23 जुलाई 2026
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ज्ञानवापी के सील वजूखाने में शिवलिंग पूजा की अनुमति पर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को करेगा सुनवाई

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ज्ञानवापी के सील वजूखाने में शिवलिंग पूजा की अनुमति पर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को करेगा सुनवाई

सारांश

सावन में ज्ञानवापी के सील वजूखाने में शिवलिंग पूजा की अनुमति को लेकर हिंदू पक्ष सर्वोच्च न्यायालय पहुँचा है। 2022 से सील इस क्षेत्र पर गुरुवार की सुनवाई अहम मोड़ साबित हो सकती है — खासकर तब, जब दोनों पक्षों ने मध्यस्थता की पेशकश पहले ही ठुकरा दी है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय गुरुवार को ज्ञानवापी के सील वजूखाना क्षेत्र में सावन के दौरान शिवलिंग पूजा की अनुमति माँगने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा।
यह क्षेत्र वर्ष 2022 से सर्वोच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के तहत सील है।
हिंदू और मुस्लिम — दोनों पक्षों ने न्यायालय की 'समाधान समारोह' मध्यस्थता पहल को अस्वीकार कर दिया है।
वाराणसी जिला अदालत ने जनवरी 2024 में हिंदू पक्ष को व्यास तहखाने में पूजा की अनुमति दी थी, जिसे इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा।
हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद मुगल काल में मंदिर तोड़कर बनाई गई थी; मुस्लिम पक्ष इसे वैध वक्फ संपत्ति बताता है।

सर्वोच्च न्यायालय 24 जुलाई 2025 (गुरुवार) को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के सील किए गए वजूखाना क्षेत्र में स्थित शिवलिंग पर सावन मास के दौरान पूजा और जलाभिषेक की अनुमति देने की माँग वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। हिंदू पक्ष ने न्यायालय को आश्वस्त किया है कि वे सुरक्षा-संबंधी सभी शर्तों का पूर्णतः पालन करने को तैयार हैं।

याचिका में क्या माँगा गया है

हिंदू पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया है कि सावन के पवित्र महीने में वाराणसी स्थित ज्ञानवापी परिसर के सील वजूखाना क्षेत्र में मौजूद शिवलिंग पर धार्मिक अनुष्ठान करने की इजाजत दी जाए। याचिकाकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि वे न्यायालय द्वारा निर्धारित सभी शर्तों — जिनमें सुरक्षा प्रबंध भी शामिल हैं — का पूरी तरह अनुपालन करेंगे।

गौरतलब है कि वर्ष 2022 में सर्वोच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के बाद से परिसर के इस हिस्से को सील कर दिया गया था। तब से यह क्षेत्र किसी भी धार्मिक गतिविधि के लिए बंद है।

मध्यस्थता की कोशिश नाकाम

इस महीने की शुरुआत में सर्वोच्च न्यायालय की 'समाधान समारोह' पहल के तहत दोनों पक्षों को बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने का अवसर दिया गया था। हालाँकि, हिंदू और मुस्लिम — दोनों पक्षों ने इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप से अस्वीकार कर दिया और कानूनी आधार पर नियमित न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से मामले का निपटारा किए जाने का अनुरोध किया।

दोनों पक्षों के दावे

हिंदू पक्ष का लगातार यह कहना रहा है कि ज्ञानवापी मस्जिद मुगल काल में एक प्राचीन मंदिर को ध्वस्त करके बनाई गई थी। दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि यह मस्जिद कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त वक्फ संपत्ति है और इसकी वैधानिक स्थिति निर्विवाद है।

पूर्व में मिली अनुमतियाँ

वाराणसी जिला अदालत ने जनवरी 2024 में हिंदू श्रद्धालुओं को ज्ञानवापी परिसर के दक्षिणी तहखाने — 'व्यास तहखाने' — में पूजा-अर्चना करने की अनुमति प्रदान की थी।

इसके बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जिला अदालत के उस आदेश को चुनौती देने वाली ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन समिति की अपील को खारिज कर दिया था। उच्च न्यायालय ने वाराणसी के जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि वे श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट को व्यास तहखाने में पूजा की सुविधा देने के लिए आवश्यक इंतजाम करें।

यह प्रकरण ऐसे समय में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष है जब देशभर में ज्ञानवापी को लेकर कानूनी और सामाजिक बहस जारी है। गुरुवार की सुनवाई यह तय करेगी कि सावन में शिवलिंग पूजा की माँग पर न्यायालय का अगला कदम क्या होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कानूनी दृष्टि से यह उस सील आदेश को चुनौती देती है जो स्वयं सर्वोच्च न्यायालय ने 2022 में दिया था। यदि न्यायालय अनुमति देता है, तो यह मिसाल बन सकती है; यदि नकारता है, तो मामला और लंबा खिंचेगा। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस तथ्य को नजरअंदाज करती है कि व्यास तहखाने में पूजा की अनुमति पहले ही मिल चुकी है — असली विवाद अब सील वजूखाने तक सीमित है, जो कानूनी और प्रतीकात्मक दोनों दृष्टियों से अधिक जटिल है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ज्ञानवापी के सील वजूखाने में पूजा की माँग क्या है?
हिंदू पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय से सावन मास के दौरान ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के सील वजूखाना क्षेत्र में स्थित शिवलिंग पर पूजा और जलाभिषेक करने की अनुमति माँगी है। यह क्षेत्र वर्ष 2022 से न्यायालय के अंतरिम आदेश के तहत सील है।
सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर कब सुनवाई करेगा?
सर्वोच्च न्यायालय इस याचिका पर गुरुवार, 24 जुलाई 2025 को सुनवाई करेगा। हिंदू पक्ष ने न्यायालय को आश्वस्त किया है कि वे सुरक्षा-संबंधी सभी शर्तों का पालन करने को तैयार हैं।
ज्ञानवापी में 'समाधान समारोह' पहल क्यों विफल हुई?
सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों को बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने का प्रस्ताव दिया था, जिसे हिंदू और मुस्लिम — दोनों पक्षों ने औपचारिक रूप से अस्वीकार कर दिया। दोनों पक्षों ने कानूनी आधार पर नियमित न्यायिक प्रक्रिया से मामले के निपटारे को प्राथमिकता दी।
व्यास तहखाने में पूजा की अनुमति कब और कैसे मिली?
वाराणसी जिला अदालत ने जनवरी 2024 में हिंदू श्रद्धालुओं को ज्ञानवापी परिसर के दक्षिणी तहखाने 'व्यास तहखाने' में पूजा की अनुमति दी थी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मस्जिद प्रबंधन समिति की अपील खारिज करते हुए इस आदेश को बरकरार रखा और जिला मजिस्ट्रेट को आवश्यक इंतजाम करने का निर्देश दिया।
ज्ञानवापी विवाद में दोनों पक्षों के मुख्य दावे क्या हैं?
हिंदू पक्ष का दावा है कि ज्ञानवापी मस्जिद मुगल काल में एक प्राचीन मंदिर को ध्वस्त करके बनाई गई थी। मुस्लिम पक्ष इसे कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त वक्फ संपत्ति बताता है और मस्जिद की वैधानिक स्थिति को निर्विवाद मानता है।
राष्ट्र प्रेस
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