हरियाली अमावस्या पर महाकालेश्वर उज्जैन में दिव्य भस्म आरती, हरी भांग-बेलपत्र माला से सजे बाबा महाकाल
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 12 अगस्त 2026 को हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर तड़के हुई भस्म आरती का दृश्य असाधारण रूप से दिव्य रहा। सावन माह के कृष्ण पक्ष की इस विशेष अमावस्या पर बाबा महाकाल को हरी भांग की पत्तियों और हरे बेलपत्र की माला से सुसज्जित किया गया तथा परंपरागत रीति से भस्म रमाकर उनका विशेष शृंगार संपन्न हुआ।
कपाट खुलने का क्रम और परंपरा
मंदिर की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार तड़के सर्वप्रथम भगवान वीरभद्र से आज्ञा ली गई। इसके पश्चात् ठीक रात 3 बजे ढोल-नगाड़ों और शंखनाद की गूँज के बीच गर्भगृह के कपाट खोले गए। भस्म आरती से पूर्व पुजारियों ने बाबा का जलाभिषेक और पंचामृत अभिषेक विधिवत् संपन्न किया।
हरे शृंगार का धार्मिक महत्व
हरियाली अमावस्या और सावन माह के संयोग को देखते हुए यह विशेष शृंगार किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार हरा रंग प्रकृति, समृद्धि और भगवान शिव के प्राकृतिक स्वरूप का प्रतीक है। मान्यता यह भी है कि हरियाली अमावस्या पर भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
भक्तों की उमड़ी भीड़
देर रात से ही मंदिर के बाहर हजारों श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गई थीं। सावन माह होने के कारण भक्तों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक रही। घंटियों की ध्वनि, शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा का दिव्य स्वरूप देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयकारों से गूँज उठा।
प्रशासन की व्यवस्था
मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन की ओर से सुरक्षा एवं दर्शन व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए। कतारों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए अतिरिक्त बैरिकेडिंग लगाई गई और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई। भस्म आरती के उपरांत श्रद्धालुओं को गर्भगृह में बाबा महाकाल के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आने वाले सावन सोमवारों पर भी इसी प्रकार की विशेष व्यवस्था जारी रहने की संभावना है।