस्वीकार कर दिया और कानूनी आधार पर नियमित न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से मामले का निपटारा किए जाने का अनुरोध किया।
दोनों पक्षों के दावे
हिंदू पक्ष का लगातार यह कहना रहा है कि ज्ञानवापी मस्जिद मुगल काल में एक प्राचीन मंदिर को ध्वस्त करके बनाई गई थी। दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि यह मस्जिद कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त वक्फ संपत्ति है और इसकी वैधानिक स्थिति निर्विवाद है।
पूर्व में मिली अनुमतियाँ
वाराणसी जिला अदालत ने जनवरी 2024 में हिंदू श्रद्धालुओं को ज्ञानवापी परिसर के दक्षिणी तहखाने — 'व्यास तहखाने' — में पूजा-अर्चना करने की अनुमति प्रदान की थी।
इसके बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जिला अदालत के उस आदेश को चुनौती देने वाली ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन समिति की अपील को खारिज कर दिया था। उच्च न्यायालय ने वाराणसी के जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि वे श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट को व्यास तहखाने में पूजा की सुविधा देने के लिए आवश्यक इंतजाम करें।
यह प्रकरण ऐसे समय में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष है जब देशभर में ज्ञानवापी को लेकर कानूनी और सामाजिक बहस जारी है। गुरुवार की सुनवाई यह तय करेगी कि सावन में शिवलिंग पूजा की माँग पर न्यायालय का अगला कदम क्या होगा।