हजरतगंज हत्याकांड: श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और दानिश को 10 दिन की न्यायिक हिरासत, गोसाईगंज जेल भेजा
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ की एक अदालत ने 22 अक्टूबर 2026 को हजरतगंज हत्याकांड की मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर दानिश को 10 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अदालती आदेश के तुरंत बाद श्रद्धा दुबे को महिला पुलिसकर्मियों की कड़ी निगरानी में गोसाईगंज स्थित लखनऊ जेल ले जाया गया।
कोर्ट में पेशी और हिरासत का आदेश
गुरुवार को हजरतगंज पुलिस ने तीनों आरोपियों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया और न्यायिक हिरासत की माँग की। अदालत ने पुलिस की अर्जी स्वीकार करते हुए तीनों को 10 दिनों के लिए जेल भेजने का निर्देश दिया। न्यायिक हिरासत की अवधि में हजरतगंज पुलिस को जेल के भीतर जाकर आरोपियों से पूछताछ करने की अनुमति भी मिल गई है।
फरारी के 13 दिन होंगे पूछताछ का केंद्र
पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ का मुख्य फोकस फरारी के 13 दिनों पर रहेगा — इस दौरान श्रद्धा दुबे कहाँ-कहाँ रुकीं, किसने उनकी मदद की और धन का प्रबंध कैसे हुआ। पुलिस इन सभी बिंदुओं पर जेल के अंदर विस्तृत पूछताछ करेगी।
यह ऐसे समय में आया है जब जाँच एजेंसियाँ फरारी के दौरान हुई संभावित संलिप्तता को लेकर साक्ष्य एकत्र करने में जुटी हैं।
इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और एटीएम कार्ड अदालत में पेश
गुरुवार की सुनवाई के दौरान हजरतगंज पुलिस ने अदालत के समक्ष कई अहम साक्ष्य प्रस्तुत किए। इनमें इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, एटीएम कार्ड और डेबिट कार्ड शामिल थे। पुलिस का कहना है कि फरारी के करीब 13 दिनों के दौरान श्रद्धा दुबे और उसके साथियों ने इन्हीं कार्ड्स का उपयोग किया था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इन उपकरणों की फॉरेंसिक जाँच कराई जाएगी, जिससे फरारी के दौरान हुए लेन-देन और लोकेशन की महत्त्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। गौरतलब है कि डिजिटल फुटप्रिंट अक्सर फरार आरोपियों के रूट की पुनर्रचना में अहम भूमिका निभाते हैं।
जेल में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
जेल प्रशासन ने बताया कि श्रद्धा दुबे को सामान्य कैदियों की तरह रखा जाएगा और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में उन्हें गोसाईगंज जेल पहुँचाया गया।
आगे क्या होगा
इस मामले में अगली सुनवाई 10 दिन बाद निर्धारित है। तब तक हजरतगंज पुलिस को जेल में पूछताछ पूरी कर अपनी रिपोर्ट तैयार करनी होगी। पुलिस का मानना है कि पूछताछ के बाद फरारी के दौरान की कई परतें खुल सकती हैं, जिससे मामले में और अहम खुलासे संभव हैं।