2 अक्टूबर 2026
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हरियाणा ₹645 करोड़ गबन: ईडी ने 14 ठिकानों पर मारे छापे, ₹4.30 करोड़ नकद जब्त, ₹22 करोड़ फ्रीज

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हरियाणा ₹645 करोड़ गबन: ईडी ने 14 ठिकानों पर मारे छापे, ₹4.30 करोड़ नकद जब्त, ₹22 करोड़ फ्रीज

सारांश

हरियाणा के ₹645 करोड़ के कथित सरकारी गबन मामले में ईडी ने एक साथ 14 ठिकानों पर छापे मारे — ज्वेलर्स, शेल कंपनियाँ और एक कथित बिचौलिया निशाने पर। सीबीआई पहले ही छह आईएएस अधिकारियों को आरोपी बना चुकी है। अब तक ₹211 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त।

मुख्य बातें

ईडी ने 2 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ , मोहाली और पंचकूला में 14 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
तलाशी के दौरान ₹4.30 करोड़ नकद जब्त और करीब ₹22 करोड़ के बैंक बैलेंस फ्रीज किए गए।
कथित मास्टरमाइंड रिभव ऋषि पर आरोप है कि उसने शेल कंपनियों के ज़रिए ज्वेलर्स तक गबन की रकम पहुँचाई।
सीबीआई ने पंचकूला विशेष अदालत में हरियाणा कैडर के छह आईएएस अधिकारियों सहित अन्य के खिलाफ तीसरी चार्जशीट दाखिल की है।
अब तक इस मामले में चार लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और लगभग ₹211 करोड़ की संपत्तियाँ अटैच, जब्त या फ्रीज की जा चुकी हैं।
ईडी ने पीएमएलए अदालत में 14 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है; जाँच जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के चंडीगढ़ जोनल ऑफिस-II ने 2 अक्टूबर 2026 को हरियाणा सरकार के ₹645 करोड़ के कथित सरकारी गबन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी प्रवर्तन कार्रवाई करते हुए चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में 14 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई में ₹4.30 करोड़ नकद जब्त किए गए और करीब ₹22 करोड़ के बैंक बैलेंस को फ्रीज किया गया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ नगर निगम और अन्य सरकारी खातों से जुड़े सार्वजनिक धन के कथित गबन से संबंधित है। ईडी ने फरवरी 2026 में हरियाणा पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू की थी। उस एफआईआर में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में हरियाणा के विकास एवं पंचायत विभाग के बैंक खातों की राशि में गड़बड़ी का खुलासा हुआ था। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में प्रवर्तन एजेंसियों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है।

किन ठिकानों पर हुई कार्रवाई

ईडी की छापेमारी में कई ज्वेलर्स और उनसे जुड़ी संस्थाओं को निशाना बनाया गया। इनमें मलिक ज्वेलर्स, केएलजी ज्वेल्स और उसकी सहयोगी इकाइयाँ केएलजी इंफ्रा व केएलजी एंड कंपनी, एमबी गोल्ड ट्रेडर्स, शाम ज्वेलर्स और सुंदर ज्वेलर्स शामिल हैं। इसके अतिरिक्त कथित बिचौलिए गौरव कंसल के ठिकाने पर भी कार्रवाई की गई।

ईडी का आरोप है कि गौरव कंसल ने अपराध से अर्जित धनराशि को अलग-अलग माध्यमों से स्थानांतरित करने और उसकी लेयरिंग करने में बिचौलिए की भूमिका निभाई।

किसे कितना मिला — जाँच के दावे

ईडी की जाँच के अनुसार, कथित तौर पर गबन किए गए सरकारी धन को विभिन्न ज्वेलर्स के बैंक खातों के ज़रिए कारोबारी लेन-देन के रूप में दिखाकर इधर-उधर भेजा गया। जाँच एजेंसी के दावे के मुताबिक, मलिक ज्वेलर्स को कथित तौर पर करीब ₹58 करोड़ मिले। केएलजी ग्रुप को ₹26 करोड़, एम.बी. गोल्ड ट्रेडर्स को ₹5 करोड़, शाम ज्वेलर्स को ₹3.66 करोड़ और सुंदर ज्वेलर्स को करीब ₹3.15 करोड़ मिले।

ईडी का आरोप है कि यह रकम कथित मास्टरमाइंड रिभव ऋषि की ओर से बनाई गई बिचौलिया शेल कंपनियों के माध्यम से इन संस्थाओं तक पहुँचाई गई। एजेंसी के अनुसार, यह धन कथित रूप से हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों और चंडीगढ़ केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन के बैंक खातों से निकला था।

आईएएस अधिकारी और सीबीआई की चार्जशीट

ईडी ने दावा किया है कि ज्वेलर्स के माध्यम से लॉन्डर की गई रकम आईडीएफसी फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी मामले में कथित रूप से शामिल आईएएस अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों तक पहुँची। इस मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने पंचकूला की विशेष अदालत में तीसरी चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें हरियाणा कैडर के छह आईएएस अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है।

अब तक की कार्रवाई और आगे की जाँच

ईडी के अनुसार, इससे पहले इसी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जाँच एजेंसी अब तक इस मामले में लगभग ₹211 करोड़ की चल और अचल संपत्तियों को अटैच, जब्त या फ्रीज कर चुकी है। ईडी ने पंचकूला की विशेष पीएमएलए अदालत में 14 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत भी दाखिल की है। छापेमारी के दौरान नकदी के अलावा विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं। ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जाँच जारी है और आने वाले दिनों में और कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरियाणा ₹645 करोड़ गबन मामला क्या है?
यह मामला हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ नगर निगम और अन्य सरकारी खातों से ₹645 करोड़ के कथित गबन से जुड़ा है। आरोप है कि सरकारी धन को शेल कंपनियों और ज्वेलर्स के बैंक खातों के ज़रिए मनी लॉन्डरिंग की गई।
ईडी की छापेमारी में क्या मिला?
2 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में 14 ठिकानों पर छापेमारी में ₹4.30 करोड़ नकद जब्त किए गए और करीब ₹22 करोड़ के बैंक बैलेंस फ्रीज किए गए। इसके अलावा आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं।
इस मामले में कौन-कौन आरोपी हैं?
सीबीआई ने पंचकूला की विशेष अदालत में हरियाणा कैडर के छह आईएएस अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों को आरोपी बनाते हुए तीसरी चार्जशीट दाखिल की है। ईडी ने कथित मास्टरमाइंड रिभव ऋषि और बिचौलिए गौरव कंसल सहित 14 आरोपियों के खिलाफ पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की है।
मामले में अब तक कितनी संपत्ति जब्त हुई है?
ईडी अब तक इस मामले में लगभग ₹211 करोड़ की चल और अचल संपत्तियों को अटैच, जब्त या फ्रीज कर चुकी है। इसके अलावा चार लोगों को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
ज्वेलर्स की इस मामले में क्या भूमिका बताई गई है?
ईडी के अनुसार, मलिक ज्वेलर्स, केएलजी ज्वेल्स, एमबी गोल्ड ट्रेडर्स, शाम ज्वेलर्स और सुंदर ज्वेलर्स के बैंक खातों का उपयोग कथित तौर पर गबन की रकम को वैध व्यापारिक लेन-देन के रूप में दिखाने के लिए किया गया। रिभव ऋषि द्वारा बनाई गई शेल कंपनियों के माध्यम से यह रकम इन ज्वेलर्स तक पहुँचाई गई।
राष्ट्र प्रेस
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