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हर्षा रिछारिया ने पिंडदान किया, अब जीवन को समर्पित किया धर्म और गुरु को

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हर्षा रिछारिया ने पिंडदान किया, अब जीवन को समर्पित किया धर्म और गुरु को

सारांश

प्रयागराज महाकुंभ से चर्चित हर्षा रिछारिया ने पिंडदान कर संन्यास लेने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि संकट के समय काम न आने वाले रिश्तों का पिंडदान करना कोई दुःख नहीं है।

मुख्य बातें

हर्षा रिछारिया ने पिंडदान कर संन्यास लिया।
उन्होंने धर्म और समाज के प्रति समर्पित जीवन जीने का निर्णय लिया।
पिछले डेढ़ साल से वह एक विशेष मार्ग पर चल रही थीं।
रिश्तों की स्वार्थता पर सवाल उठाया।
गुरुजी के मार्गदर्शन में नई शुरुआत की।

इंदौर, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रयागराज महाकुंभ में चर्चित मॉडल और इन्फ्लुएंसर हर्षा रिछारिया ने अपना पिंडदान किया है और संन्यास लेने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि जो रिश्ते संकट के समय काम नहीं आते, ऐसे रिश्तों का पिंडदान करने में क्या दुःख है?

मध्य प्रदेश के उज्जैन में, हर्षा रिछारिया ने अपने गुरुओं की उपस्थिति में पिंडदान किया और धर्म के प्रति समर्पित हो गईं। यह अनुष्ठान उज्जैन के मौन तीर्थ आश्रम में महामंडलेश्वर सुमनानंद महाराज की उपस्थिति में संपन्न हुआ, जहां उन्हें संन्यास दीक्षा दी गई।

इस अनुष्ठान के बाद, हर्षा रिछारिया को एक नया नाम भी प्राप्त हुआ। अनुष्ठान के पूरा होने के बाद, उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि अब एक नई जीवन यात्रा की शुरुआत हो रही है।

हर्षा ने कहा कि पिछले डेढ़ साल से वह उस मार्ग पर चल रही थीं, जिसकी शुरुआत उन्होंने की थी। बहुत विरोध हुआ और कई कठिनाइयाँ आईं। ऐसे में, यह विचार आया कि क्या वह इस मार्ग को छोड़ देंगी, क्योंकि जिनके लिए वह यह कर रही थीं, वे उनका साथ नहीं दे रहे थे।

उन्होंने आगे कहा कि जब वह इसे छोड़ने के बारे में सोचने लगीं, तो भीतर से सवाल आया कि क्या वह इसे छोड़ सकती हैं। धर्म के मार्ग पर एक बार चलकर उसे छोड़ने की सोच नहीं सकते। उन्हें लगा कि वह इससे नहीं निकल सकतीं। उन्होंने बताया कि वह काफी समय से संन्यास लेने का विचार कर रही थीं और अब जाकर यह संभव हुआ है। अब एक नई शुरुआत होगी।

उन्होंने कहा कि अब तक वह केवल अपने परिवार, माता-पिता और अपने लिए सोच रही थीं, लेकिन अब गुरुजी के मार्गदर्शन में धर्म और समाज के लिए सोचेंगी। माता-पिता के अलावा समाज में कोई नहीं होता। दुःख में कोई साथ नहीं आता। अगर रिश्ते इतने स्वार्थी होते हैं, तो ऐसे रिश्तों का पिंडदान करने में बुराई क्या है?

हर्षा रिछारिया ने कहा कि अब उनका जीवन सनातन, धर्म, ईश्वर और गुरुदेव को समर्पित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समाज में रिश्तों की जड़ों पर एक सवाल भी खड़ा करता है। यह कदम धर्म और गुरु के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हर्षा रिछारिया ने पिंडदान क्यों किया?
हर्षा रिछारिया ने पिंडदान किया क्योंकि वह उन रिश्तों को छोड़ना चाहती थीं जो संकट के समय में उनके लिए उपयोगी नहीं थे।
हर्षा रिछारिया का नया नाम क्या है?
हर्षा रिछारिया को उनके पिंडदान के बाद एक नया नाम दिया गया है, लेकिन वह नाम अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।
हर्षा रिछारिया का संन्यास लेने का उद्देश्य क्या है?
उनका संन्यास लेने का उद्देश्य अब धर्म और समाज के लिए समर्पित जीवन जीना है।
पिंडदान का धार्मिक महत्व क्या है?
पिंडदान का धार्मिक महत्व मृतकों की आत्मा की शांति के लिए किया जाता है और यह संबंधों की स्वार्थता को छोड़ने का प्रतीक भी है।
हर्षा रिछारिया के गुरु कौन हैं?
हर्षा रिछारिया के गुरु महामंडलेश्वर सुमनानंद महाराज हैं, जिनकी उपस्थिति में उन्होंने अपना पिंडदान किया।
राष्ट्र प्रेस
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